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Ballimaran Assembly Seat: मुस्लिम बहुल सीट पर कभी जीत नहीं पाई भाजपा, क्या इस बार बदलेगा बल्लीमारान का इतिहास

Thu, 30 Jan 2025 06:01 AM IST
संध्या कुमारी फैक्ट चेक डेस्क, अमर उजाला
फैक्ट चेक डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या कुमारी Updated Thu, 30 Jan 2025 06:01 AM IST
सार

Ballimaran Seat: बल्लीमारान विधानसभा सीट चांदनी चौक लोकसभा क्षेत्र में आती है। इस सीट पर आज तक जीत नहीं सकी है। पिछले दो चुनाव से आप यहां से जीत रही है। कांग्रेस उम्मीदवार हारून यूसुफ लगातार पांच बार बल्लीमारान के विधायक रहे हैं।   

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Delhi Assembly Election 2025  Ballimaran Assembly Seat Profile and History News In Hindi
दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बल्लीमारान विधानसभा सीट दिल्ली की चांदनी चौक लोकसभा सीट के अंदर आती है। यह पुरानी दिल्ली का हिस्सा है। इस मुस्लिम बहुल सीट पर 1993 से 2013 तक कांग्रेस का कब्जा था। 2015 से यहां पर आप जीत रही है। वर्तमान में इस सीट से आप के इमरान हुसैन विधायक हैं। 

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दिल्ली विधानसभा चुनाव के इतिहास में बल्लीमारान  में कब कौन जीता? कब कितने वोट पड़े? पिछले चुनाव में कैसे नतीजे रहे थे? इस बार कैसा मुकाबला हो सकता है? आइये जानते हैं…

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दिल्ली को विधानसभा मिलने की ऐसी है कहानी
दिल्ली को विधानसभा कैसे मिली, इसकी कहानी 1952 से शुरू हुई। 1952 पार्ट-सी राज्य के रूप में दिल्ली को एक विधानसभा दी गई। 1956 में उस विधानसभा को भंग कर दिया गया। 1966 में दिल्ली को एक महानगर परिषद दी गई। 

दिल्ली राज्य विधानसभा 17 मार्च 1952 को पार्ट-सी राज्य सरकार अधिनियम, 1951 के तहत अस्तित्व में आई। 1952 की विधानसभा में 48 सदस्य थे। मुख्य आयुक्त को उनके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद का प्रावधान था, जिसके संबंध में राज्य विधानसभा को कानून बनाने की शक्ति दी गई थी। 

राज्य पुनर्गठन आयोग (1955) की सिफारिशों के बाद दिल्ली 1 नवंबर 1956 से भाग-सी राज्य नहीं रही। दिल्ली विधानसभा और मंत्रिपरिषद को समाप्त कर दिया गया और दिल्ली राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष प्रशासन के तहत केंद्र शासित प्रदेश बन गया। दिल्ली में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था और उत्तरदायी प्रशासन की मांग उठने लगी। इसके बाद दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 के तहत महानगर परिषद बनाई गई। यह एक सदनीय लोकतांत्रिक निकाय था जिसमें 56 निर्वाचित सदस्य और 5 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे।

इसके बाद भी विधानसभा की मांग उठती रही। 24 दिसंबर 1987 को भारत सरकार ने सरकारिया समिति (जिसे बाद में बालकृष्णन समिति कहा गया) नियुक्त की। समिति ने 14 दिसंबर 1989 को अपनी रिपोर्ट पेश की और सिफारिश की कि दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बना रहना चाहिए, लेकिन आम आदमी से जुड़े मामलों से निपटने के लिए अच्छी शक्तियों के साथ एक विधानसभा दी जानी चाहिए। बालाकृष्णन समिति की सिफारिश के अनुसार, संसद ने संविधान (69वां संशोधन) अधिनियम, 1991 पारित किया, जिसने संविधान में नए अनुच्छेद 239AA और 239AB डाले, जो अन्य बातों के साथ-साथ दिल्ली के लिए एक विधानसभा की व्यवस्था करते हैं। लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के मुद्दों पर विधानसभा को कानून बनाने का अधिकार नहीं था। 1992 में परिसीमन के बाद 1993 में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव बाद दिल्ली को एक निर्वाचित विधानसभा और मुख्यमंत्री मिला। 

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कैसा है बल्लीमारान  सीट का इतिहास 
इस सीट के चुनाव का इतिहास बहुत पुराना है। यहां 1951 में सबसे पहले चुनाव हुए थे। इस चुनाव में कांग्रेस के सुल्तान यार खान ने भारतीय जनसंघ के शिव स्वरूप शर्मा को 1278 वोट से हरा दिया था। इसके बाद 1972 में यहां चुनाव हुआ। 1972 के इस चुनाव में बल्लीमारन सीट पर निर्दलीय मो. अहमद ने जीत दर्ज की। मो. अहमद ने सीपीआई की सरला शर्मा को महज 452 वोट से हरा दिया। 
1977 में यहां फिर से बल्लीमारन सीट पर चुनाव हुए। इस चुनाव में जनता पार्टी के विश्वम्भर दत्त शर्मा ने कांग्रेस के मेहताब चंद जैन को 6,047 वोट से हरा दिया। 1983 में हुए चुनावों में बल्लीमारान सीट पर फिर से कांग्रेस के मेहताब चंद जैन को जीत मिली। बीजेपी रति राम गोटे वाले को हार का सामना करना पड़ा।

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Delhi Assembly Election 2025  Ballimaran Assembly Seat Profile and History News In Hindi
दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

1993: पहली बार जीते हारून यूसुफ 
दिल्ली को विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद 1993 में पहली बार विधानसभा के चुनाव हुए। इस चुनाव में कांग्रेस के हारून यूसुफ ने जीत दर्ज की। कांग्रेस उम्मीदवार ने भाजपा के विशम्भर दत्त शर्मा को 1491 वोट से हरा दिया था। 


 

1998: लगातार दूसरी बार कांग्रेस की जीत 
1998 के विधानसभा चुनाव में दिल्ली की सत्ता बदल गई। भाजपा को हराकर कांग्रेस ने सरकार बनाई। हालांकि, बल्लीमारान के नतीजों में कोई बदलाव नहीं आया। यहां से एक बार फिर  कांग्रेस के टिकट पर हारून यूसुफ ने जीत दर्ज की। इस बार भी उन्होंने भाजपा के विश्वम्बर दत्त शर्मा को हराया। इस बार हारून यूसुफ की जीत का अंतर 23,843 वोट का रहा। 

2003: हारून यूसुफ ने लगाई जीत की हैट्रिक
2003 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने दिल्ली में अपनी सत्ता बरकार रखी। बल्लीमारान में भी कांग्रेस की जीत की सिलसिला जारी रहा। यहां से कांग्रेस के हारून यूसुफ ने जीत की हैट्रिक लगाई। इस बार हारून यूसुफ ने निर्दलीय उम्मीदवार सतीश चंद जैन को 22,591 वोट से हरा दिया। भाजपा के राज किशोर गुप्ता तीसरे नंबर पर खिसक गए। गुप्ता अपनी जमानत भी नहीं बचा सके।  

2008: कांग्रेस ने लगाया जीत का चौका
2008 के विधानसभाच चुनाव में दिल्ली में शीला दीक्षित ने लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की। वहीं, बल्लीमारान सीट पर हारून यूसुफ ने अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखा।  कांग्रेस के हारून यासुफ ने भाजपा के मोती लाल सोढ़ी को 6,237 वोट से हरा दिया। 

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दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

