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सीट का समीकरण: आजमगढ़ विधानसभा में पिछले 10 में से नौ चुनाव दुर्गा प्रसाद के नाम; ऐसा है यहां का चुनावी इतिहास
Tue, 29 Sep 2026 06:21 AM IST
अमन तिवारी
इलेक्शन डेस्क, नोएडा
इलेक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: अमन तिवारी
Updated Tue, 29 Sep 2026 06:21 AM IST
सार
आजमगढ़ विधानसभा सीट 1957 के विधानसभा चुनाव में अस्तित्व में आई। यहां अब तक हुए 17 चुनावों में सिर्फ पांच चेहरे ही विधायक बने हैं। दो चेहरे ऐसे रहे जो एक एक बार जीते। बाकी तीन चेहरों ने एक से ज्यादा बार जीत दर्ज की। यानी, यहां के मतदाताओं ने जिसे एक बार चुनाव उसे कई बार विधानसभा भेजा। आइये जानते हैं आजमगढ़ सीट का चुनावी इतिहास...
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आजमगढ़ सीट का समीकरण
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव में अभी समय जरूर है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। जहां एक तरफ भाजपा के सामने सत्ता बचाने की चुनौती है, वहीं समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बसपा और अन्य दल अपनी पकड़ मजबूत करने में जुट गए हैं। यूपी की इसी चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको राज्य की हर सीट के इतिहास और राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात आजमगढ़ जिले की आजमगढ़ विधानसभा सीट की होगी। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इतिहास।
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पहले जानते हैं आजमगढ़ विधानसभा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें 403 विधानसभा सीटें आती हैं। इन्हीं में से एक जिला आजमगढ़ है। जिले में कुल दस विधानसभा सीटें हैं। इनमें- अतरौलिया, गोपालपुर, सगड़ी, मुबारकपुर, आजमगढ़, निजामाबाद, फूलपुर-पवई, दीदारगंज, लालगंज और मेहनगर शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज हम आजमगढ़ जिले की आजमगढ़ विधानसभा सीट की बात करेंगे। आजमगढ़ विधानसभा सीट परिसीमन के बाद 1956 में अस्तित्व में आई थी और यहां पहली बार 1957 में विधानसभा चुनाव कराए गए थे। इस सीट के पहले विधायक विश्राम बने थे, जिन्होंने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में जीत हासिल की थी।
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बीते 10 में नौ चुनाव दुर्गा प्रसाद यादव के नाम
इस विधानसभा सीट पर दुर्गा प्रसाद यादव का एकछत्र राज रहा है। 1993 के चुनाव को छोड़कर साल 1985 से वे लगातार इस क्षेत्र से विधायक चुने गए हैं। अपने इस चुनावी सफर में वे 1985 में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद 1989 और 1991 के चुनाव में उन्होंने जनता दल के टिकट पर जीत दर्ज की। फिर वे सपा (समाजवादी पार्टी) में शामिल हो गए और 1996 के बाद से लगातार समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत हासिल करते आ रहे हैं। इस दौरान कई राजनीतिक दलों ने उनके इस किले को भेदने की कोशिश की, लेकिन सभी नाकाम रहे।
आजमगढ़ विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
आजमगढ़ विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में यादव, दलित और मुस्लिम आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी यादव मतदाताओं की है, जो लगभग 20% हैं। इसके बाद दलित मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 17% और मुस्लिम मतदाताओं की करीब 16% है। अन्य प्रमुख वर्गों में क्षत्रिय मतदाता लगभग 12%, वैश्य मतदाता करीब 9%, भूमिहार लगभग 7% और ब्राह्मण मतदाता करीब 6% हैं। इसके अलावा सोनकर मतदाता लगभग 4%, जबकि चौहान और पासी मतदाता करीब 3-3% हैं। वहीं, बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों व समुदायों से आते हैं।
