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जम्मू-कश्मीर की महिला मंत्री की कहानी: पिता का कत्ल फिर शव पर आतंकी हमला, चाचा भी मारे गए, खुद पर हुए कई हमले
Wed, 16 Oct 2024 08:35 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Wed, 16 Oct 2024 08:35 PM IST
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सार
Sakina Masood: जम्मू कश्मीर को नई हुकूमत मिल गई है। बुधवार को उमर अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। सकीना मसूद सरकार में एकमात्र महिला मंत्री बनी हैं। वह कुलगाम जिले की डीएच पोरा सीट से जीती हैं।
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सकीना मसूद इटू
- फोटो :
Amar ujala
विस्तार
जम्मू कश्मीर में बुधवार को नई सरकार ने शक्ल ले ली। 10 साल बाद हुए विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाले गठबंंधन ने जीत हासिल की और अब नई सरकार का गठन हो गया। उमर अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। सकीना मसूद सरकार में एकमात्र महिला मंत्री बनी हैं। वह जम्मू कश्मीर के विधानसभा अध्यक्ष रहे वली मोहम्मद ईटू की बेटी हैं जिनकी आतंकियों ने हत्या कर दी थी। आतंकियों ने सकीना के चाचा को भी मार डाला था। पिता के जाने के बाद राजनीति में आईं सकीना का सियासी सफर काफी चुनौतीपूर्ण रहा है।आइये जानते हैं कि आखिर कौन हैं सकीना मसूद? उनके पिता और फिर चाचा के साथ क्या हुआ था? सकीना राजनीति में कैसे आईं? उनका सियासी सफर कैसा रहा है?
जम्मू कश्मीर की नई सरकार
- फोटो :
AMAR UJALA
आखिर कौन हैं सकीना मसूद?
बुधवार को उमर अब्दुल्ला मंत्रिमंडल में कुल छह मंत्रियों ने शपथ ली है। आतंकी हमले में पिता को खोने वाली सकीना मसूद को भी कैबिनेट में जगह दी गई है। सकीना ने डीएच पोरा सीट से चौथी बार चुनाव जीता है। सकीना वली मोहम्मद इटू की बेटी हैं जो एक समय में जम्मू कश्मीर में काफी सक्रिय नेता और जम्मू कश्मीर विधानसभा के अध्यक्ष थे।
बुधवार को उमर अब्दुल्ला मंत्रिमंडल में कुल छह मंत्रियों ने शपथ ली है। आतंकी हमले में पिता को खोने वाली सकीना मसूद को भी कैबिनेट में जगह दी गई है। सकीना ने डीएच पोरा सीट से चौथी बार चुनाव जीता है। सकीना वली मोहम्मद इटू की बेटी हैं जो एक समय में जम्मू कश्मीर में काफी सक्रिय नेता और जम्मू कश्मीर विधानसभा के अध्यक्ष थे।
1994 में सकीना के पिता की हत्या
सकीना के पिता वली मोहम्मद ईटू की 18 मार्च 1994 में आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी। 18 मार्च 1994 को शुक्रवार था इसलिए वली मोहम्मद इटू जम्मू की जामिया मस्जिद में जुमे की नमाज अदा करने गए थे। जब वली मोहम्मद मस्जिद से बाहर आए, तो उन्हें गोली मार दी गई। 1990 के दशक में आतंकियों द्वारा किसी राजनेता की यह पहली हत्या मानी जाती है।
सकीना के पिता वली मोहम्मद ईटू की 18 मार्च 1994 में आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी। 18 मार्च 1994 को शुक्रवार था इसलिए वली मोहम्मद इटू जम्मू की जामिया मस्जिद में जुमे की नमाज अदा करने गए थे। जब वली मोहम्मद मस्जिद से बाहर आए, तो उन्हें गोली मार दी गई। 1990 के दशक में आतंकियों द्वारा किसी राजनेता की यह पहली हत्या मानी जाती है।
दिग्विजय सिंह की पत्नी जब सकीना के कॉलेज पहुंचीं
जब सकीना के पिता की हत्या हुई उस वक्त वो भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही थीं। पिता की हत्या को याद करते हुए सकीना बताती हैं, '18 मार्च 1994 शुक्रवार का दिन था और मैं अपने कॉलेज के हॉस्टल के कमरे में थी, जब वार्डन ने मुझे बुलाया और कहा कि एक महिला मुझे लेने आई है। मैं उस महिला से मिली, उसने मुझे बताया कि मेरी मां बीमार है और वह मुझे घर ले जाने आई है। लेकिन मैंने उसके साथ जाने से इनकार कर दिया क्योंकि मैं नहीं जानती थी कि वह कौन है और मैंने उसे पहली बार देखा था। इसलिए, पुष्टि करने के लिए मैं एसटीडी गई और अपने परिवार के सदस्यों को फोन किया जो जम्मू में थे, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया।
