Lok Sabha Polls 2024: क्या बागी बढ़ा सकते हैं भाजपा की मुसीबत? घाटे का आकलन करने में जुटे शीर्ष रणनीतिकार
भाजपा ने अब तक जितने प्रत्याशियों की घोषणा की है, उनमें 2019 में जीते 101 (पहली में 33, दूसरी में 30, पांचवी में 37 और छठवीं सूची में एक) सांसदों के टिकट काट चुकी है। यह संख्या 2019 के मुकाबले 34 फीसदी है।
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पीलीभीत से कौन जीतेगा? वरुण गांधी को भाजपा ने प्रत्याशी नहीं बनाया और कांग्रेस से भाजपा में आए जितिन प्रसाद के साथ वरुण बड़े अनमने मन से खड़े हुए। कर्नाटक के पूर्व डिप्टी सीएम केएस ईश्वरप्पा बागी हो गए। पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के बेटे बीवाई राघवेंद्र को ही चुनाव में चुनौती दे दी है। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनके समर्थकों को अभी भी भाजपा के राष्ट्रीय रणनीतिकारों के निर्णय हजम नहीं हो रहे हैं। इसी तरह राजस्थान के चुरू के भाजपा नेता कहते हैं कि सब ठीक है, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे चुनाव प्रचार से दूर हैं। क्या इन सबका कुछ असर पड़ेगा?
दरअसल, भाजपा ने अब तक जितने प्रत्याशियों की घोषणा की है, उनमें 2019 में जीते 101 (पहली में 33, दूसरी में 30, पांचवी में 37 और छठवीं सूची में एक) सांसदों के टिकट काट चुकी है। यह संख्या 2019 के मुकाबले 34 फीसदी है। भाजपा ने महाराष्ट्र से लेकर कई राज्यों में चौकाने वाले निर्णय लिए हैं। संघ के नेता सुरेश शर्मा कहते हैं कि सब ठीक है, लेकिन इस बार बाहर से आए नेताओं को थोड़ा ज्यादा महत्व मिल गया है। फिर भी सरकार तो प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ही बनेगी।
भाजपा कैडर आधारित पार्टी, चिंता की बात नहीं
भाजपा मुख्यालय के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि यह राष्ट्रीय स्वयं सेवक की पाठशाला से निकली पार्टी है। हमारा कार्यकर्ता कांग्रेस और दूसरे दलों से अलग है। लेकिन वाराणसी क्षेत्र के भाजपा के एक नेता के मुताबिक जौनपुर की लोकसभा सीट पर कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है। भाजपा ने कृपा शंकर सिंह को प्रत्याशी बनाया। कृपाशंकर सिंह महाराष्ट्र के पूर्व गृहराज्यमंत्री और कांग्रेसी नेता थे। जौनपुर में टिकट के मुख्य दावेदारों में ज्ञान प्रकाश सिंह और अभिषेक सिंह थे। बाहुबली नेता धनंजय सिंह भी चुनाव मैदान में आने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वह रंगदारी, धमकी आदि से जुड़े मामले में अदालत द्वारा सुनायी गई सात साल की सजा के चलते जेल में हैं। उनकी पत्नी श्रीकला धनंजय सिंह बसपा से चुनाव मैदान में हैं। सपा ने पूर्व बसपा के नेता बाबू सिंह कुशवाहा को मैदान में उतारा है। जौनपुर के तमाम भाजपा नेता कहते हैं कि कृपाशंकर सिंह मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
असर पड़ेगा या नहीं?
