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Inheritance Tax: क्या है विरासत टैक्स, जिसे लगाने की वकालत कर रहे पित्रोदा; अमेरिका में यह कर कैसे लगता है?

Wed, 24 Apr 2024 04:15 PM IST
शिवेंद्र तिवारी स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Wed, 24 Apr 2024 04:15 PM IST
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सार
US Tnheritance Tax: कांग्रेस के घोषणा-पत्र पर जारी विवाद के बीच पार्टी के नेता सैम पित्रोदा ने अमेरिका की तर्ज पर विरासत टैक्स लगाने की वकालत की है। दरअसल, विरासत टैक्स किसी व्यक्ति को विरासत में मिली संपत्ति पर लगाया जाने वाला टैक्स है। यह व्यवस्था अमेरिका के छह राज्यों में लागू है। 
 
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LS polls: United States Inheritance Tax news in hindi and Sam Pitroda statement
विरासत टैक्स - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

इन दिनों सियासी पारा पूरी तरह से गर्म है। भाजपा और कांग्रेस में आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। बीते कुछ दिनों से कांग्रेस के घोषणा पत्र को लेकर भाजपा हमलावर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी रैलियों में आरोप लगा रहे हैं कि कांग्रेस लोगों की संपत्ति इकट्ठा कर बंदरबांट करेगी। 


यह विवाद थमा नहीं था कि कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने अमेरिका के विरासत कर की वकालत करके एक नई बहस छेड़ दी है। पित्रोदा के बयान के बाद भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की नीतियां देश को बर्बाद करने वाली हैं। भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने बुधवार को कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि हमारी मेहनत से बनाई संपत्ति का आधा हिस्सा छीन लिया जाएगा। 


इस विवाद के बीच, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संविधान के अनुच्छेद 39 (बी) की व्याख्या के लिए प्रक्रिया शुरू की। सुप्रीम कोर्ट की नौ-न्यायाधीशों की पीठ यह निर्धारित करेगी कि राज्य का नीति निर्देशक सिद्धांत (डीपीएसपी) सरकार को निजी स्वामित्व वाली संपत्तियों के पुनर्वितरण की अनुमति देता है या नहीं। 



आइये जानते हैं कि सैम पित्रोदा ने विरासत टैक्स को लेकर क्या बयान दिया है? आखिर अमेरिका की यह कर व्यवस्था क्या है? यह टैक्स किन पर लागू होता है? 

इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा
इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा - फोटो : अमर उजाला
सैम पित्रोदा ने विरासत टैक्स को लेकर क्या बयान दिया है?
इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने कहा, 'अमेरिका में विरासत कर (टैक्स) लगता है। अगर किसी के पास 100 मिलियन डॉलर की संपत्ति है और जब वह मर जाता है तो वह केवल 45 फीसदी अपने बच्चों को दे सकता है। 55 फीसदी सरकार द्वारा हड़प लिया जाता है। यह एक दिलचस्प नियम है। यह कहता है कि आपने अपनी पीढ़ी में संपत्ति बनाई और अब आप जा रहे हैं, आपको अपनी संपत्ति जनता के लिए छोड़नी चाहिए। हालांकि पूरी नहीं, आधी ही। ये जो निष्पक्ष कानून है मुझे अच्छा लगता है।'

कांग्रेस नेता ने आगे कहा, 'भारत में आपके पास ऐसा नियम नहीं है। अगर किसी की संपत्ति 10 अरब है और वह मर जाता है, तो उसके बच्चों को 10 अरब मिलते हैं और जनता को कुछ नहीं मिलता। इसलिए लोगों को इस तरह के मुद्दों पर बहस और चर्चा करनी होगी।' पित्रोदा ने कहा, 'यह एक नीतिगत मुद्दा है। कांग्रेस पार्टी एक ऐसी नीति बनाएगी, जिसके माध्यम से धन का बांटना बेहतर होगा।'

सैम पित्रोदा के बयान पर भड़की भाजपा
सैम पित्रोदा के बयान पर भड़की भाजपा - फोटो : अमर उजाला
आखिर अमेरिका की 'विरासत कर' व्यवस्था क्या है?
विरासत कर एक व्यक्ति द्वारा विरासत के हिस्से के रूप में मिली संपत्ति पर लगाया जाने वाला कर है। यह राज्य द्वारा लगाई जाने वाली कर व्यवस्था है। अमेरिका की 'विरासत कर' या 'इनहेरिटेंस टैक्स' व्यवस्था उस धन, संपत्ति पर लगती है जिसे कोई व्यक्ति मरने के बाद दूसरों के लिए छोड़ देता है। जिसे संपत्ति मिलती है उसे ही विरासत कर का भुगतान करना होता है। हालांकि, इस कर को लागू करने में कई कारकों की भूमिका होती है। ये कारक यह निर्धारित करते हैं कि कितना कर भुगतान किया जाना चाहिए और मृतक कहां रहता था, संपत्ति पाने वाले के साथ उनके रिश्ते कैसे थे।

