फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Bollywood ›   birth anniversary of famous singer bade ghulam ali khan know important facts

Bade Ghulam Ali Khan: 20वीं सदी के 'तानसेन' थे गुलाम अली खां, मुगल-ए-आजम में एक गाने के लिए थे 25 हजार रुपये

Sat, 02 Apr 2022 09:23 AM IST
निधि पाल एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: निधि पाल Updated Sat, 02 Apr 2022 09:23 AM IST
विज्ञापन
सार
गुलाम अली प्रसिद्ध ठुमरी गायकों में से एक थे, जिन्होंने हिंदुस्तानी क्लासिकल म्यूजिक को एक नए आयाम तक पहुंचाया है। उनकी बर्थ एनिवर्सरी के दिन जानिए गुलाम अली से जुड़े कुछ रोचक तथ्य।
 
loader
birth anniversary of famous singer bade ghulam ali khan know important facts
बड़े गुलाम अली खान बर्थ एनिवर्सरी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

20वीं सदी के तानसेन के नाम से मशहूर बड़े गुलाम अली खां शास्त्रीय गायकों में से एक थे। गुलाम अली साहब के नाम के आगे 'बड़े' शब्द का इस्तेमाल किया ताजा है, जो उन्हें अन्य शास्त्रीय गायकों से अलग बनाता है। गुलाम अली प्रसिद्ध ठुमरी गायकों में से एक थे, जिन्होंने हिंदुस्तानी क्लासिकल म्यूजिक को एक नए आयाम तक पहुंचाया है। गुलाम अली साहब का जन्म पाकिस्तान के लाहौर में 2 अप्रैल 1902 को हुआ था। भारत के विभाजन के बाद काफी समय तक वह मुंबई, कलकत्ता और हैदराबाद में भी रहे थे।

विरासत में मिला था संगीत
गुलाम अली खां को संगीत विरासत में मिला था। उनके पिता अली बख्श खां एक मशहूर सारंगी वादक और गायक थे। गुलाम अली ने संगीत की शिक्षा अपने चाचा काले खां से ली थी। काले खां जम्मू कश्मीर रियासत में दरबारी गायक थे। पहली बार उन्हें कसूर में अपने "ऑल-नाइट रियाज़" के लिए एक ऑडियंस मिला, तब लोगों ने यह जानाा कि वह इतने अच्छे गायक हैं। उनके भाई उस्ताद मुबारक अली खान, उस्ताद भरत अली खान और उस्ताद अमानत अली खान भी कसूर-पटियाला घराने के प्रसिद्ध गायक रह चुके हैं।

नहीं पसंद था फिल्मों में गाना
शायद बहुत कम लोग ही ये जानते होंगे कि उस्ताद बड़े गुलाम अली खान ने कभी भी फिल्मों में गाने के ऑफर को स्वीकार नहीं किया। फिल्म निर्माता के. आसिफ ने उनकी ब्लॉकबस्टर फिल्म मुगल-ए-आज़म (1960) के कुछ गानों में अपनी आवाज देने के लिए उनसे संपर्क किया। इस फिल्म में दिलीप कुमार और मधुबाला की फेमस ऑन-स्क्रीन जोड़ी थी। उस्ताद ने बहुत कहने के बाद फिल्म के लिए दो गाने 'प्रेम जोगन बन के' और 'शुभ दिन आयो' गाया।

एक गाने के लिए वसूली थी बड़ी रकम
उस दौर में गुलाम अली खान ने इस फिल्म में हर गाने के लिए 25 हजार रुपये की ज्यादा की कीमत वसूल की। जबकि उनकी तुलना में मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर जैसे उम्दा गायकों को उन दिनों प्रति गाने का 500 रुपये दिया जाता था। इस बात का खुलासा सरोद वादक अमजद अली खान ने अपनी पुस्तक 'मास्टर ऑन मास्टर्स' में किया था।

मशहूर हैं गुलाम अली की  ठुमरियां
गुलाम अली की पोती समीना अली ने एक बार कहा था कि उन्होंने यह राशि इसलिए ली ताकि भविष्य में कोई भी उनसे फिल्मों में गाने के लिए संपर्क ने करे। गुलाम अली साहब ने असंख्य ठुमरियां गाई हैं, जिनमें से 'कटे न विरह की रात', 'तिरछी नजरिया के बाण', 'याद पिया की आए', 'आए न बालम' और 'क्या करूं सजनी' बहुत मशहूर हैं।

आखिरी समय तक गाया गाना
साल 1932 में गुलाम साहब ने अली जिवाई से विवाह कर लिया। जिसके बाद उनके बेटे मुनव्वर अली का जन्म हुआ, जो कि आगे चलकर महान शास्त्रीय गायक बने। अपने अंतिम समय में गुलाम साहब काफी बीमार हो गए थे, इसके बावजूद उन्होंने गाना नहीं छोड़ा। 25 अप्रैल 1968 को हैदराबाद के बशीरबाग पैलेस में उनका निधन हो गया। 

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें मनोरंजन समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे बॉलीवुड न्यूज़, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट हॉलीवुड न्यूज़ और मूवी रिव्यु आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed