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जीएलए में आयोजित ‘यूपीकॉन 2017‘ सम्मेलन में विशेषज्ञों ने रखे विचार
टीम डिजिटल / अमर उजाला
Updated Tue, 07 Nov 2017 08:07 PM IST
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इलेक्ट्रिकल, कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक्स (आइईईई यूपीकॉन 2017) पर आयोजित अंतर्राष्टीय सम्मेलन में दुनिया भर के प्रतिभागियों ने अपने शोध एवं टेक्नोलॉजी के अनुभव आदान-प्रदान किये। समारोह के मुख्य अतिथि एवं दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो योगेश सिंह ने कहा कि भारत में जो छात्र इंजीनियरिंग कर रहे हैं, वह नयी प्रौद्योगिकी के साथ किसी भी तरह से जुनूनी नहीं हैं। भारत उपग्रह चैनल, मोबाइल उपयोगकर्ताओं के लिए इलेक्ट्रॉनिक उपक्रमों का उपयोग करने के लिए अपने स्थान की जगह का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन प्रौद्योगिकी के विकास के लिए, कोई काम नहीं कर रहे।
इस सम्मेलन में दयालबाग शैक्शणिक संस्थान आगरा के निदेशक प्रो पी.के. कालरा ने कहा कि हम रोमांचक समय में रह रहे हैं, जिसमें विश्व पहले से कहीं अधिक जुड़ा हुआ है। उभरती हुई प्रौद्योगिकियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, नैनोटेक्नोलॉजी, जैव प्रौद्योगिकी , स्मार्ट ग्रिड आदि पिछले दशक में एक शानदार गति से विकसित हुआ है। इस प्रकार हमारे सम्मेलन की संरचना विभिन्न शैक्शणिक समुदायों के लोगों के बीच बातचीत के लिए अनुमति देती है, जो समाज को समग्र विकास की ओर जाता है।
वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ मिलान, इटली के मुख्य वक्ता प्रोफेसर विन्केन्जो पाइरी ने कहा कि कम्प्यूटेशनल इंटेलिजेंस सिस्टम इस प्रणाली की मदद से, हम बच्चों के लिए स्मार्ट घर, स्मार्ट कार, स्मार्ट सिटी, रसोईघर, और बहुत अधिक स्मार्ट गेम बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि संकुचन तंत्रिका नेटवर्क से सब सम्भव हो पाएगा।
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यूनिवर्सिटी पुत्रा मलेशिया से मुख्य वक्ता प्रो. इश्कर बिन अरीस ने कहा कि उनके क्शेत्रों में इलेक्ट्रिकल इलेक्ट्रॉनिक्स और ड्राइव सिस्टम, रोबोट और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस शामिल हैं। अब्दुलियाज यूनिवर्सिटी, सऊदी अरब से मुख्य वक्ता डॉ. बेल्केसेम ने कहा कि अगली पीढ़ी अब रोबोटों के साथ काम करेगी। डॉ. मोनोजित चैधरी ने कहा कि उनके शोध के हितों ने भाशा विज्ञान, संज्ञान और कंप्यूटिंग के क्शेत्रों में कटौती की हैं।
इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के कुलपति प्रो डी एस चैहान, मुख्य अतिथि दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुलपति प्रो योगेश सिंह, विशिश्ट अतिथि एवं दयालबाग शैक्षिक संस्थान आगरा के निदेशक प्रो. पी.के. कालरा, प्रो. विन्सेन्जो पाइरी, प्रो. बेलकेसम कडा, प्रो. इशक बिन अरीस, माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च लैब के डॉ. मोनोजित चैधरी, आईबीएम रिसर्च लैब के डॉ समीप मेहता, आईईई यूपी विभाग के उपाध्यक्श डॉ. कुमार वैभव श्रीवास्तव, एमएनएनआईटी इलाहाबाद के डॉ. आशीश सिंह, आइआइआइटी इलाहाबाद के डॉ सतीश कुमार सिंह, एकराम खान, डॉ. बृजेश कौशिक, प्रो. सुनील खत्री, प्रो प्रभाकर तिवारी, जीएलए के प्रतिकुलपति प्रो. ए.एम अग्रवाल, निदेशक प्रो. अनूप कुमार गुप्ता, कुलसचिव अशोक कुमार सिंह, प्रोफेसर अनिरुद्ध प्रधान, प्रो. जे रामकुमार आदि ने मां सरस्वती एवं प्रेरणास्त्रोत गणेशीलाल अग्रवाल के चित्रपट के समक्ष दीप प्रज्जवलि कर किया।
