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MNS Rally Cancel: चुनाव आयोग ने राज ठाकरे के दल को नहीं दी मंजूरी, MNS को रद्द करनी पड़ी शिवाजी पार्क की रैली
Fri, 15 Nov 2024 03:10 PM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Fri, 15 Nov 2024 03:10 PM IST
सार
Maharashtra Vidhan Sabha Chunav 2024: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 के लिए चुनाव प्रचार चरम पर है। चुनाव आयोग की मंजूरी नहीं मिलने के कारण महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) नेता राज ठाकरे को मुंबई के शिवाजी पार्क में अपनी रैली रद्द करनी पड़ी है।
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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024: राज ठाकरे को रद्द करनी पड़ी शिवाजी पार्क की रैली
- फोटो : ANI
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विस्तार
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने शुक्रवार को बताया कि उन्हें 17 नवंबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में रैली के लिए अनुमति नहीं मिली। इस कारण उन्हें रैली रद्द करनी पड़ी है। उन्होंने कहा कि शिवाजी पार्क में रैली के बजाय वह मनसे उम्मीदवारों के लिए प्रचार करने मुंबई और ठाणे के विधानसभा क्षेत्रों का दौरा करेंगे।
चुनाव प्रचार 18 नवंबर को शाम 5 बजे समाप्त हो जाएगा
ठाकरे ने कहा कि मनसे को फिलहाल रैली के लिए अनुमति नहीं मिली है। प्रचार के लिए केवल 1.5 दिन बाकी हैं। रैलियों का आयोजन बेहद मुश्किल है ऐसे में वे मुंबई और ठाणे की विधानसभा सीटों पर प्रचार के लिए यात्राएं करेंगे। बता दें कि 20 नवंबर को होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार 18 नवंबर को शाम 5 बजे समाप्त हो जाएगा।
राज ठाकरे के अलावा उद्धव ने भी अनुमति मांगी थी
गौरतलब है कि मनसे के अलावा शिवसेना (यूबीटी) ने भी 17 नवंबर को ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में रैलियां करने की अनुमति मांगी थी। दोनों दलों को अभी तक प्रस्तावित कार्यक्रमों के लिए चुनाव आयोग से मंजूरी नहीं मिली है।
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महाराष्ट्र में शिवाजी पार्क की राजनीतिक रैली क्यों खास है
17 नवंबर की रैली इसलिए भी खास है क्योंकि यही तारीख शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे की पुण्यतिथि भी है। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे चचेरे भाई हैं। आज दोनों भले ही अलग-अलग राजनीतिक दलों में हैं, लेकिन बाला साहेब ठाकरे की पुण्यतिथि के मद्देनजर 17 नवंबर को शिवाजी पार्क में रैली करना दोनों ही दलों के लिए खास मौका माना जा रहा था। ऐसा इसलिए क्योंकि 1966 में शिवसेना की स्थापना के बाद बाल ठाकरे ने शिवाजी पार्क में ही पहली बार दशहरा रैली का आयोजन किया था। इसके बाद बीते लगभग छह दशकों से यह शिवसेना की परंपरा से जुड़ चुका है। 2012 में निधन के बाद बाल ठाकरे का अंतिम संस्कार भी शिवाजी पार्क में ही हुआ था।
मनसे सुप्रीमो ने 17 नवंबर को रैली करने की अनुमति इस तर्क के आधार पर मांगी
शिवाजी पार्क की रैली रद्द होने के बाद राज ठाकरे ने कहा कि 17 नवंबर के दिन बाल ठाकरे के लाखों अनुयायी मैदान में एकत्र होंगे। हम चुनाव आयोग और पुलिस से कह रहे हैं कि मामले को जटिल न बनाया जाए। शिवसैनिक वैसे भी वहां जमा हो जाएंगे और आप उन्हें रोक नहीं सकते। यहां कोई आदर्श आचार संहिता लागू नहीं है। उन्होंने आयोग से अपील की थी कि किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए मनसे को 17 नवंबर को रैली करने की अनुमति दी जाए।
देश की तीसरी सबसे बड़ी विधानसभा में सियासी समीकरण
महाराष्ट्र में इस बार सियासी मुकाबला बेहद दिलचस्प होने के आसार हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि लगभग 25 महीने पहले जून, 2022 में महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार गिरी थी। इसके बाद भाजपा समर्थित सरकार बनी। शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दो-फाड़ होने के बाद राज्य में पहली बार विधानसभा चुनाव होंगे। महाराष्ट्र की 288 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार के पास 202 विधायकों का समर्थन है। 102 विधायकों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है। अजीत पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के 40 विधायक हैं। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के 38 विधायक हैं। 14 निर्दलीय विधायकों ने भी एनडीए सरकार को समर्थन दिया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार को पांच अन्य छोटे दलों का समर्थन भी हासिल है।