उत्तर प्रदेश की राजनीति पर गहरी पकड़ रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार श्याम नारायण पांडे कहते हैं कि पूर्वी उत्तर प्रदेश की आधा दर्जन सीटों पर भाजपा केवल कृपाशंकर टाइप के प्रत्याशियों के चलते संकट में है। प्रयागराज क्षेत्र से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से भाजपा में आए ज्ञानेश्वर का भी कहना है कि इस बार के लोकसभा चुनाव में बाहर (दूसरे दल) के प्रत्याशी ज्यादा हैं, लेकिन हमारे कार्यकर्ता पार्टी को बड़ी जीत दिलाएंगे। दिल्ली क्षेत्र के सुरेश शर्मा ने 48 साल से संघ कार्यकर्ता के रूप में सेवा की है।
सुरेश शर्मा कहते हैं कि बाहर के लोगों को भाजपा ने मौका दिया है, लेकिन संघ का जमीनी जनाधार मजबूत है। भाजपा में समय रहते लोगों की नाराजगी दूर कर ली जाती है। आप 2019 के चुनाव को देखिए। तब 119 के सांसदों के टिकट कटे थे और 2014 की तुलना में अधिक सीटें भाजपा जीती थीं। भोपाल में शिवेंद्र कटियार हैं। शिवेंद्र मध्यप्रदेश में लोकसभा चुनाव-2024 के लिए एक चुनाव सर्वे करने वाली एजेंसी के लिए काम कर रहे हैं। शिवेंद्र विधानसभा चुनाव में भी मध्यप्रदेश में काम कर चुके हैं। शिवेंद्र का कहना है कि विधानसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के समर्थकों ने जो सक्रियता दिखाई थी, वह अभी नहीं नजर आ रही है। शिवेंद्र के मुताबिक दर्जन भर से अधिक सीटों पर कांटे का मुकाबला है। हालांकि वह कहते हैं कि मध्यप्रदेश में भाजपा का संगठन बहुत मजबूत है।
कर्नाटक में बागी हुए ईश्वरप्पा को भाजपा ने दिखाया बाहर का रास्ता
केएस ईश्वरप्पा भाजपा के वरिष्ठ दिग्गज नेता थे। पार्टी ने छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। कारण यह रहा कि ईश्वरप्पा अपने बेटे को हावेरी सीट से लोकसभा चुनाव लड़ाना चाहते थे। लेकिन टिकट नहीं मिला। इसके बाद ईश्वरप्पा ने शिवमोगा से चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी। उन्हें चुनाव चिन्ह गन्ना मिला है। इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के बेटे बीवीई राघवेंद्र चुनाव लड़ रहे हैं। कर्नाटक भाजपा येदियुरप्पा के प्रभाव से मुक्त नहीं हो पाई है। लिहाजा ईश्वरप्पा को बागी हुए और उन्हें भाजपा ने बाहर का रास्ता दिखा दिया। असर तो पड़ेगा। कांग्रेस के नेता बीके हरिप्रसाद कहते हैं कि सिरफुटौव्वल उनके (भाजपा) यहां है। कांग्रेस दमदारी से लड़ रही है। कर्नाटक में लोकसभा की 28 सीटे हैं। 2019 में भाजपा को 25 सीटों पर सफलता मिली थी। इस बार 25 में 12 सांसदों के टिकट काट दिए हैं। कर्नाटक कांग्रेस के नेता का कहना है कि ईस बार कम से कम 15 सीटें कांग्रेस जीतेगी।
राजस्थान में महारानी वसुंधरा राजे इतनी शांत क्यों हैं?
खबर है विधानसभा चुनाव में प्रचार करने वाली पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे प्रचार के लिए नहीं निकल रही हैं। चुरू से 2019 में सांसद चुने गए राहुल कस्वां कांग्रेसी हो चुके हैं। प्रह्लाद गुंजल भी कांग्रेसी बन चुके हैं। वसुंधरा भी पुत्र दुष्यंत के चुनाव प्रचार अभियान तक की खुद को समेट रही हैं। झालवाड़ के बाहर उन्हें नहीं देखा जा रहा है। वह अपने गृह क्षेत्र धौलपुर-करौली में भी नहीं देखी गईं। 2024 में उनके खेमे के कई सांसदों (मनोज राजोरिया, राहुल कास्वां, राम चरण बोहरा, निहाल चंद मेघवाल आदि) को टिकट नहीं मिले हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि इस खामोशी का असर राजस्थान की बाडमेर, दौरा, चुरू, समेत तमाम क्षेत्र की सीटों पर पड़ सकता है। वसुंधरा के एक समर्थक नेता तो कहते हैं कि 7-9 सीटों पर पूर्व मुख्यमंत्री के प्रचार के लिए न निकलने के कारण भाजपा को कुछ झटका लग सकता है। सूत्र का कहना है कि मानवेंद्र सिंह (पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. जसवंत सिंह के बेटे और वसुंधरा विरोधी खेमे के नेता) अपनी ही सीट जीत लें, तो बड़ी बात है।