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इस सम्मेलन में दयालबाग शैक्शणिक संस्थान आगरा के निदेशक प्रो पी.के. कालरा ने कहा कि हम रोमांचक समय में रह रहे हैं, जिसमें विश्व पहले से कहीं अधिक जुड़ा हुआ है। उभरती हुई प्रौद्योगिकियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, नैनोटेक्नोलॉजी, जैव प्रौद्योगिकी , स्मार्ट ग्रिड आदि पिछले दशक में एक शानदार गति से विकसित हुआ है। इस प्रकार हमारे सम्मेलन की संरचना विभिन्न शैक्शणिक समुदायों के लोगों के बीच बातचीत के लिए अनुमति देती है, जो समाज को समग्र विकास की ओर जाता है।
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वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ मिलान, इटली के मुख्य वक्ता प्रोफेसर विन्केन्जो पाइरी ने कहा कि कम्प्यूटेशनल इंटेलिजेंस सिस्टम इस प्रणाली की मदद से, हम बच्चों के लिए स्मार्ट घर, स्मार्ट कार, स्मार्ट सिटी, रसोईघर, और बहुत अधिक स्मार्ट गेम बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि संकुचन तंत्रिका नेटवर्क से सब सम्भव हो पाएगा।
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यूनिवर्सिटी पुत्रा मलेशिया से मुख्य वक्ता प्रो. इश्कर बिन अरीस ने कहा कि उनके क्शेत्रों में इलेक्ट्रिकल इलेक्ट्रॉनिक्स और ड्राइव सिस्टम, रोबोट और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस शामिल हैं। अब्दुलियाज यूनिवर्सिटी, सऊदी अरब से मुख्य वक्ता डॉ. बेल्केसेम ने कहा कि अगली पीढ़ी अब रोबोटों के साथ काम करेगी। डॉ. मोनोजित चैधरी ने कहा कि उनके शोध के हितों ने भाशा विज्ञान, संज्ञान और कंप्यूटिंग के क्शेत्रों में कटौती की हैं।
इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के कुलपति प्रो डी एस चैहान, मुख्य अतिथि दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुलपति प्रो योगेश सिंह, विशिश्ट अतिथि एवं दयालबाग शैक्षिक संस्थान आगरा के निदेशक प्रो. पी.के. कालरा, प्रो. विन्सेन्जो पाइरी, प्रो. बेलकेसम कडा, प्रो. इशक बिन अरीस, माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च लैब के डॉ. मोनोजित चैधरी, आईबीएम रिसर्च लैब के डॉ समीप मेहता, आईईई यूपी विभाग के उपाध्यक्श डॉ. कुमार वैभव श्रीवास्तव, एमएनएनआईटी इलाहाबाद के डॉ. आशीश सिंह, आइआइआइटी इलाहाबाद के डॉ सतीश कुमार सिंह, एकराम खान, डॉ. बृजेश कौशिक, प्रो. सुनील खत्री, प्रो प्रभाकर तिवारी, जीएलए के प्रतिकुलपति प्रो. ए.एम अग्रवाल, निदेशक प्रो. अनूप कुमार गुप्ता, कुलसचिव अशोक कुमार सिंह, प्रोफेसर अनिरुद्ध प्रधान, प्रो. जे रामकुमार आदि ने मां सरस्वती एवं प्रेरणास्त्रोत गणेशीलाल अग्रवाल के चित्रपट के समक्ष दीप प्रज्जवलि कर किया।
सम्मेलन की थीम प्रो. चारूल भटनागर ने प्रस्तुत की एवं स्वागत भाषण व समस्त अतिथियों का परिचय प्रो. आनंद सिंह जलाल ने किया । दो दिवसीय कार्यक्रम में प्रतिभाग करने के लिए धन्यवाद ज्ञापन कंप्यूटर इंजीनियरिंग और एप्लीकेशन विभाग से प्रोफेसर व क्रांफ्रेंस कन्वेनर दिलीप शर्मा ने किया। रूचिरा मनके ने कार्यक्रम का संचालन किया।
