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Hari Nagar Assembly Seat: कभी भाजपा का गढ़ रही, कांग्रेस अब तक नहीं जीती सकी, ऐसा है हरि नगर का चुनावी इतिहास

Fri, 31 Jan 2025 08:58 PM IST
संध्या कुमारी इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या कुमारी Updated Fri, 31 Jan 2025 08:58 PM IST
सार

Hari Nagar Seat: दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनावों में सभी सीटों पर पार्टियां लगातार समीकरण साधने में लगी हुई है। हरि नगर सीट की बात करें तो इस सीट से कभी भी कांग्रेस नहीं जीत पाई है। सिख आबादी होने के कारण सीट पर एक बार शिरोमणि अकाली दल ने भी जीत दर्ज की है। 

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Delhi Assembly Election 2025 Hari Nagar Assembly Seat Profile and History News In Hindi
दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली विधानसभा चुनाव का पारा चढ़ चुका है। आरोप प्रत्यारोप का यमुना में जहर मिलाने तक पहुंच गए हैं। दिल्ली की सत्ता में काबिज आम आदमी पार्टी को भाजपा और कांग्रेस से टक्कर मिल रही है। इस चुनावी मौसम में हम आपको दिल्ली की अलग-अलग सीटों का चुनावी इतिहास बता रहे हैं। आज हरि नगर विधानसभा सीट की बात करेंगे। जहां से आप की राज कुमारी ढिल्लों मौजूदा विधायक हैं।  

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दिल्ली विधानसभा चुनाव के इतिहास में हरि नगर  में कब कौन जीता? कब कितने वोट पड़े? पिछले चुनाव में कैसे नतीजे रहे थे? इस बार कैसा मुकाबला हो सकता है? आइये जानते हैं…

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दिल्ली को विधानसभा मिलने की ऐसी है कहानी
दिल्ली को विधानसभा कैसे मिली, इसकी कहानी 1952 से शुरू हुई। 1952 पार्ट-सी राज्य के रूप में दिल्ली को एक विधानसभा दी गई। 1956 में उस विधानसभा को भंग कर दिया गया। 1966 में दिल्ली को एक महानगर परिषद दी गई। 

दिल्ली राज्य विधानसभा 17 मार्च 1952 को पार्ट-सी राज्य सरकार अधिनियम, 1951 के तहत अस्तित्व में आई। 1952 की विधानसभा में 48 सदस्य थे। मुख्य आयुक्त को उनके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद का प्रावधान था, जिसके संबंध में राज्य विधानसभा को कानून बनाने की शक्ति दी गई थी। 

राज्य पुनर्गठन आयोग (1955) की सिफारिशों के बाद दिल्ली 1 नवंबर 1956 से भाग-सी राज्य नहीं रही। दिल्ली विधानसभा और मंत्रिपरिषद को समाप्त कर दिया गया और दिल्ली राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष प्रशासन के तहत केंद्र शासित प्रदेश बन गया। दिल्ली में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था और उत्तरदायी प्रशासन की मांग उठने लगी। इसके बाद दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 के तहत महानगर परिषद बनाई गई। यह एक सदनीय लोकतांत्रिक निकाय था जिसमें 56 निर्वाचित सदस्य और 5 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे।

इसके बाद भी विधानसभा की मांग उठती रही। 24 दिसंबर 1987 को भारत सरकार ने सरकारिया समिति (जिसे बाद में बालकृष्णन समिति कहा गया) नियुक्त की। समिति ने 14 दिसंबर 1989 को अपनी रिपोर्ट पेश की और सिफारिश की कि दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बना रहना चाहिए, लेकिन आम आदमी से जुड़े मामलों से निपटने के लिए अच्छी शक्तियों के साथ एक विधानसभा दी जानी चाहिए। बालाकृष्णन समिति की सिफारिश के अनुसार, संसद ने संविधान (69वां संशोधन) अधिनियम, 1991 पारित किया, जिसने संविधान में नए अनुच्छेद 239AA और 239AB डाले, जो अन्य बातों के साथ-साथ दिल्ली के लिए एक विधानसभा की व्यवस्था करते हैं। लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के मुद्दों पर विधानसभा को कानून बनाने का अधिकार नहीं था। 1992 में परिसीमन के बाद 1993 में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव बाद दिल्ली को एक निर्वाचित विधानसभा और मुख्यमंत्री मिला। 

