फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Election ›   LS Polls 2024:  Amit Shah was waiting for Raja Bhaiya in pratap garh rally but he did not come

LS Polls 2024: तैयारी पूरी थी, मंच पर कुर्सी भी रखी गई; अमित शाह को था राजा भैया का इंतजार, लेकिन वह नहीं आए

Mon, 13 May 2024 07:50 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Mon, 13 May 2024 07:50 PM IST
सार

अमित शाह ने प्रतापगढ़ की जनसभा को ऐसे ही नहीं हरी झंडी दी। फूलपुर की लोकसभा सीट को आसानी से जीतने के उपाय भी जरूरी हैं। इसके लिए रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया) साथ भी अच्छा रहेगा। समाजवादी पार्टी के अमरनाथ मौर्य ने भाजपा के प्रत्याशी प्रवीण कुमार सिंह पटेल को अच्छी टक्कर दी है। बसपा के जगन्नाथ पाल के मैदान में उतरने के बाद भी प्रवीण कुमार पटेल की मुश्किल कम नहीं हो रही है।

विज्ञापन
LS Polls 2024:  Amit Shah was waiting for Raja Bhaiya in pratap garh rally but he did not come
LS Polls - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा के शीर्ष रणनीतिकार इस उत्तर प्रदेश में सीटों के गुणा-गणित में ज्यादा समय दे रहे हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दावा है कि राज्य की 80 में से 80 लोकसभा सीटें भाजपा जीत रही है, लेकिन अंदरखाने की रिपोर्ट ने शीर्ष नेताओं को परेशान कर रखा है। खबर है कि 80 में 32 सीटों पर कांटे का मुकाबला है। इस राह को आसान बनाने में शीर्ष रणनीतिकारों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। बताते हैं इसी क्रम में अमित शाह की प्रतापगढ़ में रैली थी। हीरागंज की इस जनसभा में कुंडा के रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया) को मंच साझा करना था। मंच पर कुर्सी लगी थी, इंतजार भी हुआ और कुर्सी खाली रह गई। अमित शाह संबोधित करके चले गए, राजा भैया नहीं आए।

विज्ञापन


हीरागंज, बाबागंज विधानसभा और कौशांबी लोकसभा में आता है। इस क्षेत्र में राजा भैया की पकड़ है। कौशांबी से भाजपा के सांसद विनोद सोनकर अपनी सीट बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 2019 में इंद्रजीत सरोज से करीब 39 हजार वोटों से जीते थे। इस बार मुकाबले में इंद्रजीत के पुत्र पुष्पेंद्र हैं। बात इतनी भर नहीं है। कौशांबी में विनोद सोनकर और उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या में हल्की-फुल्की नोकझोंक चलती रहती है। कहते हैं कि इसके कारण जहां विनोद सोनकर के 2019 में जीतने का अंतर कम था, वहीं 2022 में उपमुख्यमंत्री भी अपनी सीट नहीं बचा पाए थे। हालांकि विनोद सोनकर के नामांकन में उपमुख्यमंत्री मौजूद थे, लेकिन अभी तमाम सवाल हैं। इस बार भाजपा यहां कोई चांस नहीं लेना चाहती। इसलिए सभी संभावित विकल्प पुख्ता किए जा रहे हैं। राजा भैया से भी संपर्क किया गया था। उन्होंने हामी भरी थी, लेकिन हीरागंज में मंच पर नहीं आए।
विज्ञापन


