Moti Nagar Seat: भाजपा की गढ़ रही सीट पर आप लगाएगी हैट्रिक या किसी और को मिलेगी जीत? ऐसा है मोती नगर का इतिहास
Moti Nagar Seat: 2013 तक इस सीट पर भाजपा का कब्जा रहा। 2015 और 2020 में यहां से आप को जीत मिली। दिल्ली के विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से इस सीट पर कांग्रेस एक बार भी नहीं जीत सकी है।
विस्तार
मोती नगर विधानसभा सीट भी दिल्ली की एक महत्वपूर्ण सीट है। इस सीट का चुनावी इतिहास भी काफी दिलचस्प है। ये नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र के अंदर आती है। वर्तमान में यहां से आप के शिव चरण गोयल विधायक हैं। इसी सीट से जीतकर मदन लाल खुराना 1993 में दिल्ली के मुख्यमंत्री बने थे।
दिल्ली विधानसभा चुनाव के इतिहास में मोती नगर में कब कौन जीता? कब कितने वोट पड़े? पिछले चुनाव में कैसे नतीजे रहे थे? इस बार कैसा मुकाबला हो सकता है? आइये जानते हैं…
दिल्ली को विधानसभा मिलने की ऐसी है कहानी
दिल्ली को विधानसभा कैसे मिली, इसकी कहानी 1952 से शुरू हुई। 1952 पार्ट-सी राज्य के रूप में दिल्ली को एक विधानसभा दी गई। 1956 में उस विधानसभा को भंग कर दिया गया। 1966 में दिल्ली को एक महानगर परिषद दी गई।
दिल्ली राज्य विधानसभा 17 मार्च 1952 को पार्ट-सी राज्य सरकार अधिनियम, 1951 के तहत अस्तित्व में आई। 1952 की विधानसभा में 48 सदस्य थे। मुख्य आयुक्त को उनके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद का प्रावधान था, जिसके संबंध में राज्य विधानसभा को कानून बनाने की शक्ति दी गई थी।
राज्य पुनर्गठन आयोग (1955) की सिफारिशों के बाद दिल्ली 1 नवंबर 1956 से भाग-सी राज्य नहीं रही। दिल्ली विधानसभा और मंत्रिपरिषद को समाप्त कर दिया गया और दिल्ली राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष प्रशासन के तहत केंद्र शासित प्रदेश बन गया। दिल्ली में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था और उत्तरदायी प्रशासन की मांग उठने लगी। इसके बाद दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 के तहत महानगर परिषद बनाई गई। यह एक सदनीय लोकतांत्रिक निकाय था जिसमें 56 निर्वाचित सदस्य और 5 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे।
इसके बाद भी विधानसभा की मांग उठती रही। 24 दिसंबर 1987 को भारत सरकार ने सरकारिया समिति (जिसे बाद में बालकृष्णन समिति कहा गया) नियुक्त की। समिति ने 14 दिसंबर 1989 को अपनी रिपोर्ट पेश की और सिफारिश की कि दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बना रहना चाहिए, लेकिन आम आदमी से जुड़े मामलों से निपटने के लिए अच्छी शक्तियों के साथ एक विधानसभा दी जानी चाहिए। बालाकृष्णन समिति की सिफारिश के अनुसार, संसद ने संविधान (69वां संशोधन) अधिनियम, 1991 पारित किया, जिसने संविधान में नए अनुच्छेद 239AA और 239AB डाले, जो अन्य बातों के साथ-साथ दिल्ली के लिए एक विधानसभा की व्यवस्था करते हैं। लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के मुद्दों पर विधानसभा को कानून बनाने का अधिकार नहीं था। 1992 में परिसीमन के बाद 1993 में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव बाद दिल्ली को एक निर्वाचित विधानसभा और मुख्यमंत्री मिला।
कैसा है मोती नगर का चुनावी इतिहास
1972 में यहां सबसे पहले चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस के केसी मलिक ने भारतीय जनसंघ के तिलक राज वर्मा को 1,878 वोट से हरा दिया था। 1977 में यहां फिर से चुनाव हुए जिसमें जनता पार्टी के मदन लाल खुराना ने कांग्रेस के योगेन्द्र सिंह को 10813 वोट से हरा दिया था। 1983 में हुए चुनावों में भाजपा के मदन लाल खुराना ने कांग्रेस की सत्यवती चौधरी को 7740 वोट से हरा दिया।
1993: मोती नगर ने मुख्यमंत्री चुना
दिल्ली को विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद 1993 में विधानसभा के चुनाव हुए। इस समय भाजपा के मदन लाल खुराना ने कांग्रेस की अंजली राम को 9138 वोट से हरा दिया था। खुराना को 33503 वोट मिले। वहीं, अंजली राम को 24365 वोट से संतोष करना पड़ा। मोती नगर में इस जीत के बाद ही मदन लाल खुराना दिल्ली के मुख्यमंत्री बने।
1998: भाजपा को मिली जीत
1998 के विधानसभा चुनाव में मुकाबला फिर से भाजपा और कांग्रेस के बीच में देखने को मिला। भाजपा ने इस बार मदन लाल खुराना की जगह अविनाश साहनी को टिकट दिया था। अविनाश साहनी ने कांग्रेस के कंवलजीत सिंह को 3309 वोट से हरा दिया।
2003: पांच साल बाद फिर जीते मदन लाल खुराना
2003 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने फिर से मदन लाल खुराना को मोती नगर सीट से उम्मीदवार बनाया। खुराना एक बार फिर यहां से जीतने में सफल रहे। उन्होंने कांग्रेस की अलका लांबा को 15,190 वोट से हरा दिया था।
2004: करवाने पड़े उपचुनाव
2004 के लोकसभा चुनाव से पहले 14 जनवरी 2004 को मोती नगर के तत्कालीन विधायक मदन लाल खुराना को राजस्थान का राज्यपाल बना दिया गया। राज्यपाल बनने के बाद खुराना ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद इस सीट पर उपचुनाव कराने पड़े। इस उपचुनाव में भाजपा के सुभाष सचदेवा को जीत मिली।
2008: सचदेवा ने दर्ज की दूसरी जीत
2008 के विधानसभा चुनाव में मोती नगर सीट पर कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला देखने को मिला। भाजपा के सुभाष सचदेवा ने कांग्रेस की अंजली राय को 14,997 वोट से हरा दिया।
2013: सुभाष सचदेवा ने लगाई जीत की हैट्रिक
दिल्ली की राजनीति के लिए साल 2013 एक अहम कड़ी साबित हुआ। इस चुनाव में मुकाबले में कांग्रेस-भाजपा के अलावा इस बार भ्रष्टाचार आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी भी थी। मोती नगर विधानसभा सीट पर एक बार फिर भाजपा को जीत मिली। भाजपा के सुभाष सचदेवा ने मोती नगर सीट पर जीत की हैट्रिक लगाई। सचदेवा ने इस बार आम आदमी पार्टी के कुलदीप सिंह चान्ना को 16,021 वोट से हरा दिया। कांग्रेस के सुशील गुप्ता 25,393 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे।
2015: आप को मिली पहली जीत
2015 में फिर से दिल्ली में विधानसभा चुनाव करवाने पड़े। 2014 में मात्र 49 दिन सरकार चलाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था। फरवरी 2014 में जब लोकपाल विधेयक पारित नहीं हो पाया तो अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। 2015 में फिर से चुनाव कराए गए और केजरीवाल ने 70 में से 67 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की।
इस चुनाव में मोती नगर सीट पर आप ने जीत हासिल की। आप के शिवचरण गोयल ने भाजपा के सुभाष सचदेवा को 15,221 वोट से हरा दिया था। आप उम्मीदवार को 60,223 वोट मिले। भाजपा उम्मीदवार को 45,002 वोट मिले।
2020: आप की दूसरी जीत
2020 के विधानसभा चुनाव में आप आदमी पार्टी ने फिर जबरदस्त जनादेश हासिल किया। आप को 70 में से कुल 62 सीटों पर जीत मिली। मोती नगर सीट की बात करें तो इस चुनाव में एक बार फिर से आप के मौजूदा विधायक शिवचरण गोयल ने जीत हासिल की। आप उम्मीदवार ने भाजपा के सुभाष सचदेवा को 14,072 वोट से हरा दिया। शिवचरण गोयल को 60,622 वोट मिले। वहीं, सुभाष सचदेवा को 46,550 वोट से संतोष करना पड़ा।
अबकी बार कैसे हैं समीकरण?
पश्चिम दिल्ली की मोती नगर विधानसभा सीट भाजपा का गढ़ रही है। इसे पंजाबी-सिख बहुल इलाकों में गिना जाता है। 2013 तक इस सीट पर भाजपा का कब्जा रहा। 2015 और 2020 में यहां से आप को जीत मिली। दिल्ली के विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से इस सीट पर कांग्रेस एक बार भी नहीं जीत सकी है।
इस बार आप ने एक बार फिर से शिवचरण गोयल को चुनावी मैदान में उतारा है। भाजपा ने यहां से पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना के बेटे हरीश खुराना को टिकट दिया है। कांग्रेस ने राजेंद्र सिंह नामधारी को टिकट दिया है। यहां के प्रमुख इलाकों में पूर्वी पंजाबी बाग, कीर्ति नगर और मानसरोवर गार्डन हैं। इन पॉश इलाकों के साथ यहां एक भी अनधिकृत कॉलोनी नहीं है। जखीरा और कीर्ति नगर में फर्नीचर की बड़ी मार्केट है। इसके अलावा कुछ झुग्गी बस्तियां भी हैं। इस विधानसभा के प्रमुख मुद्दों में पार्किंग, ट्रैफिक जाम, गंदे पानी की सप्लाई, स्वच्छता, सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं।