फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Election ›   Delhi Assembly Election 2025 janakpuri Assembly Seat Profile and History News In Hindi

Janakpuri Assembly Seat: आप लगाएगी हैट्रिक या किसी और को चुनेगी जनकपुरी की जनता? ऐसा है इस सीट का इतिहास

Mon, 03 Feb 2025 05:17 PM IST
संध्या कुमारी इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या कुमारी Updated Mon, 03 Feb 2025 05:17 PM IST
सार

Janakpuri Seat:  जनकपुरी सीट से आप ने मौजूदा विधायक राजेश ऋषि का टिकट काटकर प्रवीण कुमार को मैदान में उतारा है। भाजपा ने आशीष सूद तो कांग्रेस ने हरबानी कौर को टिकट दिया है। आइये जानते हैं इस सीट का चुनावी इतिहास...

विज्ञापन
Delhi Assembly Election 2025 janakpuri Assembly Seat Profile and History News In Hindi
दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में जनकपुरी सीट भी शामिल है। इस सीट का चुनावी इतिहास भी काफी दिलचस्प है। ये पश्चिमी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र के अंदर आती है। इस सीट पर इस बार कुल 198204 मतदाता वोट डालने के लिए पात्र हैं। इनमें से 102639 पुरुष और 95554 महिलाएं हैं बाकि 11 अन्य मतदाता है। 

विज्ञापन

इस सीट पर कांग्रेस कभी भी जीत दर्ज नहीं कर सकी है। 1993 से 2013 के विधानसभा चुनाव तक इस सीट पर भाजपा को जीत मिली। उसके बाद 2015 और 2020 में यहां से आप के प्रत्याशी ने जीत दर्ज की।        

विज्ञापन


दिल्ली विधानसभा चुनाव के इतिहास में  जनकपुरीमें कब कौन जीता? कब कितने वोट पड़े? पिछले चुनाव में कैसे नतीजे रहे थे? इस बार कैसा मुकाबला हो सकता है? आइये जानते हैं…

विज्ञापन
विज्ञापन

दिल्ली को विधानसभा मिलने की ऐसी है कहानी
दिल्ली को विधानसभा कैसे मिली, इसकी कहानी 1952 से शुरू हुई। 1952 पार्ट-सी राज्य के रूप में दिल्ली को एक विधानसभा दी गई। 1956 में उस विधानसभा को भंग कर दिया गया। 1966 में दिल्ली को एक महानगर परिषद दी गई।

दिल्ली राज्य विधानसभा 17 मार्च 1952 को पार्ट-सी राज्य सरकार अधिनियम, 1951 के तहत अस्तित्व में आई। 1952 की विधानसभा में 48 सदस्य थे। मुख्य आयुक्त को उनके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद का प्रावधान था, जिसके संबंध में राज्य विधानसभा को कानून बनाने की शक्ति दी गई थी। 

राज्य पुनर्गठन आयोग (1955) की सिफारिशों के बाद दिल्ली 1 नवंबर 1956 से भाग-सी राज्य नहीं रही। दिल्ली विधानसभा और मंत्रिपरिषद को समाप्त कर दिया गया और दिल्ली राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष प्रशासन के तहत केंद्र शासित प्रदेश बन गया। दिल्ली में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था और उत्तरदायी प्रशासन की मांग उठने लगी। इसके बाद दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 के तहत महानगर परिषद बनाई गई। यह एक सदनीय लोकतांत्रिक निकाय था जिसमें 56 निर्वाचित सदस्य और 5 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे।

इसके बाद भी विधानसभा की मांग उठती रही। 24 दिसंबर 1987 को भारत सरकार ने सरकारिया समिति (जिसे बाद में बालकृष्णन समिति कहा गया) नियुक्त की। समिति ने 14 दिसंबर 1989 को अपनी रिपोर्ट पेश की और सिफारिश की कि दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बना रहना चाहिए, लेकिन आम आदमी से जुड़े मामलों से निपटने के लिए अच्छी शक्तियों के साथ एक विधानसभा दी जानी चाहिए। बालाकृष्णन समिति की सिफारिश के अनुसार, संसद ने संविधान (69वां संशोधन) अधिनियम, 1991 पारित किया, जिसने संविधान में नए अनुच्छेद 239AA और 239AB डाले, जो अन्य बातों के साथ-साथ दिल्ली के लिए एक विधानसभा की व्यवस्था करते हैं। लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के मुद्दों पर विधानसभा को कानून बनाने का अधिकार नहीं था। 1992 में परिसीमन के बाद 1993 में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव बाद दिल्ली को एक निर्वाचित विधानसभा और मुख्यमंत्री मिला। 

1993: भाजपा के जगदीश मुखी को जीत  
दिल्ली को विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद 1993 में विधानसभा के चुनाव हुए। इस सीट पर भाजपा के जगदीश मुखी ने कांग्रेस के शैलेन्द्र को 16053 वोट से हराया था। 

Delhi Assembly Election 2025 janakpuri Assembly Seat Profile and History News In Hindi
दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

1998: जगदीश मुखी की दूसरी जीत  
1998 में मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच देखने को मिला। इस बार भी मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही था। भाजपा के प्रो. जगदीश मुखी ने कांग्रेस के शिव कुमार सोढ़ी को 7700 वोट से हरा दिया था। 

2003: जगदीश मुखी ने लगाई जीत की हैट्रिक 
इस सीट पर फिर से नतीजे नहीं बदले। भाजपा के मौजूदा विधायक जगदीश मुखी ने एक बार फिर से सीट पर जीत दर्ज की थी। भाजपा के जगदीश मुखी ने कांग्रेस के शिव कुमार सोढ़ी को 12891 वोट से हरा कर जीतकर हैट्रिक लगाई।  

2008: जगदीश मुखी एक बार फिर जीते  
इन चुनावों में फिर से भाजपा ने जीत दर्ज की। 2008 में फिर से भाजपा के प्रो.जगदीश मुखी ने कांग्रेस के दीपक अरोड़ा को 17452 वोट से हरा दिया था। यह जनकपुरी में जगदीश मुखी की लगातार चौथी जीत थी। 

2013:  प्रो.जगदीश मुखी सीट से पांचवी बार विजेता 
दिल्ली की राजनीति के लिए साल 2013 एक अहम कड़ी साबित हुआ। इस चुनाव में मुकाबले में कांग्रेस-भाजपा के अलावा इस बार भ्रष्टाचार आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी भी थी। इस सीट पर मुकाबले में कोई बदलाव नहीं देखने को मिला।  

इस सीट पर आप को जीत नहीं मिली। फिर से भाजपा के प्रो.जगदीश मुखी को जीत मिली। जनकपुरी सीट पर यह जगदीश मुखी की लगातार पांचवीं जीत थी। भाजपा उम्मीदवार ने आप के राजेश ऋषि को 2644 वोट से हरा दिया था। कांग्रेस की रागिनी नायक 17191 वोट पारकर तीसरे स्थान पर रहीं।  

Delhi Assembly Election 2025 janakpuri Assembly Seat Profile and History News In Hindi
दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

2015: प्रो.जगदीश मुखी ने किया हार का सामना
2015 में फिर से दिल्ली में विधानसभा चुनाव करवाने पड़े। 2014 में मात्र 49 दिन सरकार चलाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था। फरवरी 2014 में जब लोकपाल विधेयक पारित नहीं हो पाया तो अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। 2015 में फिर से चुनाव कराए गए और केजरीवाल ने 70 में से 67 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की। 

जनकपुरी सीट पर इस बार आप को जीत मिली। आप के राजेश ऋषि ने भाजपा के प्रो.जगदीश मुखी को 25580 वोट से हरा दिया। 

2020: आप के राजेश ऋषि दूसरी बार जीते
2020 के विधानसभा चुनाव में आप आदमी पार्टी ने फिर जबरदस्त जनादेश हासिल किया। आप को 70 में से कुल 62 सीटों पर जीत मिली। जनकपुरी सीट पर आप के राजेश ऋषि ने फिर से जीत दर्ज की। आप उम्मीदवार ने भाजपा के आशीष सूद को 14,917 वोट से हरा दिया। आप के राजेश ऋषि को 67,968 वोट मिले। वहीं, भाजपा के आशीष सूद को 53,051 वोट से संतोष करना पड़ा। कांग्रेस की राधिका खेड़ा अपनी जमानत भी नहीं बचा सकीं। उन्हें महज 2084 वोट से संतोष करना पड़ा। 

अबकी बार कैसे है समीकरण? 
2025 में दिल्ली में होने वाले चुनावों में आप ने जनकपुरी से मौजूदा विधायक राजेश ऋषि के टिकट को काट दिया है। आप ने राजेश ऋषि की जगह प्रवीण कुमार को टिकट दिया है। वहीं भाजपा ने आशीष सूद को टिकट दिया है। कांग्रेस ने हरबानी कौर को अपना उम्मीदवार बनाया है। जनकपुरी सीट पर इस बार कुल 16 उम्मीदवार मैदान में हैं। मतदान से ऐन पहले आम आदमी पार्टी की मौजूदा विधायक राजेश ऋषि ने पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है। राजेश ऋषि समेत आप के कुल आठ मौजूदा विधायकों ने भाजपा का दामन थामा है। इन सभी का टिकट पार्टी ने काट दिया था।  

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed