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Maharashtra: कांग्रेस में क्यों हो रहा 'मुंबई से दिल्ली मार्च'? उद्धव की शिवसेना से जुड़ रही है रार की कहानी

Sun, 14 Apr 2024 06:54 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Sun, 14 Apr 2024 06:54 PM IST
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सार
महाराष्ट्र में कांग्रेस गठबंधन के बाद हिस्से में आईं लोकसभा की सीटों के चलते आपस में तकरार मच गई है। महाराष्ट्र कांग्रेस पार्टी से ताल्लुक रखने वाले वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक, महाअघाड़ी के साथ हुए गठबंधन में जिस तरीके से पार्टी ने सीटों में समझौता किया है, वह ठीक नहीं है।
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Maharashtra: Why is Mumbai to Delhi March happening in Congress? story is connecting with Uddhav Shiv Sena
कांग्रेस में रार। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

महाराष्ट्र कांग्रेस में एक बार फिर सियासी तौर पर अंदरूनी उथल-पुथल मच रही है। दरअसल, यह उथल-पुथल कुछ और नहीं बल्कि गठबंधन के बाद हिस्से में आई लोकसभा की सीटों के चलते मची है। उठापटक का आलम यह हुआ कि महाराष्ट्र कांग्रेस के विधायकों से लेकर कई बड़े नेताओं ने दिल्ली तक मार्च किया है। जबकि बड़े नेता अगले दो से तीन दिनों के भीतर दिल्ली में आलाकमान से मुलाकात की तैयारी में है। जानकारों की मानें तो महाराष्ट्र कांग्रेस में सुगबुगाहट अभी भी इस बात की है कि चुनाव से पहले कुछ बड़े नेता बाबा सिद्दीकी और संजय निरुपम की तरह अपनी राह बदल सकते हैं। हालांकि, कांग्रेस पार्टी के बड़े नेताओं ने दिल्ली में महाराष्ट्र के नेताओं से मुलाकात कर उनको सब कुछ दुरुस्त करने का भरोसा दिया है। 



शिवसेना के साथ समझौता ठीक नहीं
महाराष्ट्र में कांग्रेस गठबंधन के बाद हिस्से में आईं लोकसभा की सीटों के चलते आपस में तकरार मच गई है। महाराष्ट्र कांग्रेस पार्टी से ताल्लुक रखने वाले वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक, महाअघाड़ी के साथ हुए गठबंधन में जिस तरीके से पार्टी ने सीटों में समझौता किया है, वह ठीक नहीं है। महाराष्ट्र कांग्रेस पार्टी के महासचिव विश्वबंधु राय ने कांग्रेस आलाकमान को चिट्ठी लिखकर उद्धव ठाकरे की शिवसेना के साथ समझौते को ही सबसे कमजोर कड़ी बताया है। 


राय कहते हैं कि वह लगातार इस बात को पार्टी फोरम पर उठाते आए हैं कि शिवसेना के साथ समझौता ठीक नहीं है। उनका मानना है कि जिस पार्टी को लगातार लोग छोड़कर जा रहे हो, उसके सामने एक तरह से झुक जाना और इतनी सीटें दे देना, कांग्रेस पार्टी के लिए बिल्कुल मुनासिब नहीं है। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को लिखी गई चिट्ठी में राय कहते हैं कि इससे प्रदेश में कांग्रेस को नुकसान होगा। 

नाना पटोले, पृथ्वीराज चह्वाण और बालासाहेब थोरात नाराज
महाराष्ट्र कांग्रेस पार्टी से ताल्लुक रखने वाले नेताओं का कहना है सिर्फ विश्व बंधु राय ही नहीं, बल्कि और भी कई नेता लगातार इस पर सवालिया निशान उठाते रहे हैं। अब जब गठबंधन में सीटों का बंटवारा हो गया है, तो यह बात खुलकर न सिर्फ पार्टी फोरम पर बल्कि राज्य और मुंबई की सियासत में उभर कर सामने आने लगी। 

कांग्रेस पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, मुंबई कांग्रेस की अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ से लेकर महाराष्ट्र में विधायक अमीन पटेल और विधायक असलम शेख समीर समेत कई बड़े कांग्रेसी नेताओं ने दिल्ली में कांग्रेस के प्रमुख नेताओं से राज्य की सियासत के बारे में मिलकर चर्चा की। कांग्रेस पार्टी से जुड़े सूत्रों के मताबिक महाराष्ट्र में जिस तरीके से टिकटों का बंटवारा हुआ है, उससे स्थानीय स्तर पर तीन प्रमुख नेताओं के प्रति नाराजगी की बात भी सामने आई है। इसमें महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले, पृथ्वीराज चह्वाण और बालासाहेब थोरात का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। 

शिवसेना को दी गईं सीटों पर उठ रहे सवाल 
कांग्रेस पार्टी से जुड़े नेताओं के मुताबिक कई ऐसी सीटें कांग्रेस ने गठबंधन में शिवसेना को दे दी हैं, जो कांग्रेस के नेताओं के दावे के अनुसार जीती जा सकती थीं। इसमें सांगली भिवंडी और दक्षिण मध्य मुंबई की सीट शामिल है। हालांकि कहा यह जा रहा है कि वर्षा गायकवाड़ दक्षिण मध्य मुंबई की सीट से चुनाव लड़ना चाहती थीं। कांग्रेस पार्टी से जुड़े नेताओं का कहना है कि यह सीट कांग्रेस के लिए मजबूत थी, लेकिन पार्टी ने गठबंधन की मजबूरी में यह सीट उद्धव ठाकरे की शिवसेना को दे दी। 

पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, कुछ सीटें ऐसी थीं, जो कांग्रेस नहीं जीत सकती थी या उसके लिए मुकाबला कठिन था। लेकिन शिवसेना ने अपनी मनमर्जी चलाते हुए वे सीटें गठबंधन का हवाला देकर कांग्रेस के लिए छोड़ दीं। दिल्ली में कांग्रेस पार्टी के नेताओं से मुलाकात करने आए एक वरिष्ठ पदाधिकारी कहते हैं कि उत्तर मुंबई सीट शिवसेना ने कांग्रेस को दे दीं। जबकि इस सीट पर वर्तमान सियासी समीकरण कांग्रेस के पक्ष में नहीं दिख रहे हैं। इसी तरह कांग्रेस के और भी कई नेता लगातार गठबंधन के दबाव में छोड़ी गई और स्वीकार की गई सीटों पर मतभेद की बात कर रहे हैं। 

पार्टी छोड़ने की बात 
महाराष्ट्र कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि हकीकत यह है कि ग्राउंड पर अभी भी पार्टी की मजबूत स्थिति नहीं बन पा रही है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों से इस बात का न सिर्फ जिक्र किया, बल्कि पूरी हकीकत से उनको रूबरू कराया है। राज्य की जमीनी स्थिति के बारे में बात करते हुए एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि चुनाव जीतने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली बूथ कमेटियों का मजबूती से काम नहीं हो सका है। वहीं कांग्रेस के कुछ नाराज नेताओं ने लोकसभा चुनाव में बाबा सिद्दीकी और संजय निरुपम की तरह पार्टी छोड़ने की बात कही है। हालांकि कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है किसी भी तरह की कोई नाराजगी पार्टी के भीतर नहीं है। टिकट बंटवारे पर सभी प्रमुख बड़े नेताओं की सहमति रही है।

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