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Wazirpur Assembly Seat: आप लगाएगी जीत की हैट्रिक या किसी और को चुनेगी वजीरपुर की जनता, जानें इस सीट का इतिहास

Sat, 25 Jan 2025 07:30 PM IST
संध्या कुमारी इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या कुमारी Updated Sat, 25 Jan 2025 07:30 PM IST
सार

Wazirpur Seat: दिल्ली विधानसभा की वजीरपुर सीट पर 2020 में आप को जीत मिली थी। इस चुनाव में आप ने मौजूदा विधायक राजेश गुप्ता को टिकट दिया है। कांग्रेस से रागिनी नायक तो भाजपा ने पूनम शर्मा को मैदान में उतारा है। 

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Delhi Assembly Election 2025 wazirpur Assembly Seat Profile and History News In Hindi
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासत तेज होती जा रही है। सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। पार्टियों ने वादों का पिटारा खोल दिया है। पिछले चुनाव में दिल्ली में सबसे ज्यादा 62 सीटों पर आम आदमी पार्टी को जीत मिली थी। आठ सीटें भाजपा के खाते में गई थीं। दिल्ली की 70 सीटों में वजीरपुर सीट भी शामिल है। 2020 में इस सीट पर आम आदमी पार्टी को जीत मिली थी। 

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दिल्ली विधानसभा चुनाव के इतिहास में वजीरपुर  में कब कौन जीता? कब कितने वोट पड़े? पिछले चुनाव में कैसे नतीजे रहे थे? इस बार कैसा मुकाबला हो सकता है? आइये जानते हैं…

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दिल्ली को विधानसभा मिलने की ऐसी है कहानी
दिल्ली को विधानसभा कैसे मिली, इसकी कहानी 1952 से शुरू हुई। 1952 पार्ट-सी राज्य के रूप में दिल्ली को एक विधानसभा दी गई। 1956 में उस विधानसभा को भंग कर दिया गया। 1966 में दिल्ली को एक महानगर परिषद दी गई। 

दिल्ली राज्य विधानसभा 17 मार्च 1952 को पार्ट-सी राज्य सरकार अधिनियम, 1951 के तहत अस्तित्व में आई। 1952 की विधानसभा में 48 सदस्य थे। मुख्य आयुक्त को उनके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद का प्रावधान था, जिसके संबंध में राज्य विधानसभा को कानून बनाने की शक्ति दी गई थी। 

राज्य पुनर्गठन आयोग (1955) की सिफारिशों के बाद दिल्ली 1 नवंबर 1956 से भाग-सी राज्य नहीं रही। दिल्ली विधानसभा और मंत्रिपरिषद को समाप्त कर दिया गया और दिल्ली राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष प्रशासन के तहत केंद्र शासित प्रदेश बन गया। दिल्ली में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था और उत्तरदायी प्रशासन की मांग उठने लगी। इसके बाद दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 के तहत महानगर परिषद बनाई गई। यह एक सदनीय लोकतांत्रिक निकाय था जिसमें 56 निर्वाचित सदस्य और 5 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे।

इसके बाद भी विधानसभा की मांग उठती रही। 24 दिसंबर 1987 को भारत सरकार ने सरकारिया समिति (जिसे बाद में बालकृष्णन समिति कहा गया) नियुक्त की। समिति ने 14 दिसंबर 1989 को अपनी रिपोर्ट पेश की और सिफारिश की कि दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बना रहना चाहिए, लेकिन आम आदमी से जुड़े मामलों से निपटने के लिए अच्छी शक्तियों के साथ एक विधानसभा दी जानी चाहिए। बालाकृष्णन समिति की सिफारिश के अनुसार, संसद ने संविधान (69वां संशोधन) अधिनियम, 1991 पारित किया, जिसने संविधान में नए अनुच्छेद 239AA और 239AB डाले, जो अन्य बातों के साथ-साथ दिल्ली के लिए एक विधानसभा की व्यवस्था करते हैं। लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के मुद्दों पर विधानसभा को कानून बनाने का अधिकार नहीं था। 1992 में परिसीमन के बाद 1993 में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव बाद दिल्ली को एक निर्वाचित विधानसभा और मुख्यमंत्री मिला। 



 
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1993: वजीरपुर में पहली जीत-हार में महज 479 वोट का था अंतर  
दिल्ली के विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद 1993 में विधानसभा के चुनाव हुए। 1993 में इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर थी। कांटे के मुकाबले में कांग्रेस के दीप चंद बंधु ने भाजपा के मांगे राम गर्ग को महज 479 वोट से हरा दिया। दीप चंद बंधु को 26,150 वोट मिले। वहीं, मांगे राम गर्ग को 25,671 वोट से संतोष करना पड़ा।

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1998: कांग्रेस को मिली लगातार दूसरी जीत  
साल 1998 में भी मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही हुआ। यहां से कांग्रेस के मौजूदा विधायक बंधु दीप चंद ने भाजपा के श्याम लाल गर्ग को 14,878 वोट से हरा दिया। बंधु दीप चंद को 36,010 वोट मिले। भाजपा के श्याम लाल गर्ग को 21,132 वोट मिले। अन्य आठ उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। 

Delhi Assembly Election 2025 wazirpur Assembly Seat Profile and History News In Hindi
दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

2003: भाजपा की सीट पर पहली जीत    
साल 2003 में हुए विधानसभा चुनाव में वजीरपुर सीट पर नतीजा बदल गया। इस चुनाव में भाजपा के मांगे राम गर्ग ने पार्टी को पहली बार यहां से जीत दिलाई। मांगे राम गर्ग ने कांग्रेस के रतन चंद जैन को 2507 वोट से हरा दिया। मांगे राम गर्ग को 27,052 वोट मिले। वहीं, रतन चंद जैन को 24,545 वोट से संतोष करना पड़ा। 

2008: कांग्रेस ने फिर की वापसी
साल 2008 के विधानसभा चुनाव में वजीरपुर सीट पर एक बार फिर कांग्रेस ने वापसी की। कांग्रेस के हरि शंकर गुप्ता ने भाजपा के मांगे राम गर्ग को 3,140 वोट से हरा दिया।  हरि शंकर गुप्ता को 39,977 वोट मिले। वहीं, भाजपा उम्मीदवार मांगे राम गर्ग को 36,837 वोट से संतोष करना पड़ा। 

2013: भाजपा ने फिर दर्ज की जीत 
दिल्ली की राजनीति के लिए साल 2013 एक अहम कड़ी साबित हुआ। इस चुनाव में मुकाबले में कांग्रेस-भाजपा के अलावा भ्रष्टाचार आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी भी थी। वजीरपुर  विधानसभा सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प रहा। इस चुनाव में आप और भाजपा के बीच टक्कर देखने को मिली। भाजपा के डॉ. महेन्द्र नागपाल ने आप के प्रवीण कुमार को 5,574 वोट से हरा दिया था। महेंद्र नागपाल को 37,306 वोट मिले। वहीं, आम आदमी पार्टी के प्रवीण कुमार को 31,732 वोट से संतोष करना पड़ा। 

 

 

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दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

2015: आप को मिली पहली जीत
2015 में फिर से दिल्ली में विधानसभा चुनाव करवाने पड़े। 2014 में मात्र 49 दिन सरकार चलाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था। फरवरी 2014 में जब लोकपाल विधेयक पारित नहीं हो पाया तो अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। 2015 में फिर से चुनाव कराए गए और केजरीवाल ने 70 में से 67 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की। 
इस चुनाव में वजीरपुर सीट आप के राजेश गुप्ता ने भाजपा के मौजूदा विधायक डॉ. महेन्द्र नागपाल को 22,044 वोट से हरा दिया। आप उम्मीदवार को 61,208 वोट मिले। वहीं, भाजपा उम्मीदवार को 39,164 वोट मिले थे।

2020: आप ने दर्ज की लगातार दूसरी जीत
2020 के विधानसभा चुनाव में आप आदमी पार्टी ने फिर जबरदस्त जनादेश हासिल किया। आप को 70 में से कुल 62 सीटों पर जीत मिली। वजीरपुर की बात करें तो इस सीट पर नतीजों में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला। आप के राजेश गुप्ता ने भाजपा के डॉ. महेंद्र नागपाल को 11,690 वोट से हरा दिया। आप उम्मीदवार को 57,331 वोट मिले। वहीं, भाजपा उम्मीदवार को 45,641 वोट मिले थे। 

अबकी बार कैसे हैं समीकरण? 
2025 के विधानसभा चुनाव में आप ने वजीरपुर सीट से मौजूदा विधायक राजेश गुप्ता को ही उतारा है। भाजपा ने पूनम शर्मा और कांग्रेस ने रागिनी नायक को टिकट दिया है। इस सीट पर कुल नौ उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।   

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