क्या पिता की तरह बड़े पर्दे पर 'गदर' मचा पाएगा सनी देओल का यह 'जीनियस' बेटा?
निर्माता-निर्देशक अनिल शर्मा की नई फिल्म जीनियस का मंगलवार को मुंबई में धूमधाम से ट्रेलर लॉन्च हुआ। फिल्म से वह अपने बेटे उत्कर्ष को लॉन्च कर रहे हैं। जीनियस का ट्रेलर बहुत पसंद किया गया और अनिल शर्मा की क्लासिक फिल्म गदर: एक प्रेम कथा की तरह 'जी फैक्टर' यहां भी काम करता दिख रहा है। जीनियस और उत्कर्ष को लेकर अनिल शर्मा से रवि बुले ने विशेष बातचीत की है...
तीन दशक से ज्यादा हुए आप फिल्में बना रहे हैं, जीनियस आपके लिए कितनी अहम फिल्म है?
बेहद खास फिल्म है क्योंकि एक तो इसे सिंह साब द ग्रेट के पांच साल बाद ला रहा हूं और दूसरे इससे अपने बेटे उत्कर्ष को बतौर हीरो लॉन्च कर रहा हूं। यूं तो हर फिल्म डायरेक्टर के लिए अहम होती है। पिछले 35 साल में लोगों ने मुझे बहुत प्यार दिया। इंडस्ट्री और दर्शकों ने मुझे दिल में रखा। वे मेरी फिल्म का इंतजार कर रहे हैं। मेरी फिल्में देखने आ रहे हैं। इससे बड़ा सौभाग्य क्या हो सकता है। मैं सबका आभारी हूं। जीनियस इसलिए भी खास है कि मेरे बेटे की पहली फिल्म का ट्रेलर
लॉन्च हुआ। एक पिता के लिहाज से बहुत उत्साहित हूं। हर पिता अपने बच्चों को आगे बढ़ते देखना चाहता है। मैं चाहता हूं कि लोग उत्कर्ष को भी खूब प्यार दें। मुझे इसका भरोसा भी है क्योंकि जीनियस का गाना तेरा फितूर पहले ही बड़ा हिट हो चुका है।
अमेरिका में उत्कर्ष ने की फिल्म की पढ़ाई
सिंह साब द ग्रेट के बाद आपने लंबा वक्त लिया, क्या वजह रही?
उस फिल्म के बाद मैं दो साल के लिए अमेरिका गया था। मेरा बेटा और बेटी वहीं पढ़ रहे थे। तब सोचा कि नए तरह की फिल्म बनानी है। मैं अपने जॉनर से हटना नहीं चाहता था लेकिन मेरी कोशिश थी कि नई तकनीक, नए अंदाज के साथ काम करूं। लंबे समय में ईश्वर ने अनिल शर्मा की एक पहचान बना दी है तो लोग मुझसे खास तरह की फिल्म की अपेक्षा करते हैं। जिसमें उन्हें एंटरटेनमेंट, नाच-गाना, देशभक्ति और ऐक्शन हर चीज चाहिए होती है। मैं पब्लिक को सब देना चाहता हूं लेकिन नए अंदाज में। अमेरिका में रहते हुए मैंने खुद को ग्रो किया। इंडिया लौटा। जीनियस पर काम शुरू किया। तब तक बेटा भी पढ़ कर आ चुका था। उत्कर्ष ने फिल्म ऐक्टिंग डायरेक्शन और प्रोडक्शन की पढ़ाई की है। इसके बाद मैंने उसे लेकर फिल्म शुरू की।
फिल्म में साइंस पर बहुत जोर
लिखते वक्त सिर्फ लिखने का दबाव होता है। कोई और दबाव नहीं होता। संयोग से मेरे साथ लिखने वाले सरवैया और अमजद दोनों बहुत अच्छे थे।
फिल्म में साइंस पर बहुत जोर है।
कहानी जीनियस की है तो स्वाभाविक है कि साइंस और टेक्नोलॉजी जुड़ जाएगी।
जीनियस और साइंस, ये विषय होने से क्या लिखने में किसी तरह की समस्या रही या अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ी?
अच्छी बात यह थी कि मैं साइंस का स्टूडेंट रहा हूं। उत्कर्ष भी साइंस का छात्र है। उसने फिजिक्स और मैथ्स पढ़ा है। इत्तेफाक से मुझे राइटर भी साइंस के स्टूडेंट मिले। काम करते हुए मजा आया। हम चाहते थे कि जीनियस ऐसी फिल्म बने जिसे दर्शक दिमाग से देखें। यहां ऐसी लड़ाई है जो दिमाग को भी झकझोर देगी और दिल को भी।
फिल्म में उत्कर्ष का क्या किरदार है?
मुझे मथुरा के दोस्त-परिचित हमेशा कहते थे कि यहां शूटिंग नहीं करते हो। जीनियस लिखते हुए लीड कैरेक्टर एक छोटे शहर का निकल आया तो मैंने सोचा कि मथुरा में ही शूट कर लूं। फिर हमने बिहारी जी के मंदिर के पास ही कहानी बना ली।
फिल्म में उत्कर्ष का क्या किरदार है?
जवाब: वह अनाथ बच्चे के रूप में दिखाए गए हैं जो बांके-बिहारी जी के मंदिर में पला-बढ़ा है। लेकिन यह बच्चा जीनियस है। यह उसी के जीवन की कहानी है।
उत्कर्ष एक जीनियस हैं और दूसरे जीनियस के रूप में नवाजुद्दीन सिद्दिकी हैं। नवाज को लेने का क्या कारण था?
जवाब: मुझे जबरदस्त ऐक्टर चाहिए था और नवाज ही उस जरूरत को पूरा कर सकते थे। उन्होंने शानदार काम किया है।