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'चेन्नई' एक्सप्रेस की पांच कमियां भी जानिए
रोहित मिश्र
Updated Mon, 12 Aug 2013 05:19 PM IST
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रोहित शेट्टी निर्देशित फिल्म 'चेन्नई एक्सप्रेस' सुपर डुपर हिट होने की तरफ बढ़ गई है। यह फिल्म अपने शुरुआती तीन दिनों में ही कमाई के पिछले सारे आंकड़े तोड़ने जा रही है। बावजूद इसके फिल्म में कुछ कमियां भी हैं। जो दर्शकों को खटकती रहती हैं। आइए पड़ताल करते हैं।
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*'चेन्नई एक्सप्रेस' के 40 फीसदी डायलॉग तमिल में हैं। तमिल लड़की बनी दीपिका पादुकोन फिल्म के हीरो शाहरुख से तो तमिल स्टाईल की हिंदी में बात करती हैं लेकिन खुद के परिवार से उनके जितने भी डॉयलॉग हैं वह सारे के सारे ठेठ तमिल में हैं। तमिल से वास्ता न रखने वाले दर्शक इस बात का सिर्फ अंदाजा लगाया करते हैँ कि आपस में क्या बात हो रही है।
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*फिल्म का फर्स्ट हॉफ घटनाओं से भरा है। हर बार एक अलग तरह की घटना है। फिल्म तेज चलती है और घटनाओं में दोहराव जैसा कुछ नहीं हैं। लेकिन सेकेंड हॉफ में आते ही 'चेन्नई एक्सप्रेस' की घटनाओं में एकरूपता आने लगती हैं। सेकेंड हॉफ में यह फिल्म खिंचती हुई नजर आती है। कुछ अच्छे गाने इस एकरूपता को तोड़ते हैं लेकिन घटनाएं एक जैसी हैं।
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*रोहित शेट्टी की बाकी फिल्मों की तरह फिल्म के क्लाइमेक्स में हाई वोल्टेज ड्रामा नहीं है। रोहित शेट्टी की बाकी कॉमेडी फिल्मों में एक साथ इतने सारे भ्रम टूटते हैँ कि दर्शक हंसते-हंसते दोहरे हो जाते हैं। उनकी आखिरी फिल्म 'बोल बच्चन' के क्लाइमेक्स में एक्शन दृश्यों में भी कॉमेडी का भरपूर तड़का था लेकिन इस फिल्म के क्लाइमेक्स से हंसी बिल्कुल गायब सी थी।
*'चेन्नई एक्सप्रेस' का क्लाइमेक्स साउथ कि किसी भी एक्शन फिल्म के क्लाइमेक्स जैसा था। जहां एक कमजोर हीरो पहले जमकर पिटता है। फिर वह उठता है और अपने बहुत ताकतवर दिख रहे विलेन को पीटता है। हीरोइज्म का यह फॉर्मूला घिसा-पिटा तो लगता ही है इतनी बड़ी फिल्म को कमजोर भी करता है।
*दीपिका पादुकोन तो फिल्म में लगातार अपने किरदार में ही रहती हैं लेकिन शाहरुख खान पूरी फिल्म में सुपरस्टार शाहरुख खान ही लगते हैं। फिल्म में उनका पात्र समस्याओं से घिरे राहुल का है लेकिन वह पात्र हर सीन में लार्जर दैन लाइफ नजर आता है।