LS Election 2024: भाजपा का पूर्व सांसद अब राहुल गांधी के नाम पर मांग रहा वोट, क्या मिलेगा जीत का आशीर्वाद?
बदले समीकरणों में इस सीट को भाजपा के गढ़ के तौर पर देखा जाने लगा है। इसका सबसे बड़ा कारण यही है कि विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी की बड़ी जीत के बाद भी भाजपा ने दो बार यहां बड़े अंतर के साथ लोकसभा चुनावों में जीत हासिल की है।
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उत्तर पश्चिमी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र अनुसूचित समुदाय के उम्मीदवारों के लिए सुरक्षित है। 2009 में सबसे पहली बार यहां से कांग्रेस की प्रत्याशी कृष्णा तीरथ को जीत मिली थी। लेकिन 2014 की मोदी लहर में इस सीट पर भाजपा के प्रत्याशी उदित राज ने जीत हासिल की थी। 2019 के चुनाव में भाजपा ने उदित राज का टिकट काटकर गायक हंसराज हंस को अपना प्रत्याशी बना दिया। हंसराज हंस ने 60 फीसदी से ज्यादा वोट (8.48 लाख) हासिल करते हुए बड़ी जीत हासिल की थी। लेकिन अपना टिकट कटने से नाराज भाजपा सांसद उदित राज ने इस बीच कांग्रेस का हाथ पकड़ लिया है। इस बार वे कांग्रेस की तरफ से उम्मीदवार हैं और राहुल गांधी की गारंटियों पर जनता से वोट मांग रहे हैं।
वहीं, भाजपा ने एक बार फिर वर्तमान सांसद हंसराज हंस की जगह नए चेहरे योगेंद्र चंदोलिया को टिकट थमा दिया है। वे इस क्षेत्र के मजबूत भाजपा चेहरे के तौर पर देखे जाते हैं। योगेंद्र चंदोलिया प्रधानमंत्री नरेंद्र 'मोदी की गारंटी' पर लोगों से वोट मांग रहे हैं। यानी उत्तर पश्चिमी दिल्ली की सुरक्षित सीट पर इस बार भाजपा के पुराने सांसद और वर्तमान प्रत्याशी के बीच टक्कर है। ऐसे में जीत किसे मिलेगी, इस पर लोगों की निगाह बनी हुई है।
विधानसभा के अनुसार AAP मजबूत
उत्तर पश्चिमी लोकसभा सीट में दस विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इनमें से एक रोहिणी विधानसभा क्षेत्र पर भाजपा के विजेंद्र गुप्ता ने पिछले दो चुनाव में लगातार जीत हासिल की है। लेकिन बाकी सभी नौ विधानसभा सीटों पर आम आदमी पार्टी का कब्जा बना हुआ है। विधानसभा क्षेत्र पर पकड़ के हिसाब से देखें, तो आम आदमी पार्टी का दावा यहां पर बहुत मजबूत दिखाई देता है। कांग्रेस नेता कृष्णा तीरथ ने इस सीट का सबसे पहले चुनाव जीता था, लिहाजा यहां पर कांग्रेस की पकड़ भी कही जा सकती है। इस बार उदित राज कांग्रेस के प्रत्याशी हैं और आम आदमी पार्टी का उन्हें समर्थन प्राप्त है। चूंकि वे 2014 में भाजपा के ही टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं, इस क्षेत्र में उन्होंने काम भी किया है, लिहाजा उनके कुछ समर्थक भी बन चुके हैं, जो उनके लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। इस हिसाब से उदित राज की दावेदारी मजबूत कही जा सकती है।
लोकसभा के हिसाब से भाजपा का गढ़
लेकिन बदले समीकरणों में इस सीट को भाजपा के गढ़ के तौर पर देखा जाने लगा है। इसका सबसे बड़ा कारण यही है कि विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी की बड़ी जीत के बाद भी भाजपा ने दो बार यहां बड़े अंतर के साथ लोकसभा चुनावों में जीत हासिल की है। भाजपा समर्थक इस बार भी यहां पर मोदी लहर होने का दावा कर रहे हैं। वोटिंग का ट्रेंड देखने से यह स्पष्ट होता है कि पिछले दस सालों में यहां के मतदाता विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी और लोकसभा चुनाव में भाजपा को सपोर्ट करते आए हैं। यदि ऐसा ही ट्रेंड इस बार भी बना रहा हो, तो इस बार उदित राज को परेशानी हो सकती है, जबकि भाजपा उम्मीदवार योगेंद्र चंदोलिया को इसका लाभ मिल सकता है।
सोशल मीडिया पर ज्यादा जोर
एक सोशल मीडिया मीट में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उदित राज ने कहा कि नरेंद्र मोदी सोशल मीडिया के कारण ही सत्ता में आए हैं, इस सोशल मीडिया के कारण ही सत्ता से जाएंगे। उनके इस कथन से ही समझ में आ जाता है कि राजनीतिक दलों के लिए इस बार सोशल मीडिया कितनी महत्त्वपूर्ण हो चुकी है। संभवतया यही कारण है कि इस बार चुनाव में सड़कों-चौराहों पर सन्नाटा सा दिखाई दे रहा है। कहीं-कहीं बड़े बैनर-पोस्टर जरूर दिख रहे हैं, लेकिन पिछले वर्षों की तुलना में उम्मीदवारों ने पूरा ध्यान सोशल मीडिया पर दे रखा है।