जानिए इस साल चल बसे कौन-कौन से सेलिब्रेटी
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ऐसे नामों में सदाशिव अमरापुरकर, जोहरा सहगल और देवेन वर्मा जैसे बड़े नाम भी हैं। जिनकी पहचान वैसे तो बतौर चरित्र अभिनेता रही लेकिन इन नामों ने अपने शैली से बॉलीवुड पर अमिट छाप छोड़ी। जानिए इनके बारे में।
जब बॉलीवुड की 'पारो' चली गई
बॉलीवुड में सुचित्रा सेन की पहचान उनकी हिन्दी फिल्मों के कारण बनी। जिन्होंने उन्हें हमेशा के लिए अमर कर दिया। लेकिन उनकी जिन्दगी से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं जिनपर आसानी से विश्वास नहीं होता। जैसे 17 जनवरी 2014 को इस दुनिया से रूखसत होने से पहले तक वे पिछले 33 सालों में इक्का-दुक्का ही अपने कोलकाता के फ्लैट से निकलीं।
बिमल राय की फिल्म देवदास में पारो के किरदार ने उन्हें हमेशा के लिए यादगार बना दिया। इसके अलावा मुसाफिर, चम्पाकली बम्बई का बाबू, सरहद आँधी, ममता उनकी यादगार फिल्में रहीं। उनकी अंतिम फिल्म प्रणय पाश बंगाली में बनी थी। वे अपने पति दिबानाथ के कारण ही फिल्मों में आईं। अभिनेत्री रिया और राइमा सेन सुचित्रा सेन की ही पोतियां हैं।
इस साल लोकप्रिय अभिनेत्री नंदा भी नहीं रहीं
बॉलीवुड में अभिनेत्री नंदा अपनी बहुमुखी प्रतिभा और सुंदरता के लिए पहचानी जाती रहीं। वे 60 से 80 के दशक तक सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में से एक थीं। उनकी 75 वर्ष की आयु में मुंबई के वर्सोवा स्थित निवास पर 25 मार्च 2014 को निधन हो गया।
नंदा के पिता विनायक दामोदर कर्नाटकी मराठी फिल्मों के सफल अभिनेता-निर्देशक थे। पिता के निधन के बाद नंदा को बचपन में ही फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में काम करने का मौका मिल गया। नंदा को वी. शांताराम ने फिल्म तूफान और दीया में लीड एक्ट्रैस के तौर पर ब्रेक दिया था। नंदा, वी. शांताराम की भतीजी थीं।
जब '102 साल की बच्ची' जोहरा सहगल चली गईं
अभिनेत्री जोहरा सहगल लबभग सात दशक तक थियेटर से जुड़ी रहीं। उन्होंने 10 जुलाई 2014 में इस दुनिया से रूखसत होने से पहले तक 102 साल की उम्र में भी फिल्मों में काम किया।
उन्होंने चीनी कम फिल्म में अमिताभ बच्चन के मां की भूमिका निभाई थी। साल 2012 में जब ज़ोहरा सहगल ने 100 साल पूरे किए थे तब अमिताभ बच्चन ने उन्हें '100 साल की बच्ची' कहा था। उनके जोश का अंदाजा इसी से लगया जा सकता है कि जोहरा सहगल कहती थीं, कि "अगर आप निष्क्रिय होकर घर पर बैठ गए तो समझ लीजिए आप खत्म हो गए।"
बॉलीवुड का चरित्र अभिनेता सदाशिव अमरापुरकर चला गया
सदाशिव अमरापुरकर ने लगभग 250 फिल्मों में काम किया। जिनमें से अर्धसत्य, सड़क, हुकूमत, आंखें और इश्क आदि को हमेशा याद किया जाएगा। 2013 में आई फिल्म बाम्बे टॉकीज उनकी बतौर अभिनेता आखिरी फिल्म थी। उन्हें कई बड़े हीरो अपनी फिल्मों के लकी मानते थे। उनका इसी साल नवम्बर में देहांत हो गया।
थियेटर से जुड़े अमरापुरकर को फिल्मों में पहला ब्रेक निर्देशक गोविंद निहलानी ने अर्द्धसत्य में दिया। वह इंडियन नेशनल थियेटर से जुड़े थे और इसी संस्था के एक नाटक ‘हैंड्स अप’ में इंस्पेक्टर की भूमिका निभा रहे थे। सदाशिव अमरापुर को लगा था कि निहलानी उन्हें इंस्पैक्टर की भूमिका देंगे, लेकिन यहां उन्हें मिला विलेन का रोल। निहलानी ने उन्हें अंडरवर्ल्ड के डॉन का रोल दिए।
बड़े धारावाहिकों के बड़े निर्देशक रवि चोपड़ा चले गए
इंटरटेनमेंट की दुनिया में रवि चोपड़ा को अपने महाकाव्यात्मक धारावाहिकों के लिए जाना जाता रहा, वह महाभारत और रामायण का निर्देशन किया। वहीं उनकी बर्निंग ट्रेन, जमीर, आज की आवाज, बागबान और बाबुल जैसी फिल्में भी यादगार रही।
वे 68 साल की उम्र में 12 नवंबर को इस दुनिया से चले गए। वो मशहूर निर्माता-निर्देशक बीआर चोपड़ा के बेटे और यश चोपड़ा के भतीजे थे। रवि चोपड़ा पिछले कुछ सालों से फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे थे।
जब मुस्कुराते हुए कॉमेडियन देवेन चले गए
हिंदी सिनेमा के मशहूर कॉमेडियन देवेन वर्मा का निधन इसी साल दिसम्बर में हो गया। 77 साल के देवेन का देहांत दिल का दौरा पड़ने से हुआ। उन्होंने गुलजार की सुपरहिट फिल्म 'अंगूर' में 'बहादुर' का किरदार निभाया था जो बेहद चर्चित हुआ। वे अपनी शालिन कॉमेडी के लिए जाने जाते रहे।
उन्होंने अपने करियर की शुरूआत साल 1961 में यश चोपड़ा निर्देशित फिल्म "धर्म पुत्र" से की थी। पूरे कैरियर में उन्होंने करीब 150 फिल्मों में काम किया। उन्होंने गोलमाल, सुहागन, चक्रव्यूह, अंगूर, खट्टा मीठा, नास्तिक, रंग बिरंगी, दिल और जुदाई जैसे कई हिट सुपरहिट फिल्मों में काम किया। उन्होंने एक्टिंग के साथ साथ बतौर डायरेक्टर, प्रोड्यूसर भी काम किया। उन्होंने बेशर्म, दाना पानी, बड़ा कबूतर और नादान का निर्देशन किया जबकि दाना पानी, बेशर्म, चपाती, नादान और यकीन का निर्माण किया।