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क्यों फटते हैं बादल...? कैसे रोक सकते हैं तबाही, जानें यहां

Sun, 25 Aug 2019 02:49 PM IST
Garima Garg एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: Garima Garg Updated Sun, 25 Aug 2019 02:49 PM IST
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Why do clouds burst and How to stop the destruction?

भारी वर्षा के कारण उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसी पहाड़ी इलाकों में हाहाकार मचा हुआ है। बारीष के साथ-साथ बादल फटने जैसी भयानक तबाही भी सुनने में आ रही हैं। इसके अलावा भूस्खलन से पहाड़ टूट रहे हैं, जिसके कारण चमोली, उत्तरकाशी, लामबगड़, बागेश्वर और टिहरी में हालात काफी बिगड़े हुए हैं। यही कारण है कि बच्चों की सुलरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूल-कॉलेज बंद हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं कि आखिर बादल फटना कहते किसे हैं और इसके पीछे कारण क्या है? पढ़ते हैं आगे...

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बारीश क्यों बरसती है?
संघनित बादलों का नमी बढ़ने पर बूंदों की शक्ल में बरसना बारिश कहलाता है।

बादल फटना क्या है?
अगर किसी क्षेत्र विशेष में भारी बारिश की संभावनाओं वाला बादल एकाएक बरस जाए, तो उसे बादल का फटना कहते हैं। इसमें थोड़े समय में ही असामान्य बारिश होती है।

रोकथाम के उपाय?
बादल को फटने से रोकने के कोई ठोस उपाय