फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Bollywood ›   Changes in the subject matter of Child Theme Topics

तेजी से बदल रहा है बाल रंगमंच के विषयों का कलेवर

Sun, 25 Nov 2018 03:21 PM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Updated Sun, 25 Nov 2018 03:21 PM IST
विज्ञापन
Changes in the subject matter of Child Theme Topics
बाल रंगमंच
बाल रंगमंच की विषय वस्तु में समय के साथ बदलाव देखा जा रहा है। अब यहां बच्चों के नाटकों से हटकर लैंगिक रूढ़िवादिता, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय जैसे विषयों को भी जगह मिलने लगी है। 
विज्ञापन


राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में थियेटर इन एजुकेशन कंपनी (टी.आई.ई.) के प्रमुख अब्दुल लतीफ खताना ने पीटीआई-भाषा को बताया, "जमीनी स्तर पर, छोटे कस्बों और शहरों में तकरीबन हर स्कूल अपने सालाना समारोह में कम से कम एक नाटक का प्रदर्शन करता है। स्थापित थियेटर समूहों के के साथ कुछ ऐसे समूह भी हैं जो पूरी निष्ठा से बच्चों के साथ और उनके लिए काम कर रहे हैं। 
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि 30-35 साल के छोटे इतिहास के बावजूद जमीनी स्तर पर हो रही घटनाओं पर गंभीर रूप से काम करने वाले बच्चों के थियेटरों की तादाद तेजी से बढ़ रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


लतीफ ने कहा कि अपने शुरूआती वर्षों में बाल थियेटर काल्पनिक कथाओं और बच्चों के परिधानों के लिए जाने जाते थे लेकिन महिला सशक्तिकरण, लैंगिक रूढ़िवादिता और सामाजिक न्याय पर काम करने से इनके विषयों में परिपक्वता आई है। बच्चों की अब खुद की सोच विकसित होने लगी है और उन्हें पेश करने के लायक समझा जाने लगा है, उन्होंने थियेटर के माध्यम से ये संदेश दिया है।

खताना कहते हैं, "बाल थियेटर अपनी पुरानी परंपरा के बिल्कुल उलट दौर से गुजर रहे हैं। हमने महसूस करना शुरू कर दिया है कि बच्चों की जिंदगी बड़े लोगों से बिल्कुल अलग नहीं है। उनके अपने मुद्दे, परेशानियां और विचार बिंदू हैं। वे भी अपने मत प्रकट करने योग्य हैं। वे पूरी तरह खास हैं।" 

इस बदलाव का एक सबूत जश्न ए बचपन अंतर्राष्ट्रीय रंगमंच महोत्सव है जिसमें हिंदी, अंग्रेजी, असमी, मलयालम और बंगाली समेत 23 थियटेर प्रोडक्शन्स में 500 से ज्यादा युवा और व्यस्क कलाकार हिस्सा ले रहे हैं। 

नौ दिवसीय महोत्सव में रविवार को खत्म हुए श्रीलंका के रेड एप्पल इंटरनेशनल थियेटर के एक स्टेज प्ले "प्यूबर्टी" में बालिकाओं की बढ़ती उम्र के बारे में दिखाया गया। 

इसके अलावा चंडीगढ के विंग थियेटर अकादमी और विवेक हाई स्कूल का नाटक "शी स्टुड अप" भी महिला सशक्तिकरण और लैंगिक रूढ़िवादिता के इर्द-गिर्द घूमता है। 

अब्दुल लतीफ खताना का सुझाव है, "हमारा देश काफी बड़ा है, लिहाजा यहां कोई एक संस्थान या संगठन तेजी से बदलाव नहीं ला सकता। हमें एक समाज की तरह नीतिगत बदलाव लाने चाहिए, जिन्हें राज्यों द्वारा अमल में लाने की जरूरत है, ड्रामा और थियेटर को स्कूलों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना चाहिए।" 
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें मनोरंजन समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे बॉलीवुड न्यूज़, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट हॉलीवुड न्यूज़ और मूवी रिव्यु आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed