Tilak Nagar Seat: जीत का चौका लगाएंगे जनरैल सिंह या किसी और को चुनेगा तिलक नगर, ऐसा है यहां का चुनावी इतिहास
Tilak Nagar Seat: आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर जरनैल सिंह को टिकट दिया है। भाजप से श्वेता सैनी मैदान में हैं। कांग्रेस के टिकट पर परविन्दर सिंह उर्फ पी एस बावा चुनाव लड़ रहे हैं। तिलक नगर सीट पर कुल छह उम्मीदावरों की किस्मत का 5 फरवरी को ईवीएम में कैद होगा।
विस्तार
दिल्ली की तिलक नगर विधानसभा पश्चिम दिल्ली लोकसभा सीट का हिस्सा है। इस बार कुल 159923 मतदाता तिलक नगर का नया विधायक चुनने के लिए पात्र हैं। इनमें से 80964 पुरुष, 78955 मिहलाएं और चार अन्य मतदाता हैं। 2020 में यहां से आप के जरनैल सिंह जीते थे। आप ने एक बार फिर उन्हें टिकट दिया है। भाजप की श्वेता सैनी, कांग्रेस केपरविन्दर सिंह उर्फ पी एस बावा समेत कुल छह उम्मीदावरों की किस्मत का 5 फरवरी को ईवीएम में कैद होगी।
दिल्ली विधानसभा चुनाव के इतिहास में तिलक नगर में कब कौन जीता? कब कितने वोट पड़े? पिछले चुनाव में कैसे नतीजे रहे थे? इस बार कैसा मुकाबला हो सकता है? आइये जानते हैं…
दिल्ली को विधानसभा मिलने की ऐसी है कहानी
दिल्ली को विधानसभा कैसे मिली, इसकी कहानी 1952 से शुरू हुई। 1952 पार्ट-सी राज्य के रूप में दिल्ली को एक विधानसभा दी गई। 1956 में उस विधानसभा को भंग कर दिया गया। 1966 में दिल्ली को एक महानगर परिषद दी गई।
दिल्ली राज्य विधानसभा 17 मार्च 1952 को पार्ट-सी राज्य सरकार अधिनियम, 1951 के तहत अस्तित्व में आई। 1952 की विधानसभा में 48 सदस्य थे। मुख्य आयुक्त को उनके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद का प्रावधान था, जिसके संबंध में राज्य विधानसभा को कानून बनाने की शक्ति दी गई थी।
राज्य पुनर्गठन आयोग (1955) की सिफारिशों के बाद दिल्ली 1 नवंबर 1956 से भाग-सी राज्य नहीं रही। दिल्ली विधानसभा और मंत्रिपरिषद को समाप्त कर दिया गया और दिल्ली राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष प्रशासन के तहत केंद्र शासित प्रदेश बन गया। दिल्ली में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था और उत्तरदायी प्रशासन की मांग उठने लगी। इसके बाद दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 के तहत महानगर परिषद बनाई गई। यह एक सदनीय लोकतांत्रिक निकाय था जिसमें 56 निर्वाचित सदस्य और 5 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे।
इसके बाद भी विधानसभा की मांग उठती रही। 24 दिसंबर 1987 को भारत सरकार ने सरकारिया समिति (जिसे बाद में बालकृष्णन समिति कहा गया) नियुक्त की। समिति ने 14 दिसंबर 1989 को अपनी रिपोर्ट पेश की और सिफारिश की कि दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बना रहना चाहिए, लेकिन आम आदमी से जुड़े मामलों से निपटने के लिए अच्छी शक्तियों के साथ एक विधानसभा दी जानी चाहिए। बालाकृष्णन समिति की सिफारिश के अनुसार, संसद ने संविधान (69वां संशोधन) अधिनियम, 1991 पारित किया, जिसने संविधान में नए अनुच्छेद 239AA और 239AB डाले, जो अन्य बातों के साथ-साथ दिल्ली के लिए एक विधानसभा की व्यवस्था करते हैं। लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के मुद्दों पर विधानसभा को कानून बनाने का अधिकार नहीं था। 1992 में परिसीमन के बाद 1993 में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव बाद दिल्ली को एक निर्वाचित विधानसभा और मुख्यमंत्री मिला।
कैसा है तिलक नगर का चुनावी इतिहास
1977 में इस सीट पर जनता पार्टी के ओ.पी. बब्बर ने कांग्रेस के के.सी. मलिक को 6887 वोट से हरा दिया था। 1983 में इस सीट पर कांग्रेस के जसपाल सिंह ने भाजपा के ओपी बब्बर को 2276 वोट से हरा दिया था।
1993: भाजपा के ओपी बब्बर को जीत
दिल्ली को विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद 1993 में विधानसभा के चुनाव हुए। इस सीट पर भाजपा के ओपी बब्बर ने कांग्रेस के तरविंदर सिंह मारवाह को 16,570 वोट से हरा दिया था।
1998: कांग्रेस के जसपाल सिंह की जीत
1998 में मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच देखने को मिला। इस बार कांग्रेस ने भाजपा की सरकार को बदल दिया। इस सीट पर कांग्रेस के जसपाल सिंह ने भाजपा के ओपी बब्बर को 1516 वोट से हरा दिया था।
2003: ओपी बब्बर ने लिया पिछली हार का बदला
इस सीट पर फिर से नतीजे बदल गए, इस सीट पर भाजपा को जीत मिली। 2003 के चुनावों में भाजपा के ओ.पी. बब्बर ने फिर से जीत हासिल की। भाजपा ने कांग्रेस के जसपाल सिंह को 5628 वोट से हराकर अपनी पिछली हार का बदला ले लिया।
2008: लगातार दूसरी बार जीती भाजपा
इन चुनावों में भाजपा के ओ.पी. बब्बर ने अपनी सीट को बनाए रखा। भाजपा के मौजूदा विधायक ओ.पी. बब्बर ने एक बार फिर से जीत दर्ज की। भाजपा उम्मीदवार ने कांग्रेस की डॉ. अनिता बब्बर को 12,118 वोट से हरा दिया था।
2013: आप के जरनैल सिंह की पहली जीत
दिल्ली की राजनीति के लिए साल 2013 एक अहम कड़ी साबित हुआ। इस चुनाव में मुकाबले में कांग्रेस-भाजपा के अलावा इस बार भ्रष्टाचार आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी भी थी। तिलक नगर विधानसभा सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प रहा। इस सीट पर आप को जीत मिली। आप के जरनैल सिंह ने भाजपा के राजीव बब्बर को 2088 वोट से हरा दिया था। कांग्रेस की अमृता धवन 19,117 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहीं।
2015: जरनैल सिंह फिर बने विधायक
2015 में फिर से दिल्ली में विधानसभा चुनाव कराने पड़े। 2014 में मात्र 49 दिन सरकार चलाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था। फरवरी 2014 में जब लोकपाल विधेयक पारित नहीं हो पाया तो अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। 2015 में फिर से चुनाव कराए गए और केजरीवाल ने 70 में से 67 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की।
तिलक नगर सीट पर आप को ही फिर से जीत मिली। आप के जरनैल सिंह ने भाजपा के राजीव बब्बर को 19,890 वोट से हरा दिया। आप उम्मीदवार को 57180 और भाजपा उम्मीदवार को 37290 वोट मिले। कांग्रेस उम्मीदवार दुली चंद लोहिया की जमानत जब्त हो गई।
2020: जरनैल सिंह ने लगाई जीत की हैट्रिक
2020 के विधानसभा चुनाव में आप आदमी पार्टी ने फिर जबरदस्त जनादेश हासिल किया। आप को 70 में से कुल 62 सीटों पर जीत मिली। तिलक नगर की बात करें तो इस सीट पर आप के जरनैल सिंह ने ही सीट को बरकरार रखा था। आप के जनरैल सिंह ने भाजपा के राजीव बब्बर को 28,029 वोट से हराया था। जरनैल सिंह को 62436 और राजीव बब्बर को 34407 वोट मिले थे।
अबकी बार कैसे है समीकरण?
2025 में दिल्ली में होने वाले चुनावों में आप ने तिलक नगर से मौजूदा विधायक जरनैल सिंह के ही टिकट दिया है। भाजपा ने श्वेता सैनी और कांग्रेस ने पीएस बावा को टिकट दिया है। तिलक नगर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से लगभग 20 किलोमीटर और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से लगभग 17 किलोमीटर दूर स्थित है। यह इलाका ब्लू लाइन मेट्रो से जुड़ा है। यहां मतदाता इस चुनाव में महंगाई, अवैध पार्किंग, गंदगी जैसी समस्यों को इस चुनाव में मुद्दा मानते हैं।