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Assam: ब्रह्मपुत्र नदी पर बने पुल पर शुरू हुई सियासत, निर्माण के लिए श्रेय लेने की होड़ में राजनीतिक दल

Mon, 06 May 2024 12:18 PM IST
मेघा झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा झा Updated Mon, 06 May 2024 12:18 PM IST
सार

इन दिनों भारत में सबसे लंबी नदी के पुल का निर्माण राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। यह पुल ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाया जाएगा, जोकि असम में धुबरी को मेघालय के फुलवारी से जोड़ा जाएगा। इस पुल के निर्माण से दोनों राज्यों के बीच व्यापार आसान हो जाएगा। इस दिनों हर राजनीतिक पार्टी इसे बनवाने के लिए अपने अपने दावे कर रहे हैं।

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Assam: Politics started on the bridge built on Brahmaputra river, political parties competing to take credit
ब्रह्मपुत्र नदी पर बनने वाला पुल - फोटो : एएनआई

विस्तार

इन दिनों भारत में सबसे लंबी नदी के पुल का निर्माण राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। यह पुल ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाया जाएगा, जोकि असम में धुबरी को मेघालय के फुलवारी से जोड़ा जाएगा। इस पुल के निर्माण से दोनों राज्यों के बीच व्यापार आसान हो जाएगा। इस दिनों हर राजनीतिक पार्टी इसे बनवाने के लिए अपने अपने दावे कर रहे हैं।
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20 किलोमीटर लंबे पुल का निर्माण 2027 तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ), असम गण परिषद (एजीपी) और ग्रेस पार्टी के बीच चुनावी मुकाबला चल रहा है। और अब इस 20 किलोमीटर लंबे पुल का निर्माण तीनों पार्टी का चुनावी मुद्दा बन गया है।
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बता दें कि इस पुल की आधारशिला 2021 में रखी गई थी। जिसके समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आए थे। उन्होंने कहा कि रोजमर्रा के यात्रियों, छात्रों और व्यापारियों को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। 
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एक निवासी यह भी कहा कि अगर पुल बन जाएगा तो बहुत कम समय मे लोग मेघालय पहुंच सकते हैं। क्योंकि नाव से माल परिवहन में परेशानी होती है। पुल के साथ यह बहुत आसान होगा, नाव से लगभग तीन घंअे लग जाते हैं। एक अन्य छात्र ने कहा कि एक बार पुल बन जाए तो हमारी काफी मदद होगी। नाव से यात्रा में ज्यादा समय लगता है। बड़ी नदी है, जो खतरनाक है, इसके बनने से दोनों राज्यों के लोगों को भी फायदा होगा।

अभी तीन बड़ी पार्टी चुनावी अभियानों में इसे चुनावी मुद्दा बना लिया है। एनडीए ने 2021 में इस पार्टी का निर्माण शुरू किया था, नींव भी रखी थी। वहीं एआईयूडीएफ अध्यक्ष और धुबरी के सांसद बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि यल पुल उनके प्रयासों का नतीजा है। उनका दावा है कि उन्होंने इस मुद्दे को कांग्रेस सरकार के दौरान और फिर भाजपा सरकार के दौरान संसद में उठाया था। वहीं कांग्रेस पार्टी ने भी इसका श्रेय लेने की पूरी कोशिश की। 


असम के चार संसदीय क्षेत्र में 7 मई को तीसरे चरण के मतदान होने वाले हैं। रविवार को चुनाव प्रचार समाप्त हो चुका है। चार लोकसभा क्षेत्र में लगभग 81 लाख मतदाता भी है, जो अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
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