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Tri Nagar Assembly Seat: तीन बार भाजपा तो दो-दो बार कांग्रेस और आप जीते, ऐसा है त्रिनगर का चुनावी इतिहास

Sat, 25 Jan 2025 06:01 AM IST
संध्या इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Sat, 25 Jan 2025 06:01 AM IST
सार

Tri Nagar Seat: दिल्ली की त्रिनगर विधानसभा सीट से इस बार आप ने मौजूदा विधायक प्रीति तोमर को टिकट दिया है। भाजपा के टिकट पर तिलक राम गुप्ता तो कांग्रेस के टिकट पर सतेन्द्र शर्मा मैदान में हैं। आइये जानते हैं इस सीट का चुनावी इतिहास...

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Delhi Assembly Election 2025 trinagar Assembly Seat Profile and History News In Hindi
दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली में विधानसभा चुनावों का ऐलान हो चुका है 5 फरवरी को चुनाव होने है और 8 फरवरी को नतीजे आएंगे। सभी पार्टियों में चुनाव को लेकर अब हलचल और ज्यादा तेज हो चुकी है। आज हम आपको त्रिनगर  विधानसभा सीट के चुनाव के इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं। अब तक इस सीट पर कुल सात बार चुनाव हो चुका है। त्रिनगर की जनता ने यहां से तीन बार भाजपा तो दो-दो बार कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को मौका दिया है।  

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दिल्ली विधानसभा चुनाव के इतिहास में त्रिनगर  में कब कौन जीता? कब कितने वोट पड़े? पिछले चुनाव में कैसे नतीजे रहे थे? इस बार कैसा मुकाबला हो सकता है? आइये जानते हैं…

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दिल्ली को विधानसभा मिलने की ऐसी है कहानी
दिल्ली को विधानसभा कैसे मिली, इसकी कहानी 1952 से शुरू हुई। 1952 पार्ट-सी राज्य के रूप में दिल्ली को एक विधानसभा दी गई। 1956 में उस विधानसभा को भंग कर दिया गया। 1966 में दिल्ली को एक महानगर परिषद दी गई। 

दिल्ली राज्य विधानसभा 17 मार्च 1952 को पार्ट-सी राज्य सरकार अधिनियम, 1951 के तहत अस्तित्व में आई। 1952 की विधानसभा में 48 सदस्य थे। मुख्य आयुक्त को उनके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद का प्रावधान था, जिसके संबंध में राज्य विधानसभा को कानून बनाने की शक्ति दी गई थी।

राज्य पुनर्गठन आयोग (1955) की सिफारिशों के बाद दिल्ली 1 नवंबर 1956 से भाग-सी राज्य नहीं रही। दिल्ली विधानसभा और मंत्रिपरिषद को समाप्त कर दिया गया और दिल्ली राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष प्रशासन के तहत केंद्र शासित प्रदेश बन गया। दिल्ली में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था और उत्तरदायी प्रशासन की मांग उठने लगी। इसके बाद दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 के तहत महानगर परिषद बनाई गई। यह एक सदनीय लोकतांत्रिक निकाय था जिसमें 56 निर्वाचित सदस्य और 5 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे।

इसके बाद भी विधानसभा की मांग उठती रही। 24 दिसंबर 1987 को भारत सरकार ने सरकारिया समिति (जिसे बाद में बालकृष्णन समिति कहा गया) नियुक्त की। समिति ने 14 दिसंबर 1989 को अपनी रिपोर्ट पेश की और सिफारिश की कि दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बना रहना चाहिए, लेकिन आम आदमी से जुड़े मामलों से निपटने के लिए अच्छी शक्तियों के साथ एक विधानसभा दी जानी चाहिए। बालाकृष्णन समिति की सिफारिश के अनुसार, संसद ने संविधान (69वां संशोधन) अधिनियम, 1991 पारित किया, जिसने संविधान में नए अनुच्छेद 239AA और 239AB डाले, जो अन्य बातों के साथ-साथ दिल्ली के लिए एक विधानसभा की व्यवस्था करते हैं। लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के मुद्दों पर विधानसभा को कानून बनाने का अधिकार नहीं था। 1992 में परिसीमन के बाद 1993 में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव बाद दिल्ली को एक निर्वाचित विधानसभा और मुख्यमंत्री मिला। 

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1993: पहले चुनाव में भाजपा को जीत
दिल्ली के विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद 1993 में विधानसभा के चुनाव हुए। 1993 में इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच टक्कर थी। भाजपा के नंद किशोर गर्ग ने कांग्रेस के दीप चंद शर्मा को 8673 वोट से हरा दिया। 

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1998: नंद किशोर गर्ग को मिली दूसरी जीत 
साल 1998 में भी मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही हुआ। भाजपा ने त्रिनगर सीट से 1993 में यहां से जीते नंद किशोर गर्ग को फिर से उतारा। वहीं, कांग्रेस ने चतर सिंह को टिकट दिया। भाजपा के नंद किशोर गर्ग ने एक बार फिर जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस के चत्तर सिंह को 2283 वोट से हरा दिया। 

Delhi Assembly Election 2025 trinagar Assembly Seat Profile and History News In Hindi
दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

2003: कांग्रेस के अनिल भारद्वाज की जीत 
2003 के विधानसभा चुनाव में त्रिनगर सीट पर नतीजे पलट गए। इस बार भाजपा को यहां से हार का सामना करना पड़ा। भाजपा ने एक बार फिर से नंद किशोर गर्ग को टिकट दिया था। गर्ग हैट्रिक नहीं लगा सके। उन्हें कांग्रेस के अनिल भरद्वाज से हार मिली। अनिल भारद्वाज ने नंद किशोर गर्ग को करीबी मुकाबले में 1969 वोट से हरा दिया। यह त्रिनगर विधानसभा सीट पर कांग्रेस की पहली जीत थी।   

2008: अनिल भारद्वाज दूसरी बार बने विधायक
2008 के विधानसभा चुनाव में त्रिनगर सीट पर कांग्रेस ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। इस बार कांग्रेस ने अपने मौजूदा विधायक अनिल भारद्वाज को ही मैदान में उतारा था। अनिल भारद्वाज ने भाजपा के नंद किशोर गर्ग को हरा दिया था। नंद किशोर गर्ग दूसरी बार इस सीट पर भाजपा के टिकट पर चुनाव हारे थे। भारद्वाज और गर्ग को छोड़कर अन्य सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। 

2013: भाजपा के नंद किशोर गर्ग की वापसी
दिल्ली की राजनीति के लिए साल 2013 एक अहम कड़ी साबित हुआ। इस चुनाव में मुकाबले में कांग्रेस-भाजपा के अलावा इस बार भ्रष्टाचार आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी भी थी। त्रिनगर  विधानसभा सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प रहा। यहां भाजपा ने नंद किशोर गर्ग पर ही विश्वास जताया था। इस बार नंद किशोर गर्ग ने जीत दर्ज करके अपनी पिछली दोनों हार का बदला ले लिया था। 2008 में यहां से जीते अनिल भारद्वाज इस बार तीसरे स्थान पर खिसक गए। आम आदमी पार्टी के जितेंद्र सिंह तोमर दूसरे स्थान पर रहे।  

2015: आप के जितेंद्र सिंह तोमर जीते 
2015 में फिर से दिल्ली में विधानसभा चुनाव करवाने पड़े। 2014 में मात्र 49 दिन सरकार चलाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था। फरवरी 2014 में जब लोकपाल विधेयक पारित नहीं हो पाया तो अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। 2015 में फिर से चुनाव कराए गए और केजरीवाल ने 70 में से 67 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की। 

इस चुनाव में त्रिनगर  सीट आप के जितेन्द्र सिंह तोमर ने भाजपा के उम्मीदवार नंद किशोर गर्ग को हरा दिया। तोमर ने भाजपा उम्मीदवार को 22,311 वोट से हराया। जितेन्द्र सिंह तोमर को 63,012 वोट मिले। वहीं, नंद किशोर गर्ग को 40,701 वोट मिले। इस जीत के बाद जितेन्द्र सिंह तोमर को दिल्ली सरकार में मंत्री पद भी मिला। वहीं, 2003 और 2008 में त्रिनगर से जीतने वाले अनिल भारद्वाज इस बार अपनी जमानत भी नहीं बचा सके।  

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दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

2020: आप की प्रीति तोमर जीती
2020 के विधानसभा चुनाव में आप आदमी पार्टी ने फिर जबरदस्त जनादेश हासिल किया। आप को 70 में से कुल 62 सीटों पर जीत मिली। त्रिनगर की बात करें तो इस सीट से आप ने जितेन्द्र सिंह तोमर की पत्नी प्रीति तोमर को मैदान में उतारा। आप के जितेन्द्र सिंह तोमर पर 2015 में ही धोखाधड़ी, जालसाजी और साजिश के आरोप में एफआईआर दर्ज होने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद आप ने त्रिनगर से उनकी पत्नी के टिकट दिया गया। प्रीति तोमर पति की सीट पर जीत दर्ज करने में सफल रहीं। उन्होंने भाजपा के तिलक राम गुप्ता को 10,751 वोटो से हरा दिया।

अबकी बार कैसे हैं समीकरण? 
2025 के चुनावों में आप ने यहां से मौजूदा विधायक प्रीति तोमर को ही उतारा है। भाजपा ने यहां से तिलक राम गुप्ता को फिर से टिकट दिया है। कांग्रेस ने यहां से सतेन्द्र शर्मा को टिकट दिया है। इस चुनाव में त्रिनगर सीट से कुल छह उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं।  

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