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Vikaspuri Assembly Seat: आप लगाएगी जीत का चौका या किसी और को चुनेगी विकासपुरी की जनता, जानें चुनावी इतिहास

Mon, 03 Feb 2025 01:44 PM IST
संध्या कुमारी इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या कुमारी Updated Mon, 03 Feb 2025 01:44 PM IST
सार

Vikaspuri Seat: विकासपुरी सीट से आप ने मौजूदा विधायक महेंद्र यादव को टिकट दिया है। भाजपा ने पंकज कुमार सिंह और कांग्रेस ने जितेंद्र सोलंकी को उम्मीदवार बनाया है। आइये जानते हैं इस सीट का चुनावी इतिहास…

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Delhi Assembly Election 2025 vikaspuri Assembly Seat Profile and History News In Hindi
दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में विकास पुरी सीट भी शामिल है। इस सीट पश्चिमी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र के अंदर आती है। इस सीट पर इस बार कुल 464344 मतदाता वोट डालने के लिए पात्र हैं। इनमें से 248350 पुरुष और 215940 महिलाएं हैं बाकि 54 अन्य मतदाता है। वर्तमान में यहां से आप के महेंद्र यादव विधायक हैं। इस बार भी आप ने यहां से महेंद्र यादव को ही टिकट दिया है। 2008 में ये सीट अस्तित्व में आई थी। 

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दिल्ली विधानसभा चुनाव के इतिहास में विकासपुरी  में कब कौन जीता? कब कितने वोट पड़े? पिछले चुनाव में कैसे नतीजे रहे थे? इस बार कैसा मुकाबला हो सकता है? आइये जानते हैं…

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दिल्ली को विधानसभा मिलने की ऐसी है कहानी
दिल्ली को विधानसभा कैसे मिली, इसकी कहानी 1952 से शुरू हुई। 1952 पार्ट-सी राज्य के रूप में दिल्ली को एक विधानसभा दी गई। 1956 में उस विधानसभा को भंग कर दिया गया। 1966 में दिल्ली को एक महानगर परिषद दी गई। 

दिल्ली राज्य विधानसभा 17 मार्च 1952 को पार्ट-सी राज्य सरकार अधिनियम, 1951 के तहत अस्तित्व में आई। 1952 की विधानसभा में 48 सदस्य थे। मुख्य आयुक्त को उनके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद का प्रावधान था, जिसके संबंध में राज्य विधानसभा को कानून बनाने की शक्ति दी गई थी। 

राज्य पुनर्गठन आयोग (1955) की सिफारिशों के बाद दिल्ली 1 नवंबर 1956 से भाग-सी राज्य नहीं रही। दिल्ली विधानसभा और मंत्रिपरिषद को समाप्त कर दिया गया और दिल्ली राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष प्रशासन के तहत केंद्र शासित प्रदेश बन गया। दिल्ली में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था और उत्तरदायी प्रशासन की मांग उठने लगी। इसके बाद दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 के तहत महानगर परिषद बनाई गई। यह एक सदनीय लोकतांत्रिक निकाय था जिसमें 56 निर्वाचित सदस्य और 5 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे।

इसके बाद भी विधानसभा की मांग उठती रही। 24 दिसंबर 1987 को भारत सरकार ने सरकारिया समिति (जिसे बाद में बालकृष्णन समिति कहा गया) नियुक्त की। समिति ने 14 दिसंबर 1989 को अपनी रिपोर्ट पेश की और सिफारिश की कि दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बना रहना चाहिए, लेकिन आम आदमी से जुड़े मामलों से निपटने के लिए अच्छी शक्तियों के साथ एक विधानसभा दी जानी चाहिए। बालाकृष्णन समिति की सिफारिश के अनुसार, संसद ने संविधान (69वां संशोधन) अधिनियम, 1991 पारित किया, जिसने संविधान में नए अनुच्छेद 239AA और 239AB डाले, जो अन्य बातों के साथ-साथ दिल्ली के लिए एक विधानसभा की व्यवस्था करते हैं। लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के मुद्दों पर विधानसभा को कानून बनाने का अधिकार नहीं था। 1992 में परिसीमन के बाद 1993 में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव बाद दिल्ली को एक निर्वाचित विधानसभा और मुख्यमंत्री मिला। 

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2008 में कांग्रेस को मिली जीत
2008 में यह सीट अस्तित्व में आई। यहां पहली बार हुए चुनावों में कांग्रेस को जीत मिली। इस सीट पर कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला देखने को मिला। कांग्रेस के नंदकिशोर ने भाजपा के कृष्ण गहलोत को बेहद करीबी मुकाबले में 943 वोट से हरा दिया। 

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दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

2013: आप की जीत
दिल्ली की राजनीति के लिए साल 2013 एक अहम कड़ी साबित हुआ। इस चुनाव में मुकाबला करने के लिए कांग्रेस, भाजपा और भ्राष्टाचार के आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी भी थी। इस बार मुकाबला भाजपा और आप के बीच देखने को मिला। आप के महेंद्र यादव ने भाजपा के कृष्ण गहलोत को केवल 405 वोट से हराया। कांग्रेस के टिकट पर उतरे नंद किशोर तीसरे स्थान पर रहे। 

2015: आप को मिली दूसरी जीत
2015 में फिर से दिल्ली में विधानसभा चुनाव करवाने पड़े। 2014 में मात्र 49 दिन सरकार चलाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था। फरवरी 2014 में जब लोकपाल विधेयक पारित नहीं हो पाया तो अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। 2015 में फिर से चुनाव कराए गए और केजरीवाल ने 70 में से 67 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की। 
इस चुनाव में विकासपुरी सीट आप के महेंद्र यादव ने भाजपा के संजय सिंह को 77,665 वोट से हरा दिया था। आप उम्मीदवार को 1,32,437 और भाजपा के संजय सिंह को 54,772 वोट मिले थे।

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दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

2020: आप ने लगाई जीत की हैट्रिक
2020 के विधानसभा चुनाव में आप आदमी पार्टी ने फिर जबरदस्त जनादेश हासिल किया। आप को 70 में से कुल 62 सीटों पर जीत मिली। इस सीट पर भी तीसरी बार आप को ही जीत मिली थी। आप के महेंद्र यादव ने एक बार फिर बड़े अंतर के साथ जीत दर्ज की। महेंद्र यादव ने भाजपा के संजय सिंह को 42,058 वोट के अंतर से हरा दिया। 

अबकी बार कैसे हैं समीकरण? 
इस चुनाव में विकासपुरी सीट से कुल 13 उम्मीदवार मैदान में हैं। 2020 में यहां से जीतने वाली आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर मौजूदा विधायक महेंद्र यादव को टिकट दिया है। भाजपा ने पंकज कुमार सिंह और कांग्रेस ने जितेंद्र सोलंकी को मैदान में उतारा है। 


 
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