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Pawan Singh: आसनसोल से टिकट मिलने के 24 घंटे के अंदर पीछे हटे पवन सिंह, हवाओं में कई अटकलें
Sun, 03 Mar 2024 02:12 PM IST
नितिन गौतम
एन. अर्जुन
एन. अर्जुन
Published by: नितिन गौतम
Updated Sun, 03 Mar 2024 02:12 PM IST
सार
भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह ने आसनसोल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। भाजपा की पहली लिस्ट में पवन सिंह का नाम था और पार्टी ने उन्हें बंगाल की आसनसोल सीट से उम्मीदवार बनाया था।
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भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के सुपर स्टार पवन सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भाजपा ने शनिवार को पश्चिम बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट से उनके नाम का ऐलान किया। बाद में उन्होंने खुद ही यह सूची सोशल मीडिया पर पोस्ट की। मिठाई खिलाते और भगवान का शुक्रिया अदा करते हुए वीडियो भी डाला गया। लेकिन 24 घंटे से पहले ही खुद ही पवन सिंह ने कहा कि वह आसनसोल सीट से उम्मीदवार नहीं हो सकते। भोजपुरी अभिनेता-गायक ने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के प्रति 'आभार' व्यक्त करते हुए यह घोषणा की। इस घोषणा के साथ ही खबर तेजी से वायरल हुई और लोगों ने तरह-तरह के कयास लगाने शुरू कर दिए। राजनीतिक गलियारों से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक विशेषज्ञ यह समझन नहीं पाए कि आखिर, पवन सिंह को क्या हुआ कि उनको इस तरह की घोषणा करनी पड़ी। लेकिन अमर उजाला ने कोलकाता से लेकर आसनसोल तक और दिल्ली तक इस मामले को जानने की कोशिश की, आखिर हुआ तो हुआ क्या? उनकी घोषणा के बाद हवाओं में कई अटकलों का दौर जारी है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक रात होते-होते बाजी पलटने की संभावनाओं से भी इनकार नहीं कर रहे हैं। क्या पवन सिंह के गानों में बंगाल की महिलाओं का अपमान हो सकता है, एक कारण...। लेकिन ये सब अभी तक केवल कयास ही हैं। उम्मीदवार नहीं बनने के पीछे की हकीकत जानने के लिए थोड़ा समय इंतजार करना पड़ेगा...
क्या यह भाजपा को धक्का है
जैसे ही पवन सिंह ने घोषणा की कि वह आसनसोल सीट से उम्मीदवार नहीं हो सकते। तृणमूल के महसाचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर भाजपा के खिलाफ सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया। उन्होंने इसे पश्चिम बंगाल के लोगों की 'अदम्य इच्छाशक्ति और शक्ति' बताते हुए इसकी सराहना की। तृणमूल कांग्रेस इसे भाजपा के लिए धक्का बताने की कोशिश कर रही है। तृणमूल कांग्रेस इसे जोर-शोर से प्रचारित कर रही है। हालांकि, अभिषेक ने आसनसोल लोकसभा क्षेत्र के तृणमूल उम्मीदवार शत्रुघ्न इस पर कोई टिप्पणी नहीं की। उल्लेखनीय है कि ममता बनर्जी ने पिछले दिनों एक जनसभा से शत्रुघ्न का आसनसोल सीट से उम्मीदवार के रूप में जिक्र किया था। हालांकि, राजनीतिक विश्षेलक मान कर चल रहे हैं कि रात होते-होते पासा पलट भी सकता है। क्योंकि पवन सिंह को दिल्ली बुलाया गया है। भाजपा इसे धक्का मानने को तैयार नहीं है।
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क्या बंगाल की महिलाओं का अपमान हो सकता है कारण
पवन ने रविवार को एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, ''मैं भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को धन्यवाद देता हूं। टीम ने मुझ पर भरोसा किया और मुझे आसनसोल से मैदान में उतारा। लेकिन विशेष कारणों से मैं आसनसोल से चुनाव नहीं लड़ सकता।'' सूत्रों के मुताबिक पवन पर आरोप है कि उन्होंने अपने भोजपुरी गाने में बंगाल की महिलाओं का अपमान किया है। संयोग से, जैसे ही आसनसोल लोकसभा क्षेत्र के लिए उम्मीदवार के रूप में पवन के नाम की घोषणा की गई, तृणमूल ने उनके खिलाफ अभियान शुरू कर दिया। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने चौतरफा उन पर हमला बोलना शुरू कर दिया था। आरोप है कि पवन ने अपने भोजपुरी गाने में बंगाल की महिलाओं का अपमान किया है। संयोग से जब पवन को लेकर विवाद गर्म हो रहा था, तबी उन्होंने एक्स ने आसनसोल से चुनाव नहीं लड़ने की बात कही।
संदेशखाली मामले पर पीएम ने तृणमूल को घोरा था
इस बीच, हाल ही में तृणमूल के टिकट पर राज्यसभा के लिए विजयी सागरिका घोष भी इसमें शामिल हुईं। उन्होंने कहा, ''नहम हसीना बंगाल क्या है?'' आसनसोल से भाजपा उम्मीदवार के एक गाने के वीडियो में बंगाली महिलाओं को कमतर दर्शाया गया है। क्या हम ऐसे जन प्रतिनिधियों को चाहते हैं?'' प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार और शनिवार को संदेशखाली में महिलाओं से 'बलात्कार' को लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल पर हमला बोला। उसके बाद पवन को उम्मीदवार घोषित कर तृणमूल ने महिलाओं के प्रति 'अपमान' का ही आरोप लगाया है।
क्या आरा से चुनाव लड़ना चाहते थे पवन सिंह
सूत्रों के मुताबिक यह भी पता चला है कि पवन सिहं भले ही आसनसोल से टिकट मिलने से खुश थे लेकिन उनकी पहली पसंद आरा थी। भाजपा सूत्रों के मुताबिक एक बार इस संबंध में पवन सिंह भाजपा के एक वरिष्ठ नेता से भी मिले थे। ताकि उनको आरा से टिकट मिल जाए, लेकिन भाजपा ने आरा से उनको टिकट नहीं दिया। आसनसोल के कई भाजपा नेता भी उनके इस निर्णय से कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं हैं। किसी को कुछ समझ ही नहीं आ रहा है कि आखिर पवन सिंह ने इस तरह की घोषणा क्यों और किन परिस्थितियों में की।
तरीका यह ठीक नहीं, उच्च नेतृत्व से मिलना चाहिए था
पश्चिम बंगाल के एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, अगर पवन सिंह को चुनाव नहीं लड़ना था तो उसके लिए उनको भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से बात करनी चाहिए थी। जिस तरह से उन्होंने सोशल मीडिया में यह बात जाहिर की, इससे कोई भी नेता कुछ बोलने की स्थिति में ही नहीं है। पार्टी नेतृत्व ने जब पवन सिंह पर इतना भरोसा किया। अगर उनको चुनाव नहीं लड़ना था, उम्मीदवार नहीं बनना था, तो वे पार्टी की केंद्रीय नेतृत्व से जाकर मिल कर अपनी बात कहते। सलाह-मशविरा होता। इस तरह से सोशल मीडिया पर घोषणा ठीक नहीं है।
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क्या यह भाजपा को धक्का है
जैसे ही पवन सिंह ने घोषणा की कि वह आसनसोल सीट से उम्मीदवार नहीं हो सकते। तृणमूल के महसाचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर भाजपा के खिलाफ सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया। उन्होंने इसे पश्चिम बंगाल के लोगों की 'अदम्य इच्छाशक्ति और शक्ति' बताते हुए इसकी सराहना की। तृणमूल कांग्रेस इसे भाजपा के लिए धक्का बताने की कोशिश कर रही है। तृणमूल कांग्रेस इसे जोर-शोर से प्रचारित कर रही है। हालांकि, अभिषेक ने आसनसोल लोकसभा क्षेत्र के तृणमूल उम्मीदवार शत्रुघ्न इस पर कोई टिप्पणी नहीं की। उल्लेखनीय है कि ममता बनर्जी ने पिछले दिनों एक जनसभा से शत्रुघ्न का आसनसोल सीट से उम्मीदवार के रूप में जिक्र किया था। हालांकि, राजनीतिक विश्षेलक मान कर चल रहे हैं कि रात होते-होते पासा पलट भी सकता है। क्योंकि पवन सिंह को दिल्ली बुलाया गया है। भाजपा इसे धक्का मानने को तैयार नहीं है।
