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Hindi News ›   Election ›   Delhi Assembly Election 2025 Malviya nagar Assembly Seat Profile and History News In Hindi

Malviya Nagar Assembly Seat: मालवीय नगर में बीते तीन बार से आप का कब्जा, क्या भाजपा-कांग्रेस दे पाएंगे चुनौती?

Tue, 04 Feb 2025 07:18 AM IST
संध्या कुमारी इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या कुमारी Updated Tue, 04 Feb 2025 07:18 AM IST
सार

Malviya Nagar Seat: मालवीय नगर सीट दिल्ली के विधानसभा चुनावों में एक बेहद जरूरी सीट है। इस सीट पर अब तक आप ने कब्जा किया हुआ है। आप के सोमनाथ भारती सीट से तीन बार लगातार जीत चुके हैं। 

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Delhi Assembly Election 2025 Malviya nagar Assembly Seat Profile and History News In Hindi
दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली की मालवीय नगर विधानसभा सीट नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र के अंदर आती है। इस सीट पर इस बार कुल 156271 मतदाता वोट डालने के लिए पात्र हैं। इनमें से 83221 पुरुष और 73046 महिलाएं हैं बाकि 4 अन्य मतदाता है। सीट पर वर्तमान में आप के सोमनाथ भारती विधायक हैं। 

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दिल्ली विधानसभा चुनाव के इतिहास में  मालवीय नगर में कब कौन जीता? कब कितने वोट पड़े? पिछले चुनाव में कैसे नतीजे रहे थे? इस बार कैसा मुकाबला हो सकता है? आइये जानते हैं…

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दिल्ली को विधानसभा मिलने की ऐसी है कहानी
दिल्ली को विधानसभा कैसे मिली, इसकी कहानी 1952 से शुरू हुई। दिल्ली राज्य विधानसभा 17 मार्च 1952 को पार्ट-सी राज्य सरकार अधिनियम, 1951 के तहत अस्तित्व में आई। 1952 की विधानसभा में 48 सदस्य थे। मुख्य आयुक्त को उनके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद का प्रावधान था, जिसके संबंध में राज्य विधानसभा को कानून बनाने की शक्ति दी गई थी। 

राज्य पुनर्गठन आयोग (1955) की सिफारिशों के बाद दिल्ली 1 नवंबर 1956 से भाग-सी राज्य नहीं रही। दिल्ली विधानसभा और मंत्रिपरिषद को समाप्त कर दिया गया और दिल्ली राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष प्रशासन के तहत केंद्र शासित प्रदेश बन गया। इसके बाद दिल्ली में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था और उत्तरदायी प्रशासन की मांग उठने लगी। फिर दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 के तहत महानगर परिषद बनाई गई। यह एक सदनीय लोकतांत्रिक निकाय था, जिसमें 56 निर्वाचित सदस्य और 5 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे।

इसके बाद भी विधानसभा की मांग उठती रही। 24 दिसंबर 1987 को भारत सरकार ने सरकारिया समिति (जिसे बाद में बालकृष्णन समिति कहा गया) नियुक्त की। समिति ने 14 दिसंबर 1989 को अपनी रिपोर्ट पेश की और सिफारिश की कि दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बना रहना चाहिए, लेकिन आम आदमी से जुड़े मामलों से निपटने के लिए अच्छी शक्तियों के साथ एक विधानसभा दी जानी चाहिए। बालाकृष्णन समिति की सिफारिश के अनुसार, संसद ने संविधान (69वां संशोधन) अधिनियम, 1991 पारित किया, जिसने संविधान में नए अनुच्छेद 239AA और 239AB डाले, जो अन्य बातों के साथ-साथ दिल्ली के लिए एक विधानसभा की व्यवस्था करते हैं। लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के मुद्दों पर विधानसभा को कानून बनाने का अधिकार नहीं था। 1992 में परिसीमन के बाद 1993 में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव बाद दिल्ली को एक निर्वाचित विधानसभा और मुख्यमंत्री मिला।

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कैसा रहा मालवीय नगर का चुनावी इतिहास 
1977 में सबसे पहली बार यहां हुए चुनावों का लेखा जोखा मिलता है। इस चुनाव में जनता पार्टी के हंसराज सेठी ने कांग्रेस के प्रेम सिंह चौहान को 9092 वोट से हराया। 1983 में यहां फिर से चुनाव हुए। भाजपा के हंसराज सेठी ने कांग्रेस के योग नाथ शास्त्री को 692 वोट से हरा दिया था।

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1993: भाजपा के राजेंद्र गुप्ता को जीत  
दिल्ली को विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश बनने के बाद 1993 में विधानसभा के चुनाव हुए। इस सीट पर भाजपा के राजेंद्र गुप्ता ने कांग्रेस के योगा नंद शास्त्री को 258 वोट से हराया।

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दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

1998: कांग्रेस के डॉ. योगानंद शास्त्री को जीत 
1998 में मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच देखने को मिला। इस सीट पर कांग्रेस के डॉ. योगानंद शास्त्री ने भाजपा के राजेंद्र गुप्ता को 7964 वोट से हराया। 

 

2003: डॉ. योगानंद शास्त्री को जीत 
2003 में इस सीट पर कोई बदलाव देखने को नहीं मिला। कांग्रेस के डॉ. योगानंद शास्त्री ने एक बाद फिर से जीत दर्ज की। डॉ. योगानंद शास्त्री ने भाजपा की मोनिका अरोड़ा को 4520 वोट से हराया। 

 2008: किरण वालिया का सीट पर कब्जा बरकरार 
2008 में कांग्रेस ने मौजूदा विधायक का टिकट काट दिया था। कांग्रेस के किरण वालिया ने भाजपा के राम भज को 3732 वोट से हराया।

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दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

2013: आप के सोमनाथ भारती की पहली जीत 
दिल्ली की राजनीति के लिए साल 2013 एक अहम कड़ी साबित हुआ। इस चुनाव में मुकाबले में कांग्रेस-भाजपा के अलावा इस बार भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी भी थी। इस सीट आप को जीत मिली। इस सीट पर आप के सोमनाथ भारती को जीत मिली। आप के सोमनाथ भारती ने भाजपा की आरती मेहरा को 7772 वोट से हराया। 

 2015: सोमनाथ भारती फिर बने विधायक
2015 में फिर से दिल्ली में विधानसभा चुनाव करवाने पड़े। 2014 में मात्र 49 दिन सरकार चलाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था। फरवरी 2014 में जब लोकपाल विधेयक पारित नहीं हो पाया तो अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। 2015 में फिर से चुनाव कराए गए और केजरीवाल ने 70 में से 67 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की। 

मालवीय नगर  सीट पर इस बार आप को ही जीत मिली। आप के सोमनाथ भारती ने भाजपा की डॉ. नंदिनी शर्मा को 15897 वोट से हरा दिया था। भाजपा को 51196 और आप को 35299 वोट मिले थे। 

2020: सोमनाथ भारती को मिली तीसरी जीत
2020 के विधानसभा चुनाव में आप आदमी पार्टी ने फिर जबरदस्त जनादेश हासिल किया। आप को 70 में से कुल 62 सीटों पर जीत मिली। मालवीय नगर  सीट पर आप के सोमनाथ भारती को फिर से जीत मिली थी। आप ने भाजपा के शैलेंद्र सिंह को 18,144 वोट से हरा दिया था। आप को 52043 और भाजपा को 33899 वोट मिले थे।

अबकी बार कैसे है समीकरण? 
2025 में दिल्ली में होने वाले चुनावों में आप ने मालवीय नगर से मौजूदा विधायक सोमनाथ भारती को ही टिकट दिया है। भाजपा ने सतीश उपाध्याय और कांग्रेस ने जितेन्द्र कुमार कोचर को टिकट दिया है। 

 


 
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