जौनपुर में भी चल रही है बातचीत
जौनपुर लोकसभा सीट भी भाजपा के लिए सिरदर्द बन गई है। बाहुबली नेता और पूर्व सांसद धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला सिंह रेड्डी का पहले बसपा ने टिकट काट दिया। बाद में निर्दलीय नामांकन का कोरम पूरा न होने के अभाव में पर्चा खारिज हो गया। लेकिन इसके बाद भी भाजपा प्रत्याशी कृपाशंकर सिंह की मुश्किल कम नहीं हो रही है। समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी बाबू सिंह कुशवाहा मजबूती से लड़ रहे हैं। बसपा ने पूर्व सांसद श्याम सिंह यादव को उतारकर सीट फंसाने की कोशिश तो की, लेकिन भाजपा को के नेताओं को अभी भी जौनपुर जीत लेने का भरोसा कम हो रहा है। इसलिए रणनीतिकार चाहते हैं कि धनंजय सिंह भाजपा के प्रत्याशी को खुला समर्थन दे दें। धनंजय सिंह का भी राजनीतिक कैरियर है। उन्हें इसकी चिंता होना स्वाभाविक है। सूत्र बताते हैं कि उनके पास अमित शाह का भरोसा पहुंचा है। देखना है आगे राजनीति क्या रंग लाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इलाहाबाद में कौन मारेगा बाजी?
इलाहाबाद की हाई प्रोफाइल लोकसभा सीट पर कांग्रेस उज्वल रमण सिंह को प्रत्याशी बनाया है। समाजवादी पार्टी के नेता कुंवर रेवती रमण सिंह के पुत्र हैं। गजब का भाषण देते हैं। बसपा ने रमेश पटेल को टिकट दिया है। जबकि भाजपा ने पूर्व राज्यपाल, विधानसभा अध्यक्ष स्व. पंडित केशरी नाथ त्रिपाठी के परिवार से नीरज त्रिपाठी को मैदान में उतारा है। नीरज का पारिवारिक पृष्ठभूमि के लिहाज से नाम बड़ा है। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री नंद गोपाल नंदी का परिवार भी बहुत खुश नहीं है। संघ और भाजपा के नेता भी मान रहे हैं कि नीरज की लड़ाई कड़ी है। लखनऊ से नीरज को जिताने के लिए विशेष प्रचार अभियान पर जोर दिया जा रहा है।

फूलपुर लोकसभा सीट पर कांटे की लड़ाई किसे देगी ताज?
अमित शाह ने प्रतापगढ़ की जनसभा को ऐसे ही नहीं हरी झंडी दी। फूलपुर की लोकसभा सीट को आसानी से जीतने के उपाय भी जरूरी हैं। इसके लिए रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया) साथ भी अच्छा रहेगा। समाजवादी पार्टी के अमरनाथ मौर्य ने भाजपा के प्रत्याशी प्रवीण कुमार सिंह पटेल को अच्छी टक्कर दी है। बसपा के जगन्नाथ पाल के मैदान में उतरने के बाद भी प्रवीण कुमार पटेल की मुश्किल कम नहीं हो रही है। प्रयागराज क्षेत्र के भाजपा के नेता ज्ञानेश्वर शुक्ला कहते हैं कि इलाहाबाद और फूलपुर दोनों सीट पर विपक्ष हारेगा। हालांकि वह कहते हैं कि राजनीतिक लड़ाई कांटे की है। जबकि समाजवादी पार्टी के नेता सुशील कुमार दुबे कहते हैं कि भाजपा को कौशांबी, इलाहाबाद, फूलपुर, मछलीशहर और जौनपुर में कड़ी टक्कर मिल रही है। सुशील समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव हैं। बताते हैं कि मायावती ने जिस तरह से अपने भतीजे को पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटाया है, उससे समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के इंडिया गठबंधन को जबरदस्त लाभ हो रहा है। मायावती के इस कदम ने साबित कर दिया कि बहुजन समाज पार्टी सत्ताधारी दल भाजपा की बी-टीम है। सुशील कुमार दूबे कहते हैं कि इसके कारण उत्तर प्रदेश की बची सभी सीटों पर इंडिया गठबंधन भाजपा के प्रत्याशी को कड़ी टक्कर दे रहा है।


एक दर्जन से अधिक सीटों को लेकर भाजपा चिंतित
भाजपा के रणनीतिकारों को लखनऊ से इलाहाबाद, बनारस, गोरखपुर तक एक दर्जन से अधिक सीटों की चिंता सताने लगी है। दो महीने पहले उत्तर प्रदेश के भाजपा के एक बड़े नेता लखनऊ से लेकर पूर्वांचल तक केवल तीन सीट विपक्ष के खाते में दे रहे थे। इसमें एक रायबरेली की सीट भी शामिल थी। अब वह कह रहे हैं रायबरेली के साथ-साथ अमेठी में लड़ाई कांटे की हो गई है। सुल्तानपुर में मेनका गांधी की सीट पर राजनीतिक बढ़ गई है। सूत्र का कहना है कि इलाहाबाद, कौशांबी, फूलपुर, मछलीशहर, जौनपुर, आजमगढ़, गाजीपुर जैसी दर्जनभर सीटों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। भाजपा के उत्तर प्रदेश से एक विधायक के मुताबिक कुछ सीटें तो कमजोर प्रत्याशी के कारण चुनौती बन रही हैं, लेकिन सब ठीक हो जाएगा। सूत्र का कहना है कि क्षेत्र के तमाम प्रभावी नेता भाजपा में आना चाहते हैं। उनका समर्थन मिल रहा है और सीटें भाजपा के पक्ष में आएंगी। अभी तो पांचवें चरण के मतदान में समय है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed