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Hindi News ›   Election ›   Delhi Assembly Election 2025 Dwarka Assembly Seat Profile and History News In Hindi

Dwarka Assembly Seat: आप लगाएगी जीत की हैट्रिक या किसी और को चुनेगी द्वारका की जनता, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास

Mon, 03 Feb 2025 02:53 PM IST
संध्या कुमारी इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या कुमारी Updated Mon, 03 Feb 2025 02:53 PM IST
सार

Dwarka Seat: द्वारका सीट से आम आदमी पार्टी ने विनय मिश्र को टिकट दिया है। भाजपा ने प्रद्युमन राजपूत और कांग्रेस ने आदर्श शास्त्री को उतारा है। द्वारका सीट पर कांग्रेस को एक बार, भाजपा और आप को दो-दो बार जीत मिली है। आइये इस सीट का इतिहास जानते हैं... 

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Delhi Assembly Election 2025 Dwarka Assembly Seat Profile and History News In Hindi
दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में द्वारका विधानसभा सीट भी शामिल है। यह सीट 2008 में अस्तित्व में आई थी। द्वारका सीट पर अब तक एक उप चुनाव समेत कुल पांच विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इन पांच विधानसभा चुनावों में से एक बार कांग्रेस दो बार भाजपा और दो बार आम आदमी पार्टी को जीत मिली है। 2020 में यहां से आप के विनय मिश्रा जीते थे। इस सीट पर कुल 2,24,288 मतदाता वोट डालने के लिए पात्र हैं। इनमें से 1,21,484 पुरुष और 1,02,803 महिलाएं हैं बाकि 1 अन्य मतदाता है।  

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दिल्ली विधानसभा चुनाव के इतिहास में द्वारका में कब कौन जीता? कब कितने वोट पड़े? पिछले चुनाव में कैसे नतीजे रहे थे? इस बार कैसा मुकाबला हो सकता है? आइये जानते हैं…

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दिल्ली को विधानसभा मिलने की ऐसी है कहानी
दिल्ली को विधानसभा कैसे मिली, इसकी कहानी 1952 से शुरू हुई। 1952 पार्ट-सी राज्य के रूप में दिल्ली को एक विधानसभा दी गई। 1956 में उस विधानसभा को भंग कर दिया गया। 1966 में दिल्ली को एक महानगर परिषद दी गई।

दिल्ली राज्य विधानसभा 17 मार्च 1952 को पार्ट-सी राज्य सरकार अधिनियम, 1951 के तहत अस्तित्व में आई। 1952 की विधानसभा में 48 सदस्य थे। मुख्य आयुक्त को उनके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद का प्रावधान था, जिसके संबंध में राज्य विधानसभा को कानून बनाने की शक्ति दी गई थी। 

राज्य पुनर्गठन आयोग (1955) की सिफारिशों के बाद दिल्ली 1 नवंबर 1956 से भाग-सी राज्य नहीं रही। दिल्ली विधानसभा और मंत्रिपरिषद को समाप्त कर दिया गया और दिल्ली राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष प्रशासन के तहत केंद्र शासित प्रदेश बन गया। दिल्ली में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था और उत्तरदायी प्रशासन की मांग उठने लगी। इसके बाद दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 के तहत महानगर परिषद बनाई गई। यह एक सदनीय लोकतांत्रिक निकाय था जिसमें 56 निर्वाचित सदस्य और 5 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे।

इसके बाद भी विधानसभा की मांग उठती रही। 24 दिसंबर 1987 को भारत सरकार ने सरकारिया समिति (जिसे बाद में बालकृष्णन समिति कहा गया) नियुक्त की। समिति ने 14 दिसंबर 1989 को अपनी रिपोर्ट पेश की और सिफारिश की कि दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बना रहना चाहिए, लेकिन आम आदमी से जुड़े मामलों से निपटने के लिए अच्छी शक्तियों के साथ एक विधानसभा दी जानी चाहिए। बालाकृष्णन समिति की सिफारिश के अनुसार, संसद ने संविधान (69वां संशोधन) अधिनियम, 1991 पारित किया, जिसने संविधान में नए अनुच्छेद 239AA और 239AB डाले, जो अन्य बातों के साथ-साथ दिल्ली के लिए एक विधानसभा की व्यवस्था करते हैं। लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के मुद्दों पर विधानसभा को कानून बनाने का अधिकार नहीं था। 1992 में परिसीमन के बाद 1993 में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव बाद दिल्ली को एक निर्वाचित विधानसभा और मुख्यमंत्री मिला। 

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 2008: कांग्रेस के महाबल मिश्रा को मिली जीत 
2008 के विधानसभा चुनाव में द्वारका विधानसभा सीट अस्तित्व में आई। इस सीट पर पहली बार हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के महाबल मिश्रा को जीत मिली। महाबल मिश्रा ने भाजपा के प्रद्युम्न राजपूत को 13,981 वोट से हराया था।

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2009: भाजपा के प्रद्युम्न राजपूत को मिली जीत 
2009 के लोकसभा चुनाव में महाबल मिश्रा पश्चिमी दिल्ली लोकसभा सीट से जीतकर लोकसभा पहुंचे। इसके बाद उन्होंने द्वारका विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद हुए उप चुनाव में द्वारका सीट पर भाजपा के प्रद्युम्न राजपूत को जीत मिली। 

2013:  प्रद्युम्न राजपूत को फिर से मिली जीत 
दिल्ली की राजनीति के लिए साल 2013 एक अहम कड़ी साबित हुआ। इस चुनाव में मुकाबले में कांग्रेस-भाजपा के अलावा इस बार भ्रष्टाचार आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी भी थी। इस सीट पर मुकाबले में कोई बदलाव नहीं देखने को मिला।  

इस सीट पर आप को जीत नहीं मिली। भाजपा के प्रद्युम्न राजपूत ने आप के रवि कुमार सूर्यन को 5197 वोट से हरा दिया था। 

    

2015: आप को मिली पहली जीत 
2015 में फिर से दिल्ली में विधानसभा चुनाव करवाने पड़े। 2014 में मात्र 49 दिन सरकार चलाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था। फरवरी 2014 में जब लोकपाल विधेयक पारित नहीं हो पाया तो अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। 2015 में फिर से चुनाव कराए गए और केजरीवाल ने 70 में से 67 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की। 

द्वारका में भी इस बार आप को ही जीत मिली। आप के आदर्श शास्त्री ने मौजूदा विधायक प्रद्युम्न राजपूत को 39,366 वोट से हरा दिया था। आप को 79,729 और भाजपा को 40,363 वोट मिले थे।   

2020: आप के विनय मिश्रा की जीत 
2020 के विधानसभा चुनाव में आप आदमी पार्टी ने फिर जबरदस्त जनादेश हासिल किया। आप को 70 में से कुल 62 सीटों पर जीत मिली। द्वारका सीट पर आप ने नए चेहरे विनय मिश्रा को टिकट दिया। विनय मिश्रा ने भाजपा के प्रद्युम्न राजपूत को 14,387 वोट से हरा दिया था। आप को 71003 और भाजपा को 56616 वोट मिले थे। विनय मिश्रा 2008 में द्वारका से जीते महाबल मिश्रा के बेटे हैं। 

अबकी बार कैसे है समीकरण? 
इस बार द्वारका विधानसभा सीट से कुल 13 उम्मीदवार मैदान में हैं। आप ने द्वारका से मौजूदा विधायक विनय मिश्रा को ही टिकट दिया है। भाजपा ने फिर से प्रद्युम्न राजपूत पर ही दांव लगाया है। कांग्रेस ने आप से आए आदर्श शास्त्री को टिकट दिया है। 

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