जब सकीना के पिता की हत्या हुई उस वक्त वो भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही थीं। पिता की हत्या को याद करते हुए सकीना बताती हैं, '18 मार्च 1994 शुक्रवार का दिन था और मैं अपने कॉलेज के हॉस्टल के कमरे में थी, जब वार्डन ने मुझे बुलाया और कहा कि एक महिला मुझे लेने आई है। मैं उस महिला से मिली, उसने मुझे बताया कि मेरी मां बीमार है और वह मुझे घर ले जाने आई है। लेकिन मैंने उसके साथ जाने से इनकार कर दिया क्योंकि मैं नहीं जानती थी कि वह कौन है और मैंने उसे पहली बार देखा था। इसलिए, पुष्टि करने के लिए मैं एसटीडी गई और अपने परिवार के सदस्यों को फोन किया जो जम्मू में थे, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया।
एयरपोर्ट आते-आते अनहोनी का एहसास हो गया
'फिर मैंने अपने एक दोस्त को फोन किया, वह उस समय जज थीं, उसने भी मेरी मां के स्वास्थ्य के बारे में यही कहा। फिर मैं उस महिला के साथ गई और मुझे अचरज हुआ कि वह मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की पत्नी थीं। हम एयरपोर्ट पर गए जहां दिग्विजय सिंह और राजेश पायलट दिल्ली के लिए चार्टर्ड फ्लाइट में सवार होने के लिए मेरा इंतजार कर रहे थे। तब तक मुझे पता चल गया था कि कुछ बहुत गड़बड़ है।'
'फिर मैंने अपने एक दोस्त को फोन किया, वह उस समय जज थीं, उसने भी मेरी मां के स्वास्थ्य के बारे में यही कहा। फिर मैं उस महिला के साथ गई और मुझे अचरज हुआ कि वह मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की पत्नी थीं। हम एयरपोर्ट पर गए जहां दिग्विजय सिंह और राजेश पायलट दिल्ली के लिए चार्टर्ड फ्लाइट में सवार होने के लिए मेरा इंतजार कर रहे थे। तब तक मुझे पता चल गया था कि कुछ बहुत गड़बड़ है।'
जम्मू एयरपोर्ट पर देखा पिता का शव
सकीना आगे बताती हैं, 'दिल्ली एयरपोर्ट पर फारूक साहब मेरा इंतजार कर रहे थे। हमने जम्मू एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरी और जब मैं पहुंची, तो मैंने अपने परिवार के सभी सदस्यों को मेरे पिता के शव के साथ एयरपोर्ट पर देखा। परिजन ने बताया कि मेरे पिता को बंदूकधारियों ने मार दिया है।'
सकीना आगे बताती हैं, 'दिल्ली एयरपोर्ट पर फारूक साहब मेरा इंतजार कर रहे थे। हमने जम्मू एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरी और जब मैं पहुंची, तो मैंने अपने परिवार के सभी सदस्यों को मेरे पिता के शव के साथ एयरपोर्ट पर देखा। परिजन ने बताया कि मेरे पिता को बंदूकधारियों ने मार दिया है।'
शव को भी नहीं बख्शा गया, उस पर भी गोलीबारी
सकीना कहती हैं, 'यह खबर मेरे लिए सदमे से भरी थी, एक बेटी को कैसा लगेगा जब उसके पिता का शव उसकी आंखों के सामने आएगा, वह भी अचानक? मैं अपने आस-पास हो रही किसी भी चीज पर विश्वास नहीं कर पा रही थीं। मेरे सपने मेरे सामने ही टूट गए। आगे बढ़ते हुए हम जम्मू से शव लेकर श्रीनगर एयरपोर्ट पहुंचे। श्रीनगर से हमें सड़क मार्ग के जरिए डीएच पोरा में हमारे पैतृक स्थान कुलगाम पहुंचना था। जब हम पहलु पहुंचे, जहां पार करने के लिए कोई पुल नहीं था, हम पर गोलीबारी की गई। यहां तक कि शव को भी नहीं बख्शा गया। बाल-बाल बचते हुए हम डीएच पोरा पहुंचे और मेरे पिता का अंतिम संस्कार किया।'
सकीना कहती हैं, 'यह खबर मेरे लिए सदमे से भरी थी, एक बेटी को कैसा लगेगा जब उसके पिता का शव उसकी आंखों के सामने आएगा, वह भी अचानक? मैं अपने आस-पास हो रही किसी भी चीज पर विश्वास नहीं कर पा रही थीं। मेरे सपने मेरे सामने ही टूट गए। आगे बढ़ते हुए हम जम्मू से शव लेकर श्रीनगर एयरपोर्ट पहुंचे। श्रीनगर से हमें सड़क मार्ग के जरिए डीएच पोरा में हमारे पैतृक स्थान कुलगाम पहुंचना था। जब हम पहलु पहुंचे, जहां पार करने के लिए कोई पुल नहीं था, हम पर गोलीबारी की गई। यहां तक कि शव को भी नहीं बख्शा गया। बाल-बाल बचते हुए हम डीएच पोरा पहुंचे और मेरे पिता का अंतिम संस्कार किया।'
