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सीट का समीकरण: यहां 31 साल बाद रामवीर ने दिलाई भाजपा को जीत, कुंदरकी के पिछले 6 में से 4 चुनाव रहे सपा के नाम

Tue, 25 Aug 2026 02:50 PM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा Published by: अमन तिवारी Updated Tue, 25 Aug 2026 02:50 PM IST
सार

कुंदरकी विधानसभा सीट 1967 में अस्तित्व में आई। इस सीट पर अलग-अलग दौर में कांग्रेस, जनता दल, भाजपा, बसपा और सपा ने जीत दर्ज की। आइए जानते हैं इस सीट का पूरा चुनावी इतिहास...

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कुंदरकी विधानसभा सीट का समीकरण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो रही है। इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको अपनी खास सीरीज 'सीट का समीकरण' में उत्तर प्रदेश की हर विधानसभा सीट के इतिहास, सामाजिक ताने-बाने और उसके राजनीतिक परिदृश्य के बारे में वस्तार से बता रहे हैं। आज की कड़ी में चर्चा मुरादाबाद जिले की कुंदरकी विधानसभा सीट की। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इसका अब तक का इतिहास।

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पहले जानते हैं कुंदरकी सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला मुरादाबाद है। जिले में कुल छह विधानसभा सीटें हैं। इनमें- ठाकुरद्वारा, कांठ, बिलारी, मुरादाबाद शहर, मुरादाबाद ग्रामीण और कुंदरकी शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की आज की कड़ी में हम मुरादाबाद जिले की कुंदरकी विधानसभा सीट की बात करेंगे। मुरादाबाद जनपद की कुंदरकी विधानसभा सीट 1967 में ही अस्तित्व में आ गई थी। कुंदरकी विधानसभा के पहले विधायक एम. लाल थे। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की थी।
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कुंदरकी विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
कुंदरकी विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में मुस्लिम, अनुसूचित जाति (SC) और ठाकुर आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी मुस्लिम मतदाताओं की है, जो 55% से ज्यादा हैं। इसके बाद अनुसूचित जाति (SC) मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 15% और ठाकुर मतदाता करीब 7% हैं, जबकि सैनी मतदाता लगभग 6-7% हैं। वहीं, बाकी अन्य जातियों के मतदाता हैं। इस क्षेत्र में मुस्लिम मतदाता सबसे प्रभावशाली माने जाते हैं।

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कुंदरकी विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
कुंदरकी विधानसभा सीट के चुनावी इतिहास की बात करें तो 1967 में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर एम. लाल विधायक बने थे। उन्होंने कांग्रेस के एच. राम को 4,971 वोटों के अंतर से हराया। इस चुनाव में एम. लाल को 16,063 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के एच. राम को 11,092 वोट मिले।

1969 के विधानसभा चुनाव में कुंदरकी विधानसभा सीट पर भारतीय क्रांति दल (बीकेडी) के माही लाल विजयी हुए। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के देवी सिंह को 2,713 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में माही लाल को 23,398 वोट मिले, जबकि देवी सिंह को 20,685 वोट मिले। इस चुनाव में कुंदरकी सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी।

1974: कुंदरकी में पहली बार जीती कांग्रेस
इस विधानसभा चुनाव में कुंदरकी विधानसभा सीट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) की इंद्रा मोहिनी विजयी हुईं। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार गुलाम मोहम्मद खान को 5,985 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में इंद्रा मोहिनी को 27,573 वोट मिले, जबकि गुलाम मोहम्मद खान को 21,588 वोट मिले।

आपातकाल का समय
1974 के चुनाव के बाद देश में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। इसके बाद जनता पार्टी की नई केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि कांग्रेस पार्टी देश की जनता का विश्वास खो चुकी है। इस आधार पर केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सहित कांग्रेस शासित 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर दिया और राष्ट्रपति शासन लगा दिया। इसके बाद राज्य में 1977 में दोबारा चुनाव हुए, जिसमें जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला और राम नरेश यादव उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि यह सरकार भी ज्यादा दिनों तक सत्ता में नहीं रह सकी।

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इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
1977: कुंदरकी में भी चली जनता लहर
इस विधानसभा चुनाव में कुंदरकी विधानसभा सीट पर जनता पार्टी (जेएनपी) के अकबर हुसैन विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के हर ज्ञान सिंह को 10,192 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अकबर हुसैन को 19,655 वोट मिले, जबकि हर ज्ञान सिंह को 9,463 वोट मिले।

हालांकि उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया। विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।

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इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
1980: अकबर ने बरकार रखी सीट
1980 के विधानसभा चुनाव में कुंदरकी विधानसभा सीट पर जनता पार्टी (सेक्युलर) के अकबर हुसैन विजयी हुए। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (इंदिरा) [कांग्रेस (आई)] के राम कुंवर सिंह को 4,007 वोट से हराया। चुनाव में अकबर हुसैन को 21,247 वोट मिले, जबकि राम कुंवर सिंह को 17,240 वोट मिले।