इस विधानसभा सीट पर दुर्गा प्रसाद यादव का एकछत्र राज रहा है। 1993 के चुनाव को छोड़कर साल 1985 से वे लगातार इस क्षेत्र से विधायक चुने गए हैं। अपने इस चुनावी सफर में वे 1985 में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद 1989 और 1991 के चुनाव में उन्होंने जनता दल के टिकट पर जीत दर्ज की। फिर वे सपा (समाजवादी पार्टी) में शामिल हो गए और 1996 के बाद से लगातार समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत हासिल करते आ रहे हैं। इस दौरान कई राजनीतिक दलों ने उनके इस किले को भेदने की कोशिश की, लेकिन सभी नाकाम रहे।
आजमगढ़ विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
आजमगढ़ विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में यादव, दलित और मुस्लिम आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी यादव मतदाताओं की है, जो लगभग 20% हैं। इसके बाद दलित मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 17% और मुस्लिम मतदाताओं की करीब 16% है। अन्य प्रमुख वर्गों में क्षत्रिय मतदाता लगभग 12%, वैश्य मतदाता करीब 9%, भूमिहार लगभग 7% और ब्राह्मण मतदाता करीब 6% हैं। इसके अलावा सोनकर मतदाता लगभग 4%, जबकि चौहान और पासी मतदाता करीब 3-3% हैं। वहीं, बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों व समुदायों से आते हैं।
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इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
आजमगढ़ विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
1957: प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने दर्ज की जीत
आजमगढ़ जिले की आजमगढ़ विधानसभा सीट के पहले यानी कि साल 1957 के चुनाव में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी (पीएसपी) ने जीत दर्ज की। इसमें पीएसपी के विश्राम विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के शिव राम को 5,794 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में विश्राम को 14,231 वोट, जबकि शिव राम को 8,437 वोट मिले।
भीमा प्रसाद ने लगाई जीत की हैट्रिक, पार्टी बदली लेकिन नहीं रुका जीत का सिलसिला
इसके बाद राज्य में 1962, 1967 और 1969 के चुनाव हुए। इन तीनों चुनावों में भीमा प्रसाद ने जीत हासिल की। 1962 में उन्होंने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के ब्रह्मचारी चंद्रबली को 6,929 वोटों के अंतर से हराया। 1967 और 1969 के चुनाव में उन्होंने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीता। 1967 में उन्होंने भारतीय जनसंघ के आर. चंद्र को 8,015 वोटों के अंतर से हराया। वहीं, 1969 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के ब्रह्मचारी चंद्रबली को 3,954 वोटों के अंतर से हराया।
1957: प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने दर्ज की जीत
आजमगढ़ जिले की आजमगढ़ विधानसभा सीट के पहले यानी कि साल 1957 के चुनाव में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी (पीएसपी) ने जीत दर्ज की। इसमें पीएसपी के विश्राम विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के शिव राम को 5,794 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में विश्राम को 14,231 वोट, जबकि शिव राम को 8,437 वोट मिले।
भीमा प्रसाद ने लगाई जीत की हैट्रिक, पार्टी बदली लेकिन नहीं रुका जीत का सिलसिला
इसके बाद राज्य में 1962, 1967 और 1969 के चुनाव हुए। इन तीनों चुनावों में भीमा प्रसाद ने जीत हासिल की। 1962 में उन्होंने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के ब्रह्मचारी चंद्रबली को 6,929 वोटों के अंतर से हराया। 1967 और 1969 के चुनाव में उन्होंने संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीता। 1967 में उन्होंने भारतीय जनसंघ के आर. चंद्र को 8,015 वोटों के अंतर से हराया। वहीं, 1969 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के ब्रह्मचारी चंद्रबली को 3,954 वोटों के अंतर से हराया।