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1993: भाजपा के हरशरण सिंह बल्ली को जीत
दिल्ली के विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद 1993 में विधानसभा के चुनाव हुए। 1993 में यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधे तौर पर टक्कर थी। भाजपा के हरशरण सिंह बल्ली ने कांग्रेस के ओंकार सिंह थापर को 16,899 वोट से हरा दिया था। 

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दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

1998: भाजपा ने कांग्रेस को केवल 617 वोट से हराया 
साल 1998 में भी मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही था। भाजपा के हरशरण सिंह बल्ली ने एक बार फिर से यहां से जीत दर्ज की। भाजपा के हरशरण सिंह बल्ली ने कांग्रेस के ओ.पी.वाधवा  को केवल 617 वोटों से हराया था। 

2003: हरशरण सिंह की हैट्रिक
2003 में भी इस सीट पर कोई बदलाव देखने को नहीं मिला। भाजपा के हरशरण सिंह बल्ली ने कांग्रेस के ओ.पी.वाधवा को फिर से 6791 वोट से हरा दिया था। इस जीत के साथ हरशरण सिंह बल्ली ने हरि नगर सीट पर जीत की हैट्रिक लगाई। 

2008: हरशरण सिंह की फिर जीत 
2008 में भी इस सीट पर भाजपा ने ही जीत दर्ज की। भाजपा ने एक बार फिर  हरशरण सिंह बल्ली को टिकट दिया। बल्ली ने हरि नगर सीट पर जीत का चौका लगाया। उन्होंने कांग्रेस के रमेश लांबा को 28,758 वोटों से हरा दिया। 

2013: आप की पहली जीत 
दिल्ली की राजनीति के लिए साल 2013 एक अहम कड़ी साबित हुआ। इस चुनाव में मुकाबले में कांग्रेस-भाजपा के अलावा इस बार भ्रष्टाचार आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी भी थी। हरि नगर  विधानसभा सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प रहा।  
2013 में भाजपा ने हरि नगर सीट अपनी सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के लिए छोड़ दी। अकाली दल ने यहां से श्याम शर्मा को टिकट दिया। वहीं, लगातार चार बार यहां से जीतने वाले हरशरण सिंह बल्ली कांग्रेस के टिकट पर मैदान में उतरे। हालांकि, जीत आप के जगदीप सिंह को मिली। आप उम्मीदवार ने शिरोमणि अकाली दल के श्याम शर्मा को 8,876 वोट से हरा दिया। हरशरण सिंह बल्ली 23,111  वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे।  

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दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

2015: आप के जगदीप सिंह को जीत 
2015 में फिर से दिल्ली में विधानसभा चुनाव करवाने पड़े। 2014 में मात्र 49 दिन सरकार चलाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था। फरवरी 2014 में जब लोकपाल विधेयक पारित नहीं हो पाया तो अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। 2015 में फिर से चुनाव कराए गए और केजरीवाल ने 70 में से 67 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की। 

हरि नगर सीट पर 2015 में भी आप के जगदीप सिंह ने जीत दर्ज की। आप उम्मीदवार ने भाजपा के अवतार सिंह हिट को 26,444 वोट से हराया। आप उम्मीदवार को 65,398 वोट मिले। भाजपा के अवतार सिंह हिट को 38,954 वोट से संतोष करना पड़ा।



 

2020: आप की राज कुमारी ढिल्लों जीती
2020 के विधानसभा चुनाव में आप आदमी पार्टी ने फिर जबरदस्त जनादेश हासिल किया। आप को 70 में से कुल 62 सीटों पर जीत मिली। हरि नगर  के नतीजों की बात करें तो यहां से आप की तरफ से राज कुमारी ढिल्लों को जीत मिली थी। आप ने भाजपा के तजिंदर पाल सिंह बग्गा को 20,131 वोट के अंतर से हरा दिया था। आप उम्मीदवार को 58,087 वोट मिले। भाजपा के तजिंदर पाल बग्गा को 37,956 वोट से संतोष करना पड़ा।

अबकी बार कैसे हैं समीकरण? 
2025 के चुनावों में आप ने इस सीट से मौजूदा विधायक राज कुमारी ढिल्लों का टिकट काट दिया है। आप ने कांग्रेस से आए सुरिंदर सेतिया को यहां से उतारा है। भाजपा ने श्याम शर्मा को टिकट दिया है। कांग्रेस ने प्रेम शर्मा को टिकट दिया है। 



 
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