संजय दत्त: पांच मिनट का मजाक बना विवाद, बीजेपी एमएलसी बोले- पाकिस्तान या येरवडा जेल में शांति मिले
Sanjay Dutt Controversy: संजय दत्त ने शेखर सुमन के शो में एक कॉमेडी एक्ट किया, जिसके चलते बड़ा विवाद हो गया है। हालांकि एक्टर ने इस पर सफाई दे दी है फिर भी बीजेपी एमएलसी परिणय फुके ने इस विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
विस्तार
संजय ने 'शेखर टूनिाइट' में क्या बोला?
- गांधी जयंती के अवसर पर संजय दत्त शेखर सुमन के टॉक शो 'शेखर टूनाइट' में मेहमान बनकर पहुंचे थे।
- संजय दत्त ने यहां पांच मिनट का एक मजाकिया एक्ट किया।
- इस दौरान उन्होंने खुद को प्रधानमंत्री मानकर मुन्ना भाई के अंदाज में देश को संबोधित किया।
- इसके बाद उन्होंने देश की मौजूदा स्थिति पर भी अपनी राय साझा की।
- उन्होंने कहा कि उन्हें अब देश में शांति महसूस नहीं होती।
बीजेपी एमएलसी ने की निंदा
अब महाराष्ट्र के बीजेपी एमएलसी परिणय फुके ने संजय दत्त के इस बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने एएनआई से बातचीत में कहा, ‘संजय दत्त की सोच ठीक नहीं है। उन पर उम्र का असर दिखने लगा है। उन्होंने कई शराब ब्रांड लॉन्च किए हैं, जिसका उन पर बुरा असर पड़ रहा होगा। शायद उन्हें पाकिस्तान या येरवडा जेल में शांति मिले। अगर ऐसा है, तो उन्हें वहीं चले जाना चाहिए।’
आलोचना के बाद पेश की सफाई
संजय दत्त के इस बयान पर सोशल मीडिया पर जमकर विवाद हुआ। इसके बाद संजय ने अपनी सफाई पेश की। उन्होंने बताया कि ये स्क्रिप्ट पहले से लिखी हुई थीं और हास्यपूर्ण संदर्भ में कही गई थीं, साथ ही उन्होंने कहा कि उनका किसी को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था।
अभिनेता ने अपने बयान का कनेक्शन अपनी चर्चित फिल्म 'मुन्नाभाई' से जोड़ा। संजय दत्त ने लिखा, 'इसके पीछे की भावना मुन्ना भाई जैसी फिल्मों में दिखाई गई हास्य और व्यंग्य की शैली के समान थी, विशेष रूप से ‘गांधीगिरी’ की उस सोच से प्रेरित थी, जिसका उद्देश्य प्रेम, एकजुटता और सद्भावना का संदेश देना था। दुर्भाग्यवश, मेरी बातों को उस मूल संदर्भ से अलग तरीके से समझा गया'।
मामले पर जहां सब संजय की आलोचना कर रहे हैं वहीं कांग्रेस लीडर नाना पटोले ने उनका समर्थन किया है। नाना ने एएनआई से बातचीत में कहा, 'हां। यहां हर कोई असुरक्षित है। भारत जैसे महानगर में, जहां दुनिया भर से लोग रहते हैं, लोग असुरक्षित महसूस करते हैं। यहां हर रोज हत्याएं हो रही हैं। इसलिए, यह स्वाभाविक है कि वहां के कलाकार असुरक्षित महसूस करें। उन्हें धमकियां मिलती हैं। उन्होंने जो कहा वह गलत नहीं है। केंद्र और राज्य सरकार को यह समझना चाहिए कि अगर मशहूर हस्तियां भी सुरक्षित नहीं हैं, तो इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए।'