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क्या बंगाल की महिलाओं का अपमान हो सकता है कारण
पवन ने रविवार को एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, ''मैं भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को धन्यवाद देता हूं। टीम ने मुझ पर भरोसा किया और मुझे आसनसोल से मैदान में उतारा। लेकिन विशेष कारणों से मैं आसनसोल से चुनाव नहीं लड़ सकता।'' सूत्रों के मुताबिक पवन पर आरोप है कि उन्होंने अपने भोजपुरी गाने में बंगाल की महिलाओं का अपमान किया है। संयोग से, जैसे ही आसनसोल लोकसभा क्षेत्र के लिए उम्मीदवार के रूप में पवन के नाम की घोषणा की गई, तृणमूल ने उनके खिलाफ अभियान शुरू कर दिया। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने चौतरफा उन पर हमला बोलना शुरू कर दिया था। आरोप है कि पवन ने अपने भोजपुरी गाने में बंगाल की महिलाओं का अपमान किया है। संयोग से जब पवन को लेकर विवाद गर्म हो रहा था, तबी उन्होंने एक्स ने आसनसोल से चुनाव नहीं लड़ने की बात कही।
संदेशखाली मामले पर पीएम ने तृणमूल को घोरा था
इस बीच, हाल ही में तृणमूल के टिकट पर राज्यसभा के लिए विजयी सागरिका घोष भी इसमें शामिल हुईं। उन्होंने कहा, ''नहम हसीना बंगाल क्या है?'' आसनसोल से भाजपा उम्मीदवार के एक गाने के वीडियो में बंगाली महिलाओं को कमतर दर्शाया गया है। क्या हम ऐसे जन प्रतिनिधियों को चाहते हैं?'' प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार और शनिवार को संदेशखाली में महिलाओं से 'बलात्कार' को लेकर सत्तारूढ़ तृणमूल पर हमला बोला। उसके बाद पवन को उम्मीदवार घोषित कर तृणमूल ने महिलाओं के प्रति 'अपमान' का ही आरोप लगाया है।
क्या आरा से चुनाव लड़ना चाहते थे पवन सिंह
सूत्रों के मुताबिक यह भी पता चला है कि पवन सिहं भले ही आसनसोल से टिकट मिलने से खुश थे लेकिन उनकी पहली पसंद आरा थी। भाजपा सूत्रों के मुताबिक एक बार इस संबंध में पवन सिंह भाजपा के एक वरिष्ठ नेता से भी मिले थे। ताकि उनको आरा से टिकट मिल जाए, लेकिन भाजपा ने आरा से उनको टिकट नहीं दिया। आसनसोल के कई भाजपा नेता भी उनके इस निर्णय से कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं हैं। किसी को कुछ समझ ही नहीं आ रहा है कि आखिर पवन सिंह ने इस तरह की घोषणा क्यों और किन परिस्थितियों में की।
तरीका यह ठीक नहीं, उच्च नेतृत्व से मिलना चाहिए था
पश्चिम बंगाल के एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, अगर पवन सिंह को चुनाव नहीं लड़ना था तो उसके लिए उनको भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से बात करनी चाहिए थी। जिस तरह से उन्होंने सोशल मीडिया में यह बात जाहिर की, इससे कोई भी नेता कुछ बोलने की स्थिति में ही नहीं है। पार्टी नेतृत्व ने जब पवन सिंह पर इतना भरोसा किया। अगर उनको चुनाव नहीं लड़ना था, उम्मीदवार नहीं बनना था, तो वे पार्टी की केंद्रीय नेतृत्व से जाकर मिल कर अपनी बात कहते। सलाह-मशविरा होता। इस तरह से सोशल मीडिया पर घोषणा ठीक नहीं है।