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Hindi News ›   Election ›   LS Polls: Ram Temple election issue in Kerala or not From Rajiv Chandrashekhar, Shashi Tharoor to Rahul Gandhi

LS Polls: केरल में राम मंदिर चुनावी मुद्दा या नहीं? राजीव चंद्रशेखर, शशि थरूर से लेकर राहुल गांधी तक मैदान में

Wed, 17 Apr 2024 08:45 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Wed, 17 Apr 2024 08:45 PM IST
सार

केरल की एक बड़ी आबादी विदेश में रहती है। यहां के युवा देश के दूसरे हिस्सों में आ-जा रहे हैं। वे देश-दुनिया के दूसरे हिस्सों में हो रहे बदलाव देख रहे हैं। जो केरल अपनी शिक्षा और विकास के कारण कभी गौरव के साथ देखा जाता था, अब कई मायनों में दूसरे इलाकों से पिछड़ रहा है। यही कारण है कि अब यहां के युवाओं में बदलाव को लेकर एक बहस चल रही है।

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LS Polls: Ram Temple election issue in Kerala or not From Rajiv Chandrashekhar, Shashi Tharoor to Rahul Gandhi
लोकसभा चुनाव - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

केरल को देवताओं की अपनी भूमि कहा जाता है। देवताओं की इस भूमि पर अयोध्या में राम मंदिर बनना बड़ा और संवेदनशील मुद्दा तो अवश्य है, लेकिन यह यहां बड़ा चुनावी मुद्दा नहीं है। इसकी बजाय केरल की सभी 20 लोकसभा सीटों पर विकास का मुद्दा भारी है। यहां लोग भाजपा के संकल्प पत्र और मोदी की गारंटी की खूब चर्चा कर रहे हैं, तो कांग्रेस के न्याय और वादों की भी खूब चर्चा है। जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिनराई विजयन सरकार के भ्रष्टाचार पर हमला बोला है, भ्रष्टाचार यहां सबसे बड़े मुद्दे के रूप में उभर आया है। भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही सरकार के भ्रष्टाचार पर जबरदस्त हमलावर हैं।

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केरल की एक बड़ी आबादी विदेश में रहती है। यहां के युवा देश के दूसरे हिस्सों में आ-जा रहे हैं। वे देश-दुनिया के दूसरे हिस्सों में हो रहे बदलाव देख रहे हैं। जो केरल अपनी शिक्षा और विकास के कारण कभी गौरव के साथ देखा जाता था, अब कई मायनों में दूसरे इलाकों से पिछड़ रहा है। यही कारण है कि अब यहां के युवाओं में बदलाव को लेकर एक बहस चल रही है। ऐसे में भाजपा इससे काफी आशांवित लग रही है।  
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भाजपा को हिंदू वोट बैंक को यहां के रोमन कैथोलिक और लैटिन कैथोलिक वर्ग के उन मतदाताओं का भी साथ मिल सकता है, जो कथित लव जिहाद के मामलों के कारण अब कम्युनिस्ट दलों से दूरी बरतते दिखाई दे रहे हैं। हाल ही में कोल्वम जिले में कम्यूनिस्ट दल एसडीपीआई के एक जिला स्तरीय नेता की बेटी के साथ हुआ कथित लव जिहाद का मामला स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। तिरुअनंतपुरम में भी इसी तरह के एक मामले से लोगों में नाराजगी बढ़ी है। इससे परंपरागत समीकरणों में बदलाव आ सकता है और भाजपा को वोटों की बढ़त मिल सकती है।  
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हिंदुत्व का कितना असर?
विश्व हिंदू परिषद के अखिल भारतीय सहमंत्री वेंकटेश्वरन तिरुवनंतपुरम से ही आते हैं। उन्होंने अमर उजाला को बताया कि राम मंदिर का मुद्दा यहां लोगों के लिए भावनात्मक और संवेदनशील मुद्दा है। यहां से भारी संख्या में लोग अयोध्या में राम मंदिर करने के लिए दर्शन करने भी जा चुके हैं। यह क्रम अभी भी जारी है, लेकिन जब चुनाव और वोटिंग की बात आती है तो यहां की जनता विकास की बात करती है। 

उन्होंने कहा कि राम मंदिर के कारण कम, लेकिन विकास कार्यों को देखकर ही यहां के लोग वोट देते आए हैं। लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा देश के अंदर किए गए बड़े-बड़े विकास कार्यों की खूब चर्चा कर रहे हैं। केरल की शिक्षित आबादी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2047 के विजन की जबरदस्त चर्चा है।  
          
शशि थरूर को राजीव चंद्रशेखर की चुनौती
कांग्रेस के बड़े नेता शशि थरूर तिरुवनंतपुरम में लगातार चौथी बार जीत हासिल करने के लिए मैदान में हैं। वे इस सीट से 2009, 2014 और 2019 में बड़े अंतर से जीत हासिल कर चुके हैं, लेकिन इस बार भाजपा ने अपने बड़े चेहरे केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर को उनके सामने मैदान में उतारा है। इससे थरूर को कड़ी टक्कर मिल सकती है। भाजपा नेताओं का अनुमान है कि यदि इस सीट पर हिंदू बहुल जनता का 80-85 फीसदी वोट पोल कराया जा सके, तो राजीव चंद्रशेखर के जीतने की संभावना बन सकती है। पिछले चुनाव में लगभग 60 फीसदी के करीब हिंदू वोट ही पोल कराए जा सके थे। लिहाजा भाजपा अपने सहयोगी संगठनों के सहारे तिरुवनंतपुरम में ज्यादा से ज्यादा हिंदू वोट पोल कराने की हर संभव कोशिश कर रही है। राजीव चंद्रशेखर की अपनी टीम ने इसके लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। 

तिरुवनंतपुरम सीट पर लड़ाई केवल शशि थरूर और राजीव चंद्रशेखर के बीच नहीं है। सीपीआई नेता पन्नियन रवींद्रन भी यहां मैदान में हैं, जो इस सीट पर 2005 के उपचुनाव में जीत हासिल कर चुके हैं। वे यहां की कम्युनिस्ट लॉबी और उसके प्रतिबद्ध मतदाताओं के भरोसे हैं। वे इस सीट पर जीतने की संभावना रखते हैं। लेकिन अभी से यह चर्चा है कि यदि रवींद्रन जीतने की स्थिति में होंगे, तब कम्युनिस्ट मतदाता उनके साथ रहेगा और उन्हें जिताने का काम करेगा। लेकिन यदि उनके जीतने की संभावना कमजोर होती है, तो कम्युनिस्ट मतदाता कांग्रेस के पक्ष में झुक सकते हैं। इस स्थिति में शशि थरूर को लाभ मिल सकता है। यदि वोटों का बंटवारा होता है तो इसका लाभ राजीव चंद्रशेखर को मिल सकता है।  

सुरेश गोपी भाजपा की बड़ी उम्मीद
मलयालम सिनेमा के बड़े स्टार सुरेश गोपी भाजपा के टिकट पर त्रिशूर लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं। सुरेश गोपी की जबरदस्त प्रशंसक लॉबी इस इलाके में मौजूद है। सुरेश गोपी अपनी संस्था के जरिए जनता के हितों के लिए लंबे समय से काम करते रहे हैं। इससे सुरेश गोपी काफी आशांवित हैं। हालांकि, यहां भी सीपीआई और अन्य दल भाजपा उम्मीदवार सुरेश गोपी को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।   


वायनाड से राहुल गांधी मैदान में
भाजपा के नेता भी मानते हैं कि राहुल गांधी को वायनाड से हराना आसान नहीं है। पिछले चुनाव में यहां से उन्हें लगभग 65 फीसदी वोट (7.06 लाख) मिले थे। उन्होंने अपने नजदीकी उम्मीदवार पीपी सुनीर को लगभग 4.31 लाख वोटों के अंतर से हराया था। वायनाड की लगभग 50 फीसदी हिंदू आबादी है, लेकिन इसका बड़ा वर्ग कम्युनिस्ट विचारधारा से प्रेरित है, जो सीपीआई उम्मीदवारों को वोट करता रहा है। पिछले चुनाव में राहुल गांधी की जीत के बाद भी सीपीआई उम्मीदवार को ठीक-ठाक वोट मिल गए थे। इस बार एन्नी राजा चुनावी मैदान में हैं।

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