महाराष्ट्र में विपक्षी खेमा कितना मजबूत
इसके अलावा विपक्षी खेमे (महाविकास अघाड़ी- MVA) में कुल 71 विधायक हैं। विपक्ष में कांग्रेस 37 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना के 16 विधायक हैं। वरिष्ठ राजनेता शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) के 12 विधायक हैं। समाजवादी पार्टी के दो, सीपीआईएम और पीडब्लूपीआई के एक-एक विधायक हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के दो विधायक भी विपक्षी खेमे में हैं। 15 विधानसभा सीटें खाली हैं।
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चुनाव प्रचार 18 नवंबर को शाम 5 बजे समाप्त हो जाएगा
ठाकरे ने कहा कि मनसे को फिलहाल रैली के लिए अनुमति नहीं मिली है। प्रचार के लिए केवल 1.5 दिन बाकी हैं। रैलियों का आयोजन बेहद मुश्किल है ऐसे में वे मुंबई और ठाणे की विधानसभा सीटों पर प्रचार के लिए यात्राएं करेंगे। बता दें कि 20 नवंबर को होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार 18 नवंबर को शाम 5 बजे समाप्त हो जाएगा।
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राज ठाकरे के अलावा उद्धव ने भी अनुमति मांगी थी
गौरतलब है कि मनसे के अलावा शिवसेना (यूबीटी) ने भी 17 नवंबर को ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में रैलियां करने की अनुमति मांगी थी। दोनों दलों को अभी तक प्रस्तावित कार्यक्रमों के लिए चुनाव आयोग से मंजूरी नहीं मिली है।
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महाराष्ट्र में शिवाजी पार्क की राजनीतिक रैली क्यों खास है
17 नवंबर की रैली इसलिए भी खास है क्योंकि यही तारीख शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे की पुण्यतिथि भी है। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे चचेरे भाई हैं। आज दोनों भले ही अलग-अलग राजनीतिक दलों में हैं, लेकिन बाला साहेब ठाकरे की पुण्यतिथि के मद्देनजर 17 नवंबर को शिवाजी पार्क में रैली करना दोनों ही दलों के लिए खास मौका माना जा रहा था। ऐसा इसलिए क्योंकि 1966 में शिवसेना की स्थापना के बाद बाल ठाकरे ने शिवाजी पार्क में ही पहली बार दशहरा रैली का आयोजन किया था। इसके बाद बीते लगभग छह दशकों से यह शिवसेना की परंपरा से जुड़ चुका है। 2012 में निधन के बाद बाल ठाकरे का अंतिम संस्कार भी शिवाजी पार्क में ही हुआ था।
मनसे सुप्रीमो ने 17 नवंबर को रैली करने की अनुमति इस तर्क के आधार पर मांगी
शिवाजी पार्क की रैली रद्द होने के बाद राज ठाकरे ने कहा कि 17 नवंबर के दिन बाल ठाकरे के लाखों अनुयायी मैदान में एकत्र होंगे। हम चुनाव आयोग और पुलिस से कह रहे हैं कि मामले को जटिल न बनाया जाए। शिवसैनिक वैसे भी वहां जमा हो जाएंगे और आप उन्हें रोक नहीं सकते। यहां कोई आदर्श आचार संहिता लागू नहीं है। उन्होंने आयोग से अपील की थी कि किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए मनसे को 17 नवंबर को रैली करने की अनुमति दी जाए।
देश की तीसरी सबसे बड़ी विधानसभा में सियासी समीकरण
महाराष्ट्र में इस बार सियासी मुकाबला बेहद दिलचस्प होने के आसार हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि लगभग 25 महीने पहले जून, 2022 में महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार गिरी थी। इसके बाद भाजपा समर्थित सरकार बनी। शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दो-फाड़ होने के बाद राज्य में पहली बार विधानसभा चुनाव होंगे। महाराष्ट्र की 288 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार के पास 202 विधायकों का समर्थन है। 102 विधायकों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है। अजीत पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के 40 विधायक हैं। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के 38 विधायक हैं। 14 निर्दलीय विधायकों ने भी एनडीए सरकार को समर्थन दिया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार को पांच अन्य छोटे दलों का समर्थन भी हासिल है।
महाराष्ट्र में विपक्षी खेमा कितना मजबूत
इसके अलावा विपक्षी खेमे (महाविकास अघाड़ी- MVA) में कुल 71 विधायक हैं। विपक्ष में कांग्रेस 37 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना के 16 विधायक हैं। वरिष्ठ राजनेता शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) के 12 विधायक हैं। समाजवादी पार्टी के दो, सीपीआईएम और पीडब्लूपीआई के एक-एक विधायक हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के दो विधायक भी विपक्षी खेमे में हैं। 15 विधानसभा सीटें खाली हैं।
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