Tax टैक्स new
Tax टैक्स new - फोटो : istock
अमेरिका में विरासत कर कहां लागू है?
अमेरिका में विरासत कर की व्यवस्था केंद्र स्तर पर नहीं लागू नहीं है। संयुक्त राज्य अमेरिका में 50 राज्य और कोलंबिया जिला शामिल हैं लेकिन विरासत कर वाली व्यवस्था महज छह राज्यों में ही लागू है। विरासत कर लगाने वालों अमेरिकी राज्यों में आयोवा, केंटकी, मैरीलैंड, नेब्रास्का, न्यू जर्सी और पेंसिल्वेनिया शामिल हैं। हालांकि, आयोवा राज्य ने घोषणा की है कि वह 2025 में अपने विरासत कर को समाप्त कर देगा।
 

अलग-अलग राज्यों में कैसे लागू होता है विरासत कर?
विरासत कर कितना है और इसे किसे भुगतान करना है, इसके बारे में हरेक राज्य के अपने-अपने नियम हैं। आयोवा राज्य में विरासत कर 1% से 4% तक होता है। नियम के अनुसार, पति-पत्नी, बच्चे, सौतेले बच्चे, माता-पिता, दादा-दादी और परदादा, पोते-पोतियां और पर-पोते-पोते को छूट है। इसके अलावा, 500 अमेरिकी डॉलर तक की चैरिटी की छूट भी मिलती है। 

केंटकी में मृतक से रिश्ते के आधार पर $500 या $1,000 से अधिक की संपत्ति पर टैक्स लागू होता है। यह कर 4% से 16% तक होता है। नियम के अनुसार, पति-पत्नी, माता-पिता, बच्चे, सौतेले बच्चे और पोते-पोतियां और भाई-बहनों को रियायत है।

मैरीलैंड में $1,000 से अधिक की संपत्ति पर कर की दर 10% है। पति-पत्नी, बच्चे, माता-पिता, दादा-दादी, पोते-पोतियां, भाई-बहन और दानदाताओं को कर से छूट मिलती है। जानकारी के अनुसार, मैरीलैंड वह राज्य है जो विरासत कर और संपत्ति कर दोनों लगाता है।

नेब्रास्का राज्य में माता-पिता, बच्चे, भाई-बहन और दादा-दादी $100,000 से अधिक की संपत्ति पर 1% का भुगतान करते हैं। चाची, चाचा, भतीजी और भतीजे $40,000 से अधिक की संपत्ति पर 11% का भुगतान करते हैं। अन्य सभी उत्तराधिकारी $25,000 से अधिक की संपत्ति पर 15% का भुगतान करते हैं। हालांकि, 22 वर्ष से कम आयु के पति-पत्नी और उत्तराधिकारियों को छूट मिलती है।

न्यू जर्सी में संपत्ति की कीमत और मृतक के साथ रिश्ते के आधार पर 11% से 16% तक कर लागू होता है। पति/पत्नी, बच्चों, माता-पिता, दादा-दादी, पोते-पोतियों और धर्मार्थ संगठनों को इससे रियायत है। वहीं भाई-बहनों और बेटों/बहुओं को $25,000 तक की छूट है।

पेंसिल्वेनिया में $3,500 से अधिक की संपत्ति पर बच्चों, माता-पिता और दादा-दादी के लिए कर 4.5% कर की व्यवस्था है। भाई-बहनों को 12% और अन्य उत्तराधिकारियों को 15% टैक्स देना होता है। हालांकि, जीवनसाथी, 21 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और दान संस्थाओं को छूट है। 

Supreme Court
Supreme Court - फोटो : ANI
क्या भारत में निजी संपत्तियों का बंटवारा संभव है?
सुप्रीम कोर्ट की नौ-न्यायाधीशों की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 39 (बी) की व्याख्या के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। पीठ यह निर्धारित करेगी कि डीपीएसपी सरकार को निजी संपत्तियों के पुनर्वितरण की अनुमति देता है या नहीं। यह मुद्दा 1977 के रंगनाथ रेड्डी मामले के चलते उपजा है, जिस पर जस्टिस वीआर कृष्णा अय्यर ने असहमतिपूर्ण दृष्टिकोण रखा है।

इस मामले को फरवरी 2002 को नौ-न्यायाधीशों की पीठ द्वारा व्याख्या के लिए भेजा गया था। अनुच्छेद 39 (बी) में प्रावधान है कि राज्य अपनी नीति को यह सुनिश्चित करने की दिशा में निर्देशित करेगा कि 'समुदाय के भौतिक संसाधनों का स्वामित्व और नियंत्रण इस प्रकार वितरित किया जाए कि आम हित के लिए सर्वोत्तम हो।' कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि सामुदायिक संसाधनों में कभी भी निजी स्वामित्व वाली संपत्तियां शामिल नहीं हो सकतीं। अधिवक्ताओं के अनुसार, संविधान से चलने वाले लोकतांत्रिक देश में इस विचार की कोई जगह नहीं है जो नागरिकों के मौलिक अधिकारों को प्रधानता देता है।
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