1974: भारतीय क्रांति दल पहली बार जीता चुनाव
1974 के चुनाव में आजमगढ़ विधानसभा सीट से भारतीय क्रांति दल के विश्राम विजयी हुए। तीन चुनाव के बाद आजमगढ़ की जनता ने विश्राम को दूसरी बार चुना था। उन्होंने कांग्रेस के भीमा प्रसाद को 12,847 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में विश्राम को 33,638 वोट, जबकि भीमा प्रसाद को 20,791 वोट मिले। वहीं, भारतीय जनसंघ के राधे श्याम 5,594 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
1974 के चुनाव में आजमगढ़ विधानसभा सीट से भारतीय क्रांति दल के विश्राम विजयी हुए। तीन चुनाव के बाद आजमगढ़ की जनता ने विश्राम को दूसरी बार चुना था। उन्होंने कांग्रेस के भीमा प्रसाद को 12,847 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में विश्राम को 33,638 वोट, जबकि भीमा प्रसाद को 20,791 वोट मिले। वहीं, भारतीय जनसंघ के राधे श्याम 5,594 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
1977: पहली बार जीती कांग्रेस
इस चुनाव में आजमगढ़ विधानसभा सीट पर पहली बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की। चुनाव में कांग्रेस के भीमा प्रसाद विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी के कपिलदेव को 4,816 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में भीमा प्रसाद को 33,524 वोट, जबकि कपिलदेव को 28,708 वोट मिले। भीमा प्रसाद की आजमगढ़ सीट पर यह चौथी जीत थी। इस दौरान उन्होंने तीन अलग-अलग दलों के टिकट पर जीत दर्ज की। आजमगढ़ में हुए शुरुआती छह चुनाव में दो चेहरों ने ही जीत दर्ज की।
इस चुनाव में आजमगढ़ विधानसभा सीट पर पहली बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की। चुनाव में कांग्रेस के भीमा प्रसाद विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी के कपिलदेव को 4,816 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में भीमा प्रसाद को 33,524 वोट, जबकि कपिलदेव को 28,708 वोट मिले। भीमा प्रसाद की आजमगढ़ सीट पर यह चौथी जीत थी। इस दौरान उन्होंने तीन अलग-अलग दलों के टिकट पर जीत दर्ज की। आजमगढ़ में हुए शुरुआती छह चुनाव में दो चेहरों ने ही जीत दर्ज की।
इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1980 का चुनाव
इस चुनाव में आजमगढ़ जिले की आजमगढ़ विधानसभा सीट पर चुनाव में कांग्रेस (आई) के राम कुंवर सिंह विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी (एससी) के भीमा प्रसाद को 4,072 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राम कुंवर सिंह को 25,201 वोट, जबकि भीमा प्रसाद को 21,129 वोट मिले।
1985: दुर्गा प्रसाद यादव के दबदबे की हुई शुरुआत
1980 के चुनाव के बाद 1985 में चुनाव हुए। इस चुनाव में दुर्गा प्रसाद यादव पहली बार निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर विधायक चुने गए। उन्होंने कांग्रेस के जगपति राय को 19,263 वोटों से हराया। इसके बाद 1989 और 1991 के चुनाव हुए, जिनमें दुर्गा प्रसाद यादव ने जनता दल के टिकट पर जीत हासिल की। 1989 के चुनाव में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के शत्रुघ्न चौहान को 33,732 वोटों के अंतर से हराया। इस चुनाव में दुर्गा प्रसाद यादव को 48,824 वोट और शत्रुघ्न चौहान को 15,092 वोट मिले थे। वहीं 1991 के चुनाव में उन्होंने भाजपा के हरिशंकर को 11,261 वोटों के अंतर से हराया। इसमें दुर्गा प्रसाद यादव को 35,652 वोट और हरिशंकर को 24,391 वोट मिले।
1993: बसपा के राजबली यादव ने मारी बाजी
इस चुनाव में आजमगढ़ विधानसभा सीट पर पहली बार बसपा ने जीत दर्ज की। चुनाव में बसपा के राजबली यादव विजयी हुए। उन्होंने भाजपा के सुनील राय को 24,408 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राजबली यादव को 55,644 वोट, जबकि सुनील राय को 31,236 वोट मिले। वहीं, जनता दल के दुर्गा प्रसाद यादव 22,660 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इस सीट पर 1993 के चुनाव के बाद सपा के अलावा किसी भी पार्टी को जीत नहीं मिली।
इस चुनाव में आजमगढ़ जिले की आजमगढ़ विधानसभा सीट पर चुनाव में कांग्रेस (आई) के राम कुंवर सिंह विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी (एससी) के भीमा प्रसाद को 4,072 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राम कुंवर सिंह को 25,201 वोट, जबकि भीमा प्रसाद को 21,129 वोट मिले।
1985: दुर्गा प्रसाद यादव के दबदबे की हुई शुरुआत
1980 के चुनाव के बाद 1985 में चुनाव हुए। इस चुनाव में दुर्गा प्रसाद यादव पहली बार निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर विधायक चुने गए। उन्होंने कांग्रेस के जगपति राय को 19,263 वोटों से हराया। इसके बाद 1989 और 1991 के चुनाव हुए, जिनमें दुर्गा प्रसाद यादव ने जनता दल के टिकट पर जीत हासिल की। 1989 के चुनाव में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के शत्रुघ्न चौहान को 33,732 वोटों के अंतर से हराया। इस चुनाव में दुर्गा प्रसाद यादव को 48,824 वोट और शत्रुघ्न चौहान को 15,092 वोट मिले थे। वहीं 1991 के चुनाव में उन्होंने भाजपा के हरिशंकर को 11,261 वोटों के अंतर से हराया। इसमें दुर्गा प्रसाद यादव को 35,652 वोट और हरिशंकर को 24,391 वोट मिले।
1993: बसपा के राजबली यादव ने मारी बाजी
इस चुनाव में आजमगढ़ विधानसभा सीट पर पहली बार बसपा ने जीत दर्ज की। चुनाव में बसपा के राजबली यादव विजयी हुए। उन्होंने भाजपा के सुनील राय को 24,408 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राजबली यादव को 55,644 वोट, जबकि सुनील राय को 31,236 वोट मिले। वहीं, जनता दल के दुर्गा प्रसाद यादव 22,660 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इस सीट पर 1993 के चुनाव के बाद सपा के अलावा किसी भी पार्टी को जीत नहीं मिली।
इस चुनाव के बाद वर्ष 1996 में चुनाव हुए। इस चुनाव से पहले दुर्गा प्रसाद यादव सपा (समाजवादी पार्टी) में शामिल हो गए और सपा के टिकट पर चुनाव लड़कर विधायक बने। 1996 के बाद से 2022 तक के सभी चुनावों में दुर्गा प्रसाद यादव ने लगातार जीत दर्ज की। इस दौरान कई राजनीतिक दलों ने इस सीट से चुनाव जीतने का पुरजोर प्रयास किया, लेकिन दुर्गा प्रसाद यादव का दबदबा कम नहीं हुआ और वे लगातार चुनाव जीतते रहे।
1996 और 2002 का चुनाव
1996 के चुनाव में दुर्गा प्रसाद यादव ने बहुजन समाज पार्टी के ओम प्रकाश को 27,784 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में दुर्गा प्रसाद यादव को 65,277 वोट, जबकि ओम प्रकाश को 37,493 वोट मिले। वहीं, भाजपा के श्रीकृष्ण तिवारी 18,255 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। वहीं 2002 के चुनाव में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के आर.पी. राय को 18,166 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में दुर्गा प्रसाद यादव को 55,586 वोट, जबकि आर.पी. राय को 37,420 वोट मिले।
1996 और 2002 का चुनाव
1996 के चुनाव में दुर्गा प्रसाद यादव ने बहुजन समाज पार्टी के ओम प्रकाश को 27,784 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में दुर्गा प्रसाद यादव को 65,277 वोट, जबकि ओम प्रकाश को 37,493 वोट मिले। वहीं, भाजपा के श्रीकृष्ण तिवारी 18,255 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। वहीं 2002 के चुनाव में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के आर.पी. राय को 18,166 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में दुर्गा प्रसाद यादव को 55,586 वोट, जबकि आर.पी. राय को 37,420 वोट मिले।
2022 का नतीजा
- फोटो : अमर उजाला
2007 और 2012 का चुनाव