सम्मेलन में सांस्कृतिक संध्या का भी आयोजन किया गया, जिसके मुख्य अतिथि मदनमोहन विवि गोरखपुर के कुलपति श्रीनिवास सिंह थे। कार्यक्रम में रोहिल खंड विवि से डॉ. विनय रिसीवाल, आइईईई यूपी से डॉ. पंकज शर्मा, डॉ. जय सिंह, अमिटी विवि नोएडा से प्रो. सुनील कुमार खत्री, एमएमयू गोरखपुर से डॉ. ब्रजेश कुमार, डॉ. दिवाकर भारद्वाज, डॉ. विशाल गोयल, डॉ. विनय तोमर, डॉ. संजय मोर्या, डॉ. विनय देवलिया, डॉ. कमल शर्मा, डॉ. पीयूश सिंघल, डॉ. अनंतराम, डॉ. मानस मिश्रा, डॉ. आशीष शर्मा, डॉ. आशीष शुक्ला, नितिन त्यागी, रोहित अग्रवाल, शशि शेखर, राकेश गालब, नीरज गुप्ता, निखिल गोविल, कैलाश कुमार, मयंक श्रीवास्तव, दीपक मंगल आदि उपस्थित रहे। सम्मेलन की समरी प्रोफेसर आशीश शर्मा व धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मनोज कुमार ने किया।
दर्जन भर देशों समेत 400 पेपर प्राप्त हुए
तीन दिवसीय सम्मेलन में स्नातकोत्तर छात्रों, अनुसंधान विद्वानों और युवा शिक्शाविदों के लिए अनुसंधान जागरूकता के विकास पर फोकस रखा गया। सम्मेलन में इलेक्ट्रिकल, कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी के क्शेत्र में विभिन्न विशयों पर प्रख्यात गणमान्य व्यक्तियों से शोध प्रस्तुति, वार्ता, पीएचडी संगोष्ठी और इंटरेक्टिव के सत्र आयोजित हुए।
इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में कुल 400 पेपर प्राप्त हुए, इनमें से 142 पेपर स्वीकार किए गए। अंत में 127 पेपर पंजीकृत हुए। बांग्लादेश, भूटान, चीन, चेक गणराज्य, मिस्र, ईरान, मैसेडोनिया, नॉर्वे, स्पेन, अमरीका, वियतनाम और यमन जैसे 12 विदेशी देशों से 25 पत्र प्राप्त हुए। विभिन्न आईआईटी, आईआईआईटी से 45 पत्र प्राप्त हुए। एनआईटी से 60, सरकार केंद्रीय विश्वविद्यालयों के 42, उद्योग जगत से 12 पत्र और अन्य विश्वविद्यालयों से 216 पेपर प्राप्त हुए हैं।
सम्मेलन में सांस्कृतिक संध्या का भी आयोजन किया गया, जिसके मुख्य अतिथि मदनमोहन विवि गोरखपुर के कुलपति श्रीनिवास सिंह थे। कार्यक्रम में रोहिल खंड विवि से डॉ. विनय रिसीवाल, आइईईई यूपी से डॉ. पंकज शर्मा, डॉ. जय सिंह, अमिटी विवि नोएडा से प्रो. सुनील कुमार खत्री, एमएमयू गोरखपुर से डॉ. ब्रजेश कुमार, डॉ. दिवाकर भारद्वाज, डॉ. विशाल गोयल, डॉ. विनय तोमर, डॉ. संजय मोर्या, डॉ. विनय देवलिया, डॉ. कमल शर्मा, डॉ. पीयूश सिंघल, डॉ. अनंतराम, डॉ. मानस मिश्रा, डॉ. आशीष शर्मा, डॉ. आशीष शुक्ला, नितिन त्यागी, रोहित अग्रवाल, शशि शेखर, राकेश गालब, नीरज गुप्ता, निखिल गोविल, कैलाश कुमार, मयंक श्रीवास्तव, दीपक मंगल आदि उपस्थित रहे। सम्मेलन की समरी प्रोफेसर आशीश शर्मा व धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मनोज कुमार ने किया।
दर्जन भर देशों समेत 400 पेपर प्राप्त हुए
तीन दिवसीय सम्मेलन में स्नातकोत्तर छात्रों, अनुसंधान विद्वानों और युवा शिक्शाविदों के लिए अनुसंधान जागरूकता के विकास पर फोकस रखा गया। सम्मेलन में इलेक्ट्रिकल, कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी के क्शेत्र में विभिन्न विशयों पर प्रख्यात गणमान्य व्यक्तियों से शोध प्रस्तुति, वार्ता, पीएचडी संगोष्ठी और इंटरेक्टिव के सत्र आयोजित हुए।
इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में कुल 400 पेपर प्राप्त हुए, इनमें से 142 पेपर स्वीकार किए गए। अंत में 127 पेपर पंजीकृत हुए। बांग्लादेश, भूटान, चीन, चेक गणराज्य, मिस्र, ईरान, मैसेडोनिया, नॉर्वे, स्पेन, अमरीका, वियतनाम और यमन जैसे 12 विदेशी देशों से 25 पत्र प्राप्त हुए। विभिन्न आईआईटी, आईआईआईटी से 45 पत्र प्राप्त हुए। एनआईटी से 60, सरकार केंद्रीय विश्वविद्यालयों के 42, उद्योग जगत से 12 पत्र और अन्य विश्वविद्यालयों से 216 पेपर प्राप्त हुए हैं।
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