1985: दो चुनाव बाद कांग्रेस की वापसी
1980 के बाद राज्य में 1985 में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में कुंदरकी विधानसभा सीट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) की रीना कुमारी विजयी हुईं। उन्होंने लोक दल (एलकेडी) के अकबर हुसैन को 11,327 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में रीना कुमारी को 36,347 वोट मिले, जबकि अकबर हुसैन को 25,020 वोट मिले।

1989: जनता दल ने खोला खाता
इस विधानसभा चुनाव में कुंदरकी विधानसभा सीट पर जनता दल (जेडी) के चंद्र विजय सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) की रीना कुमारी को 9,063 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में चंद्र विजय सिंह को 39,333 वोट मिले, जबकि रीना कुमारी को 30,270 वोट मिले। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के अकबर 26,459 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य में 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इन चुनावों में कुंदरकी विधानसभा सीट का समीकरण भी बदलता रहा।

1991: चेहरा बदला पर पार्टी वही जीती
कुंदरकी विधानसभा सीट पर 1991 के विधानसभा चुनाव में जनता दल (जेडी) के अकबर हुसैन विजयी हुए। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) की रीना कुमारी को 6,431 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अकबर को 41,390 वोट मिले, जबकि रीना कुमारी को 34,959 वोट मिले। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ओम पाल सिंह 19,037 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। अकबर हुसैन की कुंदरकी में ये तीसरी जीत थी। 

1993: भाजपा ने खोला कुंदरकी में खाता
कुंदरकी विधानसभा सीट पर 1993 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के चंद्र विजय सिंह उर्फ बेबी राजा विजयी हुए। उन्होंने जनता दल (जेडी) के अकबर हुसैन को 23,288 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में चंद्र विजय सिंह को 73,083 वोट मिले, जबकि अकबर हुसैन को 49,795 वोट मिले। कुंदरकी विधानसभा सीट पर ये भाजपा की पहली जीत थी। 
 

1996: पार्टी बदलकर चौथी बार जीते अकबर हुसैन 
1996 के विधानसभा चुनाव में कुंदरकी विधानसभा सीट पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के अकबर हुसैन विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के मोहम्मद रिजवान को महज 200 वोटों के बेहद करीबी अंतर से हराया। चुनाव में अकबर हुसैन को 51,888 वोट मिले, जबकि मोहम्मद रिजवान को 51,688 वोट मिले। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ऋषि पाल सिंह 51,368 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। अकबर हुसैन की कुंदरकी में ये चौथी जीत थी। इस पहली दो जीत उन्होंने जनता पार्टी के टिकट पर दर्ज की थी। तीसरी जीत उन्हें जनता दल के टिकट पर मिली। वहीं, चौथी जीत उन्होंने बसपा के टिकट पर हासिल की। 

2002: कुंदरकी में खुला सपा का खाता
2002 के विधानसभा चुनाव में कुंदरकी विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के मोहम्मद रिजवान विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ऋषि पाल सिंह को 17,882 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में मोहम्मद रिजवान को 53,348 वोट मिले, जबकि ऋषि पाल सिंह को 35,466 वोट मिले।
 

2007: अकबर के 'पंच' ने ने कराई बसपा की वापसी
कुंदरकी विधानसभा सीट पर 2007 के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के अकबर हुसैन विजयी हुए। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के हाजी मोहम्मद रिजवान को 9,270 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में अकबर हुसैन को 50,626 वोट मिले, जबकि हाजी मोहम्मद रिजवान को 41,356 वोट मिले। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के चंद्रपाल सिंह उर्फ पप्पू चौधरी 24,727 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। अकबर हुसैन की कुंदरकी सीट पर ये पांचवीं जीत थी।

2012: सपा के दबदबे का दौर 
2012, 2017 और 2022 के चुनाव की बात करें तो कुंदरकी विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) का दबदबा रहा। 2012 और 2017 के चुनाव में इस सीट से सपा के प्रत्याशी मोहम्मद रिजवान विजयी हुए। इस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के रामवीर सिंह को 2012 में 17,201 और 2017 में 10,821 वोटों के अंतर से हराया।
 

2022: जियाउर ने लगवाई सपा की हैट्रिक
2022 के विधानसभा चुनाव में कुंदरकी विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) के जियाउर रहमान बर्क विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कमल कुमार को 43,162 वोटों के बड़े अंतर से हराया। चुनाव में सपा के जियाउर रहमान को 1,25,792 वोट मिले, जबकि भाजपा के कमल कुमार को 82,630 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के मोहम्मद रिजवान 42,742 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2024: 31 साल बाद जीती भाजपा
कुंदरकी में 2024 में उपचुनाव हुए, क्योंकि 2022 में समाजवादी पार्टी से विधायक चुने गए जियाउर रहमान बर्क ने 2024 में संभल सीट से लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बन गए। लोकसभा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने कुंदरकी विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद खाली हुई इस सीट पर चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार रामवीर सिंह ने जीत हासिल की और उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी मोहम्मद रिजवान को मात दी।
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