2013: कांग्रेस के हारून यूसुफ की जीत 
दिल्ली की राजनीति के लिए साल 2013 एक अहम कड़ी साबित हुआ। इस चुनाव में मुकाबले में कांग्रेस-भाजपा के अलावा इस बार भ्रष्टाचार आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी भी थी। बल्लीमारान विधानसभा सीट पर मुकाबला काफी दिलचस्प रहा। बल्लीमारान सीट की बात करें तो यहां से कांग्रेस के हारून यूसुफ ने लगातार पांचवीं बार जीत दर्ज की। इस चुनाव में हारून यूसुफ ने भाजपा के मोती लाल सोढ़ी को 8093 वोट से मात दी। बसपा के टिकट पर उतरे इमरान हुसैन तीसरे स्थान पर रहे। वहीं, पहली बार चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी की फरहाना अंजुम की जमानत जब्त हो गई। 

2015: आप को मिली पहली जीत
2015 में फिर से दिल्ली में विधानसभा चुनाव कराने पड़े। 2014 में मात्र 49 दिन सरकार चलाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था। फरवरी 2014 में जब लोकपाल विधेयक पारित नहीं हो पाया तो अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। 2015 में फिर से चुनाव कराए गए और केजरीवाल ने 70 में से 67 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की। 
बल्लीमारान सीट पर लगातार पांच बार से जीत दर्ज कर रहे हारून यूसुफ को हार का सामना करना पड़ा। आप के इमरान हुसैन ने भाजपा के श्याम लाल मोरवाल को 33,877 वोट से हरा दिया। 2015 में जीत दर्ज करने वाले इमरान हुसैन 2013 में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। आप के उम्मीदवार को 57,118 वोट मिले। वहीं, भाजपा के उम्मीदवार को 23,241 वोट मिले। बल्लीमारन सीट पर लगातार पांच बार जीत दर्ज करने वाले कांग्रेस के हारून यूसुफ इस बार अपनी जमानत तक नहीं बचा सके। तीसरे नंबर पर कांग्रेस के हारून यूसुफ को 13205 वोट मिले।

2020: लगातार दूसरी बार आप की जीत
2020 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने फिर जबरदस्त जनादेश हासिल किया। आप को 70 में से कुल 62 सीटों पर जीत मिली। बल्लीमारान सीट की बात करें तो इस सीट पर एक बार आम आदमी पार्टी को जीत मिली। आप के इमरान हुसैन लगातार दूसरी बार जीते। आप के इमरान हुसैन ने भाजपा की महिला उम्मीदवार लता को 36,172 वोट से हरा दिया। आप के उम्मीदवार को 65,644 वोट मिले। भाजपा उम्मीदवार को 29472 मिले। वहीं,  कांग्रेस के हारून यूसुफ एक बार फिर अपनी जमानत नहीं बचा सके। उन्हें केवल 4,802 वोट से संतोष करना पड़ा। 

अबकी बार कैसे हैं समीकरण?
शाहजहांनाबाद के दिल में स्थित बल्लीमारान विधानसभा क्षेत्र पर हर चुनाव में दिल्ली की नजरें टिक जाती हैं। मुस्लिम बहुल्य यह इलाका कभी कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता था। भाजपा यहां हिंदू कार्ड खेलकर किला भेदने की कोशिश करती रही, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। पिछले दो चुनावों में आप ने न केवल जीत दर्ज की, बल्कि कांग्रेस को तीसरे स्थान पर धकेल दिया। इस बार क्षेत्र में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं।
लगातार दो बार जीत दर्ज करने वाले आप उम्मीदवार इमरान हुसैन को केजरीवाल के साथ-साथ आतिशी सरकार में मंत्री बनने का अवसर भी प्राप्त किया। भाजपा अब तक इस क्षेत्र में जीत का स्वाद नहीं चख सकी है। हालांकि, छह बार उसके उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे हैं। वर्ष 2003 के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार तीसरे स्थान पर खिसक गए थे। भाजपा ने इस बार कमल बागड़ी को टिकट दिया है। कमल बागड़ी दिल्ली नगर निगम में वॉर्ड 80 रामनगर के पार्षद है। कांग्रेस ने एक बार फिर हारून यूसुफ ने टिकट दिया है।

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