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BJP Strategy: वोट के दम पर टिकट, मोदी-शाह युग में मुसलमानों पर बदली भाजपा की रणनीति

Sun, 31 Mar 2024 06:14 AM IST
जलज मिश्रा हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Sun, 31 Mar 2024 06:14 AM IST
सार

भाजपा का संकेत साफ है...मुस्लिमों में पैठ बनाने के लिए पार्टी दशकों से चली आ रही प्रतीकात्मक राजनीति का सहारा नहीं लेगी। इस वर्ग को उन मुश्किल सीटों पर अपनी प्रासंगिकता साबित करनी होगी, जहां उनके वोट निर्णायक स्थिति में हैं। भाजपा ने प्रभाव वाले राज्यों में मुसलमानों पर दांव लगाने से परहेज बरतने का स्पष्ट संदेश दिया है।

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BJP strategy on Muslims changed in Modi-Shah era Lok sabha election 2024
PM Modi, Amit Shah - फोटो : Social Media

विस्तार

आम चुनाव के लिए भाजपा अब तक 405 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है, लेकिन केरल की मल्लपुरम ही एकमात्र ऐसी सीट है, जहां से पार्टी ने मुस्लिम उम्मीदवार अब्दुल सलाम को उतारा है। कभी पार्टी का मुस्लिम चेहरा रहे शाहनवाज हुसैन, मुख्तार अब्बास नकवी जैसे नेताओं को उम्मीदवारों की सूची में जगह नहीं मिली है। वह भी तब, जब देश की 65 सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की भागीदारी 30 से 65 फीसदी, तो करीब 35 सीटों पर प्रभावशाली उपस्थिति है।

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दरअसल, बीते एक दशक में पार्टी में मोदी-शाह युग की शुरुआत के बाद मुसलमानों के संदर्भ में भाजपा की रणनीति में बड़ा बदलाव आया है। पार्टी अब वोट की कीमत पर ही इस समुदाय को टिकट देना चाहती है। दो साल पूर्व जब हैदराबाद में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पीएम नरेंद्र मोदी ने पसमांदा मुसलमानों तक पहुंच बनाने का आह्वान किया, तब एकबारगी लगा कि इस बार पार्टी प्रभाव वाले राज्यों में इस वर्ग को मौका देगी। इस आह्वान के बाद पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ ने इस वर्ग में पहुंच के लिए बिहार, उत्तर प्रदेश में भाईचारा, सूफी सम्मेलन सहित कई कार्यक्रमों का आयोजन किया था। इस दौरान जब करीब 18 लाख मोदी मित्र बनाए गए, तब उम्मीदवारी में मुसलमानों को मौका मिलने की धारणा को मजबूती मिली थी।

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कोशिश तो खूब हुई, पर नहीं बनी मजबूत पैठ
साल 1980 में स्थापना के बाद पार्टी ने मुस्लिम वर्ग के कई चेहरों को महत्व देकर इस वर्ग में पैठ बनाने की कोशिश की। इस वर्ग के नेताओं को बार-बार राज्यसभा और सत्ता मिलने पर सरकार में मौका दिया गया। बावजूद इसके पार्टी इन नेताओं के जरिए इस वर्ग में अपनी पैठ मजबूत करने में नाकाम रही। यहां तक कि साल 2014 में जब मोदी सरकार सत्ता में आई, तब पहली बार पार्टी ने इस समुदाय के दो नेताओं एमजे अकबर और नजमा हेपतुल्ला को मंत्रिमंडल में जगह दी। हालांकि पार्टी के सात मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीतने में असफल रहे थे।

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2019 में पहली बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में शून्य प्रतिनिधित्व
साल 2019 के आम चुनाव में भी पार्टी ने मुस्लिम बिरादरी को छह टिकट दिए। सभी उम्मीदवारों की हार के बाद मुख्तार अब्बास नकवी को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। हालांकि, बदली रणनीति का अहसास तब हुआ, जब नकवी को राज्यसभा का नया कार्यकाल नहीं मिलने पर आजाद भारत में पहली बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में मुसलमानों का प्रतिनिधित्व शून्य हो गया।

नई रणनीति...नया नेतृत्व उभारने पर जोर  
राज्यसभा-लोकसभा के टिकट के सहारे उपकृत कर मुसलमानों में पैठ बनाने की नीति पीछे छूट चुकी है। भाजपा शहरी निकाय, पंचायत चुनावों में इस वर्ग को मौका देकर नया नेतृत्व खड़ा करना चाहती है। वह इस वर्ग के ऐसे चेहरों को साधना चाहती है, जो मुलसमानों में पार्टी के प्रति फैले भ्रम को दूर कर सकें। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व वीसी तारिक मंसूर, आरिफ मो. खान, शहजाद पूनावाला, जफरुल इस्लाम को साधना इसी रणनीति का हिस्सा है।

भाजपा में मुस्लिम चेहरे
भाजपा में मुस्लिम चेहरों की बात करें तो नई दिल्ली में सिकंदर बख्त जनता पार्टी के टिकट पर एक बार चांदनी चौक से लोकसभा चुनाव जीते। उन्हें कई बार राज्यसभा भेजा गया। बख्त राज्यसभा में पार्टी के नेता भी रहे थे। आरिफ बेग 1977 व 1989 में आम चुनाव जीते। कई बार राज्यसभा सदस्य और मंत्री रहे मुख्तार अब्बास नकवी बस एक बार लोकसभा चुनाव जीते। शाहनवाज हुसैन इकलौते मुस्लिम चेहरा हैं, जिन्होंने तीन बार लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की है। भाजपा के सत्ता में आने पर बख्त, शाहनवाज और नकवी कई बार मंत्री भी बने। एमजे अकबर व नजमा हेपतुल्ला भी मंत्रिमंडल में रह चुके हैं।

पैटर्न समझें
भाजपा ने 2019 में 6 और 2014 में 7 मुस्लिमों को टिकट दिया...पर एक भी टिकट यूपी, बिहार या पार्टी के प्रभाव वाले राज्यों में नहीं दिए गए। ज्यादातर प. बंगाल, जम्मू-कश्मीर और लक्षद्वीप से मुस्लिम उम्मीदवार उतारे, क्योंकि यहां इस समुदाय के वोट निर्णायक हैं। संकेत साफ है, भाजपा में आने के लिए अब समुदाय के नेताओं को अपने समुदाय में पैठ साबित करनी होगी।

100 सीटों पर मुस्लिमों का व्यापक असर

  • 65 सीटों पर 30 से 65 फीसदी मुस्लिम आबादी
  • 14 सीटें यूपी की तो 13 सीटें पश्चिम बंगाल की
  • 8 केरल, 7 असम, 5 जम्मू-कश्मीर, 4 बिहार, 3 मध्य प्रदेश,  दिल्ली, गोवा, हरियाणा, महाराष्ट्र, तेलंगाना की 2-2 और तमिलनाडु की एक सीट।

 

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