'लोगों ने राजनीति में आने के लिए मनाया'
नेकां नेता अपने पिता वली मोहम्मद इटू को याद करते हुए बताती हैं, 'मेरे पिता एक बहादुर और काफी पढ़े-लिखे शख्स थे, जिन्होंने अपने लोगों के लिए लड़ाई लड़ी। वह जम्मू की जामिया मस्जिद में जुमे की नमाज अदा करने गए थे। जब वह मस्जिद से बाहर आए, तो उन्हें गोली मार दी गई। बस इतना ही। इस तरह आसानी से एक जान ले ली जाती है। इस तरह एक परिवार बर्बाद हो जाता है। इस तरह पांच बेटियां अपने पिता से हमेशा के लिए अलग हो जाती हैं। एक पत्नी अपने पति से हमेशा के लिए अलग हो जाती है और इस तरह लोग अपने नेता से जुदा हो जाते हैं। मैंने अपना सबसे अच्छा दोस्त खो दिया था। परिवार के लोगों द्वारा महसूस किए गए दर्द को मापा नहीं जा सकता था, हर कोई गम मना रहा था।
सकीना ने बीच में ही छोड़ दी एमबीबीएस की पढ़ाई
राजनीति में आने के अपने दिनों को याद करते हुए सकीना कहती हैं, 'लोगों का मेरे पिता के प्रति जो विश्वास और सम्मान था, वही कारण था कि मैं अपने पिता के सपने को आगे ले जाऊं और उनकी बेहतरी के लिए काम करूं। लोगों ने मुझे राजनीति में आने के लिए राजी किया। मैंने अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और नूराबाद के लोगों की सेवा करने की अपने पिता की महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाया।'
नेकां नेता अपने पिता वली मोहम्मद इटू को याद करते हुए बताती हैं, 'मेरे पिता एक बहादुर और काफी पढ़े-लिखे शख्स थे, जिन्होंने अपने लोगों के लिए लड़ाई लड़ी। वह जम्मू की जामिया मस्जिद में जुमे की नमाज अदा करने गए थे। जब वह मस्जिद से बाहर आए, तो उन्हें गोली मार दी गई। बस इतना ही। इस तरह आसानी से एक जान ले ली जाती है। इस तरह एक परिवार बर्बाद हो जाता है। इस तरह पांच बेटियां अपने पिता से हमेशा के लिए अलग हो जाती हैं। एक पत्नी अपने पति से हमेशा के लिए अलग हो जाती है और इस तरह लोग अपने नेता से जुदा हो जाते हैं। मैंने अपना सबसे अच्छा दोस्त खो दिया था। परिवार के लोगों द्वारा महसूस किए गए दर्द को मापा नहीं जा सकता था, हर कोई गम मना रहा था।
सकीना ने बीच में ही छोड़ दी एमबीबीएस की पढ़ाई
राजनीति में आने के अपने दिनों को याद करते हुए सकीना कहती हैं, 'लोगों का मेरे पिता के प्रति जो विश्वास और सम्मान था, वही कारण था कि मैं अपने पिता के सपने को आगे ले जाऊं और उनकी बेहतरी के लिए काम करूं। लोगों ने मुझे राजनीति में आने के लिए राजी किया। मैंने अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और नूराबाद के लोगों की सेवा करने की अपने पिता की महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाया।'
सकीना पर भी दर्जनों बार हमले, चाचा को मार डाला
सकीना को खुद भी दर्जनों बार हमले का शिकार बनाने की कोशिश की गई है। नेकां की विधायक बताती हैं, 'अपने पिता को खोने उनके अंतिम संस्कार पर गोलीबारी करने के बाद भी जब मैं राजनीति में आई, तो मुझ पर चुनावों के दौरान और उसके बाहर दर्जनों बार हमले हुए, इनमें से कई हमले जानलेवा थे। उन्होंने मेरे चाचा को भी मार डाला। हमने बहुत कुछ खोया है, लेकिन निस्वार्थ भाव से काम करने के उनके सपनों को पूरा करने की प्रतिबद्धता है जो हर दुख पर फतह हासिल करती है।'
सकीना को खुद भी दर्जनों बार हमले का शिकार बनाने की कोशिश की गई है। नेकां की विधायक बताती हैं, 'अपने पिता को खोने उनके अंतिम संस्कार पर गोलीबारी करने के बाद भी जब मैं राजनीति में आई, तो मुझ पर चुनावों के दौरान और उसके बाहर दर्जनों बार हमले हुए, इनमें से कई हमले जानलेवा थे। उन्होंने मेरे चाचा को भी मार डाला। हमने बहुत कुछ खोया है, लेकिन निस्वार्थ भाव से काम करने के उनके सपनों को पूरा करने की प्रतिबद्धता है जो हर दुख पर फतह हासिल करती है।'