2007 के चुनाव की बात करें तो आजमगढ़ विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के दुर्गा प्रसाद यादव ने बहुजन समाज पार्टी के रमाकांत को 10,254 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में दुर्गा प्रसाद यादव को 52,604 वोट, जबकि रमाकांत को 42,350 वोट मिले। वहीं, निर्दलीय दयाराम 5,888 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। वहीं 2012 के चुनाव में आजमगढ़ विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के दुर्गा प्रसाद यादव विजयी हुए। उन्होंने बसपा के सर्वेश सिंह सिपू को 31,441 वोटों के अंतर से हराया। दुर्गा प्रसाद यादव को 93,629 वोट, जबकि सर्वेश सिंह सिपू को 62,188 वोट मिले। वहीं, भाजपा के जय नाथ 8,577 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2017 का चुनाव
इस चुनाव में आजमगढ़ विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के दुर्गा प्रसाद यादव ने भाजपा के अखिलेश मिश्रा को 26,262 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में दुर्गा प्रसाद यादव को 88,087 वोट, जबकि अखिलेश मिश्रा को 61,825 वोट मिले। वहीं, बसपा के भूपेंद्र 58,185 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2022 का चुनाव
इस चुनाव में आजमगढ़ जिले की आजमगढ़ विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के दुर्गा प्रसाद यादव विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के अखिलेश कुमार मिश्रा को 16,036 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में दुर्गा प्रसाद यादव को 1,00,813 वोट, जबकि अखिलेश कुमार मिश्रा को 84,777 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के सुशील कुमार सिंह 39,281 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। आजमगढ़ सीट पर दुर्गा प्रसाद यादव की यह लगातार छठवी जीत थी। कुल मिलाकर यहां ये उनकी नौवीं जीत थी।
2007 के चुनाव की बात करें तो आजमगढ़ विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के दुर्गा प्रसाद यादव ने बहुजन समाज पार्टी के रमाकांत को 10,254 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में दुर्गा प्रसाद यादव को 52,604 वोट, जबकि रमाकांत को 42,350 वोट मिले। वहीं, निर्दलीय दयाराम 5,888 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। वहीं 2012 के चुनाव में आजमगढ़ विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के दुर्गा प्रसाद यादव विजयी हुए। उन्होंने बसपा के सर्वेश सिंह सिपू को 31,441 वोटों के अंतर से हराया। दुर्गा प्रसाद यादव को 93,629 वोट, जबकि सर्वेश सिंह सिपू को 62,188 वोट मिले। वहीं, भाजपा के जय नाथ 8,577 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2017 का चुनाव
इस चुनाव में आजमगढ़ विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के दुर्गा प्रसाद यादव ने भाजपा के अखिलेश मिश्रा को 26,262 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में दुर्गा प्रसाद यादव को 88,087 वोट, जबकि अखिलेश मिश्रा को 61,825 वोट मिले। वहीं, बसपा के भूपेंद्र 58,185 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
2022 का चुनाव
इस चुनाव में आजमगढ़ जिले की आजमगढ़ विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के दुर्गा प्रसाद यादव विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के अखिलेश कुमार मिश्रा को 16,036 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में दुर्गा प्रसाद यादव को 1,00,813 वोट, जबकि अखिलेश कुमार मिश्रा को 84,777 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के सुशील कुमार सिंह 39,281 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। आजमगढ़ सीट पर दुर्गा प्रसाद यादव की यह लगातार छठवी जीत थी। कुल मिलाकर यहां ये उनकी नौवीं जीत थी।