फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Election ›   uttar pradesh election 2027 Ambedkar Nagar akbarpur Assembly seat history bjp sp bsp Cong political equation

सीट का समीकरण: पिछले सात में से छह चुनाव जीते राम अचल, अब तक नहीं खुला भाजपा का खाता; ऐसा है अकबरपुर का इतिहास

Mon, 28 Sep 2026 10:01 PM IST
अमन तिवारी इलेक्शन डेस्क, नोएडा
इलेक्शन डेस्क, नोएडा Published by: अमन तिवारी Updated Mon, 28 Sep 2026 10:01 PM IST
सार

अंबेडकरनगर की अकबरपुर विधानसभा सीट साल 1957 में अस्तित्व में आई। यहां हुए पहले चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। बीते सात में से छह चुनाव में अकबरपुर के मतदाताओं ने एक ही चेहरे को चुना है। आइए इस सीट का पूरा चुनावी इतिहास जानते हैं।

विज्ञापन
uttar pradesh election 2027 Ambedkar Nagar akbarpur Assembly seat history bjp sp bsp Cong political equation
अकबरपुर सीट का समीकरण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां अब जमीन पर दिखाई देने लगी हैं। सभी राजनीतिक दल अपने संगठन को मजबूत करने और चुनावी समीकरण साधने में जुट गए हैं। आगामी चुनाव में जहां भारतीय जनता पार्टी लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का प्रयास करेगी, वहीं विपक्षी दल सत्ता परिवर्तन की उम्मीद के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। इसी क्रम में हम आपको यूपी की सभी विधानसभा सीटों का इतिहास, उनका राजनीतिक सफर और चुनावी गणित बता रहे हैं। आज की कड़ी में चर्चा अंबेडकरनगर जिले की अकबरपुर विधानसभा सीट की। आइए जानते हैं कि इस सीट का पूरा सियासी इतिहास और समीकरण क्या रहा है।

विज्ञापन


पहले जानते हैं अकबरपुर सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें 403 विधानसभा सीटें आती हैं। इन्हीं में से एक जिला अंबेडकरनगर है। जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं। इनमें- कटेहरी, टांडा, आलापुर, जलालपुर और अकबरपुर शामिल हैं। 'सीट का समीकरण' की कड़ी में आज हम अंबेडकरनगर जिले की अकबरपुर विधानसभा सीट की बात करेंगे। अकबरपुर विधानसभा सीट परिसीमन के बाद 1955 में अस्तित्व में आई थी और यहां पहली बार 1957 में विधानसभा चुनाव कराए गए थे। इस सीट के पहले विधायक बलवान सिंह बने थे, जिन्होंने एक निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में जीत हासिल की थी।

विज्ञापन

अकबरपुर विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
अकबरपुर विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें, तो कुल मतदाताओं में राजभर, अनुसूचित जाति (एसटी), कुर्मी और मुस्लिम आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी राजभर मतदाताओं की है, जो कुल मतदाताओं का लगभग 16% हैं। इसके बाद अनुसूचित जाति मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 23% और कुर्मी मतदाताओं की करीब 14% है।

अन्य प्रमुख जातियों में मुस्लिम मतदाता लगभग 9%, यादव मतदाता करीब 7%, निषाद मतदाता 6%, ब्राह्मण मतदाता 5%, वैश्य मतदाता 5% और क्षत्रिय मतदाता लगभग 3% हैं। वहीं, बाकी बचे मतदाता अन्य जातियों और समुदायों से आते हैं।  

अकबरपुर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
1957: निर्दलीय प्रत्याशी ने जीता चुनाव

अकबरपुर विधानसभा सीट के पहले यानी की साल 1957 के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी बलवान सिंह विजयी हुए थे। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी राम दुलारे को 19,937 वोटों से हराया था।

विज्ञापन

uttar pradesh election 2027 Ambedkar Nagar akbarpur Assembly seat history bjp sp bsp Cong political equation
इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला

1962: पहली बार जीती प्रजा सोशलिस्ट पार्टी 
इस चुनाव में अकबरपुर सीट पर पहली बार प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में बलवान सिंह ने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए जीत दर्ज की। उन्होंने स्वतंत्र पार्टी के उम्मीदवार को 7,122 वोटों से शिकस्त दी थी।

कांग्रेस ने लगाई जीत की हैट्रिक
इसके बाद राज्य में 1967, 1969 और 1974 में विधानसभा चुनाव हुए। इन चुनावों में अकबरपुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा। वर्ष 1967 के चुनाव में अकबरपुर सीट से कांग्रेस के जयराम वर्मा विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के. बिहारी को 7,758 वोटों के अंतर से हराया। इसके बाद 1969 और 1974 के चुनावों में भी अकबरपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के प्रियदर्शी जेटली ने जीत दर्ज की। इन दोनों चुनावों में उन्होंने भारतीय क्रांति दल के जयराम वर्मा को हराया। इस दौरान जीत का अंतर क्रमशः 15,227 और 6,083 का रहा।

विज्ञापन

आपातकाल का समय और 1977 का सियासी बदलाव
1974 के विधानसभा चुनाव के कुछ समय बाद जून 1975 में देश भर में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। 

सत्ता में आते ही जनता पार्टी की केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस शासित राज्य सरकारें जनता का विश्वास खो चुकी हैं। इसी आधार पर उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। इसके बाद जून 1977 में हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला और राम नरेश यादव राज्य के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि, अंदरूनी कलह के कारण यह सरकार भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी।

1977: पहली बार जीती जनता पार्टी 
इस चुनाव में अंबेडकरनगर जिले की अकबरपुर विधानसभा सीट पर पहली बार जनता पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में जनता पार्टी के हरि राम वर्मा विजयी हुए। उन्होंने कांग्रेस के प्रियदर्शी जेटली को 3,978 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में हरि राम वर्मा को 28,603 वोट, जबकि प्रियदर्शी जेटली को 24,625 वोट मिले। वहीं, निर्दलीय अकबर हुसैन 18,389 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

राजनीतिक अस्थिरता का समय
हालांकि उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।

विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने। 

1980 का चुनाव
इस चुनाव में अंबेडकरनगर जिले की अकबरपुर विधानसभा सीट पर 1980 के चुनाव में कांग्रेस (आई) के प्रियदर्शी जेटली विजयी हुए। उन्होंने जनता पार्टी (एससी) के हरि राम वर्मा को 9,718 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में प्रियदर्शी जेटली को 35,424 वोट, जबकि हरि राम वर्मा को 25,706 वोट मिले। अकबरपुर विधानसभा सीट पर प्रियदर्शी की ये तीसरी जीत थी। 

uttar pradesh election 2027 Ambedkar Nagar akbarpur Assembly seat history bjp sp bsp Cong political equation
इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत - फोटो : अमर उजाला
1985 और 1989 में माकपा ने जीता चुनाव
इसके बाद राज्य में 1985 और 1989 के चुनाव हुए। इन दोनों चुनावों में अकबरपुर विधानसभा सीट से माकपा/CPI(M) के अकबर हुसैन बाबर विजयी हुए। दोनों चुनावों में उन्होंने कांग्रेस के प्रियदर्शी जेटली को हराया था। 1985 के चुनाव में उनकी जीत का अंतर 17,852 वोटों का रहा, जबकि 1989 के चुनाव में जीत का अंतर 4,068 वोटों का रहा था।

1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य में 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इन चुनावों में अकबरपुर विधानसभा सीट का समीकरण भी बदलता रहा।

1991: शिवसेना ने जीता चुनाव
1991 के चुनाव में अकबरपुर विधानसभा सीट से शिवसेना के पवन कुमार पांडेय विजयी हुए। उन्होंने बसपा के राम अचल राजभर को 15,897 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में पवन कुमार पांडेय को 37,616 वोट, जबकि राम अचल राजभर को 21,719 वोट मिले।

1993: बसपा के दबदबे की शुरुआत हुई
इसके बाद राज्य में 1993, 1996, 2002 और 2007 के विधानसभा चुनाव हुए। इन चारों चुनावों में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के राम अचल राजभर लगातार जीत दर्ज करते रहे। 1993 के चुनाव में उन्होंने शिवसेना के पवन कुमार पांडेय को 39,441 वोटों के अंतर से हराया।

इसके बाद 1996 के चुनाव में राम अचल राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) के राम लखन वर्मा को 7,346 वोटों के अंतर से पराजित किया। इस चुनाव में राम अचल राजभर को 55,310 वोट, जबकि राम लखन वर्मा को 47,964 वोट मिले।

2002 के चुनाव में अकबरपुर विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी के राम अचल राजभर विजयी हुए। उन्होंने लोक जनशक्ति पार्टी के पवन कुमार पांडेय को 7,540 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राम अचल राजभर को 54,617 वोट, जबकि पवन कुमार पांडेय को 47,077 वोट मिले। वहीं, समाजवादी पार्टी के राम लखन वर्मा 38,303 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

बसपा ने लगातार चार चुनाव में दर्ज की जीत
वहीं 2007 के चुनाव में अकबरपुर विधानसभा सीट से बसपा के राम अचल राजभर विजयी हुए। उन्होंने सपा के राममूर्ति वर्मा को 11,840 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राम अचल राजभर को 55,875 वोट, जबकि राममूर्ति वर्मा को 44,035 वोट मिले। वहीं, अपना दल के पवन पांडेय 34,167 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

uttar pradesh election 2027 Ambedkar Nagar akbarpur Assembly seat history bjp sp bsp Cong political equation
2022 का नतीजा - फोटो : अमर उजाला
अकबरपुर सीट पर खुला सपा का खाता
2012 के यूपी विधानसभा चुनाव में अकबरपुर विधानसभा सीट पर पहली बार समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की। चुनाव में सपा के राम मूर्ति वर्मा विजयी हुए। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के संजय कुमार को 26,286 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राम मूर्ति वर्मा को 91,126 वोट, जबकि संजय कुमार को 64,840 वोट मिले। वहीं, कांग्रेस के अमित कुमार 7,305 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

2017: बसपा ने की वापसी
इस चुनाव में अंबेडकरनगर जिले की अकबरपुर विधानसभा सीट पर बसपा ने वापसी की। चुनाव में बसपा के राम अचल राजभर विजयी हुए थे। उन्होंने सपा के राम मूर्ति वर्मा को 14,013 वोटों के अंतर से हराया था। इस चुनाव में राम अचल राजभर को 72,325 वोट मिले थे, जबकि राम मूर्ति वर्मा को 58,312 वोट हासिल हुए थे। वहीं, भाजपा के संजय कुमार तीसरे स्थान पर रहे थे। हालांकि, 2022 के चुनाव से पहले राम अचल राजभर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए थे। 2022 में उन्होंने सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे।

2022: सपा ने की वापसी
इस चुनाव में अंबेडकरनगर जिले की अकबरपुर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के राम अचल राजभर विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के धर्मराज निषाद को 12,336 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में राम अचल राजभर को 81,931 वोट, जबकि धर्मराज निषाद को 69,595 वोट मिले। वहीं, बहुजन समाज पार्टी के चंद्र प्रकाश वर्मा 53,398 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed