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Model Town Assembly Seat: चार बार कांग्रेस, तीन आप तो एक बार जीती भाजपा; ऐसा है मॉडल टाउन का चुनावी इतिहास

Mon, 27 Jan 2025 07:50 PM IST
संध्या कुमारी इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या कुमारी Updated Mon, 27 Jan 2025 07:50 PM IST
सार

Model Town Seat: मॉडल टाउन से इस बार आप ने मौजूदा विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी को टिकट दिया है। भाजपा के टिकट पर अशोक गोयल तो कांग्रेस के टिकट पर कुंवर करण सिंह मैदान में हैं। आइये इस सीट का चुनावी इतिहास जानते हैं...

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Delhi Assembly Election 2025 model town Assembly Seat Profile and History News In Hindi
दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर राजधानी में सभी पार्टियां चुनाव प्रचार में लगी हैं। सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। हर दल मतदाताओं को लुभाने के लिए घोषाणा पर घोषणा कर रहा है। रेवड़ियों को बारिश के बीच मतदान की तारीख भी करीब आती जा रही है। दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में शामिल मॉडल टाउन से इस बार आप ने मौजूदा विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी को टिकट दिया है। भाजपा के टिकट पर अशोक गोयल तो कांग्रेस के टिकट पर कुंवर करण सिंह मैदान में हैं। 

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दिल्ली विधानसभा चुनाव के इतिहास में मॉडल टाउन में कब कौन जीता? कब कितने वोट पड़े? पिछले चुनाव में कैसे नतीजे रहे थे? इस बार कैसा मुकाबला हो सकता है? आइये जानते हैं…

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दिल्ली को विधानसभा मिलने की ऐसी है कहानी
दिल्ली को विधानसभा कैसे मिली, इसकी कहानी 1952 से शुरू हुई। 1952 पार्ट-सी राज्य के रूप में दिल्ली को एक विधानसभा दी गई। 1956 में उस विधानसभा को भंग कर दिया गया। 1966 में दिल्ली को एक महानगर परिषद दी गई। 

दिल्ली राज्य विधानसभा 17 मार्च 1952 को पार्ट-सी राज्य सरकार अधिनियम, 1951 के तहत अस्तित्व में आई। 1952 की विधानसभा में 48 सदस्य थे। मुख्य आयुक्त को उनके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद का प्रावधान था, जिसके संबंध में राज्य विधानसभा को कानून बनाने की शक्ति दी गई थी। 

राज्य पुनर्गठन आयोग (1955) की सिफारिशों के बाद दिल्ली 1 नवंबर 1956 से भाग-सी राज्य नहीं रही। दिल्ली विधानसभा और मंत्रिपरिषद को समाप्त कर दिया गया और दिल्ली राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष प्रशासन के तहत केंद्र शासित प्रदेश बन गया। दिल्ली में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था और उत्तरदायी प्रशासन की मांग उठने लगी। इसके बाद दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 के तहत महानगर परिषद बनाई गई। यह एक सदनीय लोकतांत्रिक निकाय था जिसमें 56 निर्वाचित सदस्य और 5 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे।

इसके बाद भी विधानसभा की मांग उठती रही। 24 दिसंबर 1987 को भारत सरकार ने सरकारिया समिति (जिसे बाद में बालकृष्णन समिति कहा गया) नियुक्त की। समिति ने 14 दिसंबर 1989 को अपनी रिपोर्ट पेश की और सिफारिश की कि दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बना रहना चाहिए, लेकिन आम आदमी से जुड़े मामलों से निपटने के लिए अच्छी शक्तियों के साथ एक विधानसभा दी जानी चाहिए। बालाकृष्णन समिति की सिफारिश के अनुसार, संसद ने संविधान (69वां संशोधन) अधिनियम, 1991 पारित किया, जिसने संविधान में नए अनुच्छेद 239AA और 239AB डाले, जो अन्य बातों के साथ-साथ दिल्ली के लिए एक विधानसभा की व्यवस्था करते हैं। लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के मुद्दों पर विधानसभा को कानून बनाने का अधिकार नहीं था। 1992 में परिसीमन के बाद 1993 में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव बाद दिल्ली को एक निर्वाचित विधानसभा और विधायक मिला। 

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कैसे रहा मॉडल टाउन में चुनावों का इतिहास?
मॉडल टाउन सीट पर पहला चुनाव 1977 में हुआ था। उस समय यहां जनता पार्टी के उम्मीदवार महावीर वैद ने जीत दर्ज की थी। जनता पार्टी उम्मीदवार ने कांग्रेस के चमन लाल शर्मा को 6,047 वोट से हराया था। मॉडल टाउन सीट पर दूसरी बार चुनाव साल 1983 में हुआ था। इस चुनाव में मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच हुआ था। इस चुनाव में कांग्रेस के वी.पी. खुल्लर ने भाजपा के महावीर वैद को 2,193 वोट से हराया था। 



 
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1993: भाजपा का सीट पर कब्जा 
1993 में दिल्ली के केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद पहली बार विधानसभा के चुनाव हुए। इन चुनावों में मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच था। भाजपा के छत्री लाल गोयल ने कांग्रेस के कंवर करण सिंह को 2338 वोट से हरा दिया था।

Delhi Assembly Election 2025 model town Assembly Seat Profile and History News In Hindi
दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

1998: कांग्रेस ने किया सीट पर कब्जा 
1998 के विधानसभा चुनाव में मॉडल टाउन में एक बार फिर मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच हुआ। कांग्रेस ने एक बार फिर कंवर करण सिंह को टिकट दिया। करण सिंह 1993 में मॉडल टाउन से हार गए थे। इस बार  कांग्रेस के कंवर करण सिंह ने भाजपा के भोला नाथ विज को 11,039 वोट से हरा दिया। 

2003: कांग्रेस के कंवर करण सिंह बने विधायक 
2003 में मॉडल टाउन विधानसभा सीट पर हुए चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस और भाजपा के बीच टक्कर हुई। नतीजा एक बार फिर कांग्रेस के पक्ष में रहा। इस बार भी कांग्रेस उम्मीदवार कंवर करण सिंह ने भाजपा के अशोक अग्रवाल को 4,716 वोट से हरा दिया। 

2008: कांग्रेस ने लगाई हेडट्रिक
2008 में हुए परिसीमन के बाद मॉडल टाउन सीट पर फिर से चुनाव हुए। इस चुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर कंवर करण सिंह को मैदान में उतारा। वहीं, भाजपा ने भोला नाथ विज को टिकट दिया। एक बार फिर कंवर करण सिंह को जीत मिली। कंवर करण सिंह ने जीत की हैट्रिक लगाई। वहीं, भोला नाथ विज को 1998 की तरह इस बार भी हार का सामना करना पड़ा। कंवर करण सिंह ने भोला नाथ विज को 2,997 वोट से हरा दिया।  

2013: आप को मिली पहली सफलता
दिल्ली की राजनीति के लिए साल 2013 एक अहम कड़ी साबित हुआ। इस चुनाव में मुकाबले में कांग्रेस-भाजपा के अलावा इस बार भ्रष्टाचार आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी भी थी। मॉडल टाउन विधानसभा सीट पर मुकाबला पिछले चुनावों से काफी अलग रहा। चुनाव नतीजे आए तो भाजपा को जीत मिली लेकिन उसे टक्कर नई-नवेली आम आदमी पार्टी से मिली। आप के अखिलेश पति त्रिपाठी ने भाजपा के अशोक गोयल को 7875 वोट से हरा दिया था। लगातार तीन बार मॉडल टाउन सीट से जीते कंवर करण सिंह इस चुनाव में तीसरे स्थान पर खिसक गए। 

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दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

2015: एक बार फिर जीती आप
2015 में फिर से दिल्ली में विधानसभा चुनाव करवाने पड़े। 2014 में मात्र 49 दिन सरकार चलाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था। फरवरी 2014 में जब लोकपाल विधेयक पारित नहीं हो पाया तो अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। 2015 में फिर से चुनाव कराए गए और केजरीवाल ने 70 में से 67 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की। 
इस चुनाव में मॉडल टाउन सीट पर आप और भाजपा के बीच मुख्य मुकाबला हुआ। आप को 16,706 वोट के बड़े अंतर जीत मिली। आप के टिकट पर चुनाव लड़ रहे अखिलेश पति त्रिपाठी को 54628 वोट मिले, जबकि भाजपा के विवेक गर्ग को 37922 वोट मिले। वहीं, लगातार तीन बार मॉडल टाउन के विधायक रहे कंवर करण सिंह इस बार अपनी जमानत भी नहीं बचा सके। 

2020: अखिलेश पति त्रिपाठी ने लगाई जीत की हैट्रिक
2020 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने फिर जबरदस्त जनादेश हासिल किया। आप को 70 में से कुल 62 सीटों पर जीत मिली। मॉडल टाउन के नतीजों की बात करें तो यहां से आप के मौजूदा विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी को ही जीत मिला। आप ने भाजपा के एक प्रमुख चेहरे कपिल मिश्रा को हरा दिया था। अखिलेश पति त्रिपाठी को 52,665 और कपिल मिश्रा को 41,532 वोट मिले। आप उम्मीदवार ने भाजपा के कपिल मिश्रा को 11,133 वोट से हरा दिया था। 

अबकी बार कैसे हैं समीकरण? 
2025 के विधानसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी ने मॉडल टाउन सीट से मौजूदा विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी को ही मैदान में उतारा है। वहीं, भाजपा ने अशोक गोयल को टिकट दिया है। अशोक गोयल को भाजपा ने 2013 में भी टिकट दिया था। जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस ने कुंवर करण सिंह को मैदान में उतारा है। कुंवर करण सिंह 1998, 2003 और 2008 में मॉडल टाउन सीट से जीत दर्ज कर चुके हैं। 

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