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जन्मदिन विशेष: ऊषा उत्थुप ने दी पॉप को अलग पहचान

Thu, 08 Nov 2012 11:47 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Thu, 08 Nov 2012 11:47 AM IST
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birthday special- usha uthup defined pop music in india
'सात खून माफ' में मैगी आंटी की भूमिका निभाने वाली उषा उत्थुप का एक गायक के रूप में कॅरियर भी इस फिल्म में निभाए गए उनके किरदार जितना दिलचस्प है। उषा ने भारतीय पॉप संगीत को एक अलग किस्म पहचान दी। लगभग तीन दर्जन हिंदी फिल्मों के लिए गाना गाने वाली उषा उत्थुक ने कुछ फिल्मों में अभियन भी किया।
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उत्थुप ने अपने कॅरियर की शुरुआत होटलों में गाना गाकर की। आज भी उत्थुप फिल्म से ज्यादा लाइव शो करने को तरजीह देती हैं। उषा का ट्रेडमार्क कांचीपुरम की साड़ी, बड़ी सी गोल बिंदी और बालों में फूल हैं। उषा लंबे समय से कोलकाता में रह रही हैं।
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मद्रास से मुंबई तक का सफर
उषा उत्थुप उसी साल 8 नवंबर को मद्रास में जन्मी जिस साल देश आजाद हुआ था। 20 साल की उम्र में उत्थुप ने साड़ी और लेग कैलिपर पहन कर चेन्नई के माउंट रोड स्थित जेम्स नामक एक छोटे से नाइटक्लब में गाना शुरू किया। नाइटक्लब मालिक को उषा की आवाज अच्छी लगी और उसने उषा के साथ अनुबंध कर लिया।
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इस पहली सफलता के बाद उन्होंने मुंबई के 'टॉक ऑफ द टाउन' और कलकत्ता के "ट्रिनकस" जैसे नाइटक्लब में गाना शुरू किया। ट्रिनकस के बाद, अपने अगले अनुबंध पर इन्हें दिल्ली जाना पड़ा जहां इन्हें होटल ओबेरॉय में गाना था।
 
शशि कपूर की पड़ी नजर
दिल्ली की यह पार्टी उनके कॅरियर के लिए टनिंग प्वाइंट साबित हुई। संयोगवश इस पार्टी में शशि कपूर सहित उनका पूरा ग्रुप इस पार्टी में आया था। शशि कपूर उत्थुप का गीत सुनकर प्रभावित हुए और उन्हें फिल्मों में काम करने का ऑफर दिया। 'हरे रामा हरे कृष्णा' के साथ अपना बॉलीवुड में उनके गायन की शुरुआत हुई।

आशा भोसले के साथ चर्चित गीत दम मारो दम में उनको बॉलीवुड ने नोटिस किया। उस गाने की अंग्रेजी पंक्तियां उत्थुप ने गायीं थीं। 1968 में एक ईपी रिकार्ड पर अंग्रेजी में 'जाम्बालया' और 'द किंग्सटन ट्रायो' नामक समूह का 'ग्रीनबैक डॉलर' नामक पॉप गानों की रिकॉडिंग की। लव स्टोरी तथा किंग्सटन ट्रायो समूह का अन्य गीत 'स्कॉच एंड सोडा' की बिक्री भारतीय बाज़ार में अच्छी हुई। इसके बाद का उत्थुप का कुछ समय लंदन में बीता।

 
बर्मन और बप्पी संग जुगलबंदी
उषा उत्थुप की आरके वर्मन और बप्पी लहरी के साथ अच्छी जुगलबंदी रही। इन्होंने सबसे ज्यादा गीत इन्हीं संगीतकारों के साथ गाए। 'शालीमार', 'शान, वारदात', 'प्यारा दुश्मन', 'अरमान', 'दौड़', 'अरमान', 'कभी खुशी कभी गम', 'भूत', 'जॉगर्स पार्क' और 'हैट्रिक' जैसी फिल्मों में गाए गए उनके गीत सराहे गए। विशाल भारद्वाज की फिल्म 'सात खून माफ' में रेखा भारद्वाज के साथ गाए गए गीत 'डार्लिंग' से उन्होंने खूब सुर्खिया बटोरीं। विश्व के लगभग हर बड़े शहर में उत्थुप ने अपनी प्रस्तुति दी।
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