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'सिंह मेंशन' की कहानी: जहां एक भाई की हत्या के आरोप में दूसरा जेल में, दोनों की पत्नियां हैं चुनावी मैदान में

Tue, 29 Oct 2024 09:15 AM IST
शिवेंद्र तिवारी स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Tue, 29 Oct 2024 09:15 AM IST
सार

Jharia: झारखंड के धनबाद जिले की झरिया विधानसभा सीट का मुकाबला एक बार फिर से जेठानी-देवरानी के बीच होना है। कोयलांचल की झरिया सीट धनबाद के सबसे पावरफुल सियासी खानदान सूर्यदेव सिंह के परिवार की दो बहुएं आमने-सामने हैं। 

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Jharia seat of Jharkhand and politics of Singh Mansion news in hindi
झरिया सीट पर सिंह मेंशन की दो बहुओं की सियासी जंग - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

झारखंड में इन दिनों सियासी तापमान अपने चरम पर है। तमाम सीटों पर पार्टियों के उम्मीदवार तय हो चुके हैं। इस चुनाव में सबसे चर्चित विधानसभा सीटों की बात की जाए तो उसमें धनबाद जिले की झरिया विधानसभा की चर्चा जरूर होती है। झरिया विधानसभा सीट पर पिछले लगभग चार दशकों से मजदूर नेता सूर्यदेव सिंह के परिवार का कब्जा रहा है जिसे सिंह मेंशन के नाम से जाना जाता है। कोयलांचल की झरिया सीट पर एक ही परिवार की दो बहुओं की चुनावी जंग है।
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आइये जानते हैं कि झरिया सीट का चुनावी इतिहास क्या है? यहां सिंह मेंशन की राजनीति कैसी रही है? पिछली बार के नतीजे कैसे थे? अबकी बार कैसे समीकरण हैं?
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Jharia seat of Jharkhand and politics of Singh Mansion news in hindi
झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 - फोटो : Amar Ujala
झरिया सीट के बारे में
यह सीट झारखंड के कोयलांचल में धनबाद जिले में पड़ती है। झरिया निर्वाचन क्षेत्र में 20 नवंबर को दूसरे चरण में मतदान कराया जाएगा। यहां राजपूत और मुस्लिम मतदाताओं का वर्चस्व है। मुस्लिम और राजपूतों के साथ-साथ ओबीसी वोट भी इस सीट पर बड़ा प्रभाव डालते हैं। कोयला खनन झरिया की आर्थिक स्थिति में एक प्रमुख भूमिका निभाता है क्योंकि आधी आबादी इस पर निर्भर करती है और प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोयला व्यवसायों में जुड़ी हुई है। 

सिंह मेंशन की कहानी
जाने-माने मजदूर नेता सूर्यदेव सिंह ने सिंह मेंशन को बनवाया था। सूर्यदेव सिंह के राजनीति में आने की दिलचस्प कहानी है। यह कहानी 1950 के दशक से शुरू होती है जब सूर्यदेव सिंह उत्तर प्रदेश के बलिया से नौकरी की तलाश में धनबाद आए। यहां आकर वह कोयला क्षेत्र से जुड़े नेता बीपी सिन्हा के अधीन काम करने लगे। सिन्हा की हत्या के बाद सूर्यदेव सिंह का मालिक के कारोबार पर नियंत्रण हो गया और कोयला क्षेत्रों के डॉन बन गए। 1977 से इस हवेली ने धनबाद और आसपास के इलाकों की पूरी राजनीति को नियंत्रित किया। 

सूर्यदेव सिंह की उभरती ताकत को कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुमार ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया, 'सिंह मेंशन 1977 के बाद सत्ता का केंद्र बन गया, जब सूर्यदेव सिंह पहली बार झरिया विधानसभा सीट से विधायक चुने गए। सूर्यदेव सिंह को अपने द्वारा बनाए गए मजदूर संघ का समर्थन हासिल था। बाद में उन्होंने बाजार और सियासत को नियंत्रित करना शुरू कर दिया क्योंकि वे 1991 में अपनी मृत्यु तक विधायक बने रहे। उनके समय में इस इलाके के लिए सिंह मेंशन सत्ता का दूसरा नाम बन गया था। 1977-1991 की अवधि के दौरान सिंह मेंशन ने न केवल खुद को सियासत में स्थापित किया, बल्कि इसने लगभग हर चीज पर नियंत्रण कर लिया। सूर्यदेव सिंह का प्रभाव इतना था कि उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को भी अपने दरवाजे पर ला खड़ा किया। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के साथ उनके अच्छे संबंध माने जाते थे। वे दोनों उत्तर प्रदेश के एक ही जिले बलिया के थे।'

इस शक्तिशाली परिवार को अंदरूनी कलह का भी सामना करना पड़ा। यह कलह मुख्य वजह बन गई जिसके कारण सिंह मेंशन का धनबाद में प्रभाव अलग-अलग केंद्रों में बंट गया। अब धनबाद में तीन शक्ति केंद्र बन चुके हैं - सिंह मेंशन, कुंती निवास और रघुकुल। 
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सिंह मेंशन की सियासत 
1991 में सूर्यदेव सिंह की मृत्यु के बाद उनके भाई ने 1999 में विधानसभा चुनाव लड़ा और जीता। बाद में उनकी पत्नी कुंती देवी उसी सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक बनीं। कुंती 2005 और 2009 में दो बार निर्वाचित हुईं। सियासी विरासत को उनके बेटे संजीव सिंह ने आगे बढ़ाया। 2014 के विधानसभा चुनाव में भाजपा नेता संजीव सिंह झरिया से विधानसभा चुनाव जीते। संजीव ने चचेरे भाई और झरिया के डिप्टी मेयर नीरज को हराया। हालांकि, 2017 में नीरज सिंह की हत्या कर दी गई। नीरज के चचेरे भाई और तब के झरिया विधायक संजीव पर हत्या का आरोप लगा। संजीव सिंह अपने चचेरे भाई नीरज की हत्या के आरोप में जेल में बंद हैं।

Jharia seat of Jharkhand and politics of Singh Mansion news in hindi
झारखंड विधानसभा चुनाव - फोटो : AMAR UJALA
दूसरी बार देवरानी-जेठानी आमने-सामने 
2019 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने सूर्यदेव सिंह के भाई राजन सिंह के बेटे स्वर्गीय नीरज सिंह की पत्नी पूर्णिमा नीरज सिंह को टिकट दिया। वहीं भाजपा ने उनकी देवरानी रागिनी सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया था। नतीजा पूर्णिमा सिंह के पक्ष में रहा और उन्होंने यह चुनाव 12,054 वोट से जीत लिया। पिछले विधानसभा चुनाव के बाद इस चुनाव में भी देवरानी-जेठानी पूर्णिमा सिंह और रागिनी सिंह फिर एक दूसरे के खिलाफ मैदान में हैं। वर्तमान में पूर्णिमा सिंह झरिया से कांग्रेस की विधायक हैं। 

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