लड़कियां कपड़े जानबूझ कर नहीं सरकातीं: दीपिका
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दीपिका ने फेसबुक पर लिखा है कि कई बार सिर्फ सुर्खियां बटारेने के लिए इस तरह की खबरें लगाई जाती हैं। लोगों को रीयल लाइफ और रील लाइफ का अंतर स्पष्ट समझ में आना चाहिए। मैं अपने प्रोफेशन में कम कपडे़ पहनूं या ज्यादा इससे किसी को कोई फर्क नहीं पडना चाहिए।
दीपिका ने कहा- फिल्मों में कम कपड़े पहनना एक रोल की डिमांड होती है। लेकिन रियल लाइफ में ऐसा नहीं होता है। वहां पर किसी के कपड़े पहनने के अंदाज को सार्वजनिक चर्चा का या दिखावे का विषय नहीं बनाना चाहिए। महिलाओं की इज्जत का सवाल उठाते हुए दीपिका ने कहा कि यह तय करना होगा कि समाज के अंदर महिलाओं के साथ कैसा व्यवहार किया जाए।
लड़की की सेक्स की इच्छा पर अंदाजा न लगाएं
फेसबुक पेज पर अपने कमेंट की शुरुआत में ही दीपिका लिखती है कि जब तक एक औरत खुद हाँ नहीं कहती तब तक किसी को यह अंदाजा नहीं लगाना चाहिए कि वो सेक्स करना चाहती है। दीपिका लिखती हैं कि मुझे अपने काम के बारे में अच्छे से पता है, मेरा काम बहुत डिमांडिंग है- जो मुझसे बहुत कुछ करवाना चाहता है।
किसी रोल की मांग हो सकती है कि मैं सर से पैर तक कपड़े पहनूं। या उसके उलट भी हो कि मैं पूरी तरह न्यूड हो जाऊं। एक कलाकार के रूप में यह मेरा निर्णय होगा। यह फर्क समझना होगा कि रोल और रियल में अंतर होता है और मेरा काम मुझे दिए गए रोल को जोरदार तरीके से निभाना है।
मत की जाए शाहरुख के साथ तुलना
दीपिका ने लिखा कि मुझे लगता है क्लीवेज की इस घटना को शाहरुख के एटपैक्स और किसी औरत के शरीर की बनावट के साथ जोड़ा मत जाए। यह दोनों अलग-अलग बातें हैं। दीपिका ने लिखा कि मैने एक विचारधारा के खिलाफ आवाज उठाई है जो यकीनन हमारे प्रगति और विकास को रोकती है।
दीपिका कहती हैं एक ऐसे वक्त में जब औरतें मर्दों के वर्चस्व वाले समाज में जगह बना रही हैं और जिसके लिए उनकी तारीफ की जानी चाहिए। औरतें एक बड़ा काम कर रही हैं। हम असल जिंदगी और सिनेमा के बीच की लक्ष्मण रेखा को मिटा रहे हैं और एक साल पुरानी बात को ख़बर की तरह पेश करके अपनी सारी कोशिशें खराब कर रहे हैं।
एक तरह से हम अपने किए कराए पर पानी फेर रहे हैं। दीपिका ने कहा कि एक पुरानी ख़बर निकलकर उसकी हेडलाइन 'OMG: दीपिका क्लिवेज शो' देना पिछड़ी सोच को बढ़ावा देना जैसा है।
जानबूझ कर नहीं कपड़े नहीं सरकाती हैं लड़कियां
दीपिका ने लिखा कि अगर किसी अभिनेत्री के कपड़े इधर-उधर हो जाएं, तो ऐसा नहीं मान लिया जाना चाहिए कि उसने जानबूझ कर ऐसा किया होगा। ऐसा कई बार गलती या लापरवाही से भी होता है। ऐसे में कैमरे को जूम करने और उस विशेष हिस्से को गोल घेरे में डालना गलत है। होना यह चाहिए कि उस घटना को इस तरह से मत पेश करें जिसमें स्त्री का सम्मान खतरे में पड़े।
दीपिका ने आगे लिखा है कि ये ब्रेस्ट या शरीर के किसी और हिस्से पर ख़बर बनने की बात नहीं है। मामला यह है कि ख़बर किस संदर्भ में बनाई जा रही हैं या ख़बर को बेचने के लिए उसका संदर्भ किस तरह से खराब किया जा रहा है।