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LS Polls 2024: फ्री की रेवड़ी इस लोकसभा चुनाव में कितनी कारगर, मतदाताओं के लिए कौन-से मुद्दे अहम? जानें

Mon, 13 May 2024 08:46 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Mon, 13 May 2024 08:46 PM IST
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सार
अमर उजाला ने कुछ मतदाताओं से बातचीत की। इस बातचीत से यह अनुमान लगता है कि इस लोकसभा चुनाव में मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग राष्ट्रीय मुद्दों को देखकर वोट दे रहा है। उसके लिए देश की पाकिस्तान-चीन की सीमा पर सुरक्षा ज्यादा बड़ा मुद्दा है। वह जात-पात और क्षेत्रवाद से ऊपर उठकर राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी पसंद तय कर रहा है। इससे क्षेत्रीय मुद्दे पीछे छूटते हैं, जिसका लाभ राष्ट्रीय दलों को मिलता है।
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LS Polls 2024: Voters said We dont want free goods want safe developed country dont shy away from hard work
Ls Polls - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

चुनावों में हर राजनीतिक दल बड़ी-बड़ी लोकलुभावन घोषणाएं कर मतदाताओं का दिल जीतने की कोशिश करता है। कई चुनावों के परिणाम देखकर यह पता भी चलता है कि इस तरह की घोषणाओं का मतदाताओं पर असर होता है और बड़ी घोषणाएं करने वाले दल को कई बार जीत भी मिल जाती है। लेकिन इस चुनाव में मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है, जो खुलेआम यह कह रहा है कि उसे 'मुफ्त का माल' नहीं चाहिए। वह हमेशा से अपनी रोजी-रोटी के लिए कड़ी मेहनत करता रहा है, आगे भी करता रहेगा। लेकिन इस चुनाव में वह यह देखकर वोट दे रहा है कि किसके हाथ में देश सुरक्षित है और कौन देश का विकास करने में सक्षम है। 



अमर उजाला ने कुछ मतदाताओं से बातचीत की। इस बातचीत से यह अनुमान लगता है कि इस लोकसभा चुनाव में मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग राष्ट्रीय मुद्दों को देखकर वोट दे रहा है। उसके लिए देश की पाकिस्तान-चीन की सीमा पर सुरक्षा ज्यादा बड़ा मुद्दा है। वह जात-पात और क्षेत्रवाद से ऊपर उठकर राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी पसंद तय कर रहा है। इससे क्षेत्रीय मुद्दे पीछे छूटते हैं, जिसका लाभ राष्ट्रीय दलों को मिलता है।  


यह देखकर कुछ आश्चर्य हो सकता है, लेकिन स्मार्टफोन और सोशल मीडिया की पहुंच ने रेहड़ी-पटरी वालों के बीच भी विदेश में भारत के बढ़ रहे सम्मान को चर्चा का विषय बना दिया है। सोशल मीडिया ने बड़े नेताओं की बात लोगों तक आसानी से पहुंचाने में बड़ी मदद की है। इसका परिणाम भी दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया से बहुत हद तक प्रभावित इस वर्ग की प्राथमिकता में मुफ्त का माल नहीं, देश की सुरक्षा ज्यादा बड़ा मुद्दा है।     

रोहिणी सेक्टर 10 के पास बने मेट्रो स्टेशन के पास फल बेचने कैलाश सिंह से जब हमने चुनावी बातचीत शुरू की, तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने अमर उजाला से कहा कि वे लोग रोज मेहनत करके खाने वाले लोग हैं। उन्हें किसी सरकार से कोई चीज फ्री में नहीं चाहिए। 

एक अन्य रेहड़ी-पटरी पर फल विक्रेता शेर सिंह कहते हैं कि रोज कमाना खाना उनका काम है। उन्हें किसी सरकार से कोई चीज फ्री में नहीं चाहिए। मनोज कुमार का कहना है कि दिन की कड़ी धूप में मेहनत करने से उन्हें कोई संकोच नहीं है, लेकिन जब वोट देने की बात आती है, तो वे केवल देश की बात सोचते हैं। 
 
कैलाश गोयल कहते हैं कि ई-कॉमर्स बढ़ने से व्यापारियों की समस्याएं बढ़ी हैं, महंगाई बढ़ने से भी लोगों को परेशानी हो रही है, लेकिन पूरे देश का विकास हुआ है। विकास से बाजार मजबूत होता है और इसी से रोजगार का निर्माण होता है। उन्होंने कहा कि सरकार को खुदरा बाजार में ई-बाजार और रिटेल मार्केट को संतुलित करने की कोशिश करनी चाहिए, क्योंकि ई-कॉमर्स ने फुटकर स्तर पर करोड़ों लोगों के रोजगार पर असर डाला है।

महिलाओं को नकद आर्थिक सहायता दे सरकार
वहीं, उत्तर पश्चिमी दिल्ली की निवासी महिला रेखा गोयल ने अमर उजाला से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सामान्य वर्ग के उन बच्चों के लिए भी कुछ करना चाहिए, जिन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलता और सामान्य वर्ग का होने के कारण किसी योजना का लाभ भी नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि जिस तरह मध्यप्रदेश में महिलाओं के लिए नकद आर्थिक सहायता की लाडली बहना योजना शुरू हुई थी, उसी तरह राष्ट्रीय स्तर पर भी महिलाओं को आर्थिक तौर पर सशक्त करने की योजना लानी चाहिए। केंद्र सरकार इस समय भी देश के किसानों को नकद आर्थिक सहायता दे रही है, उसे महिलाओं के लिए भी इसी तरह की योजना पेश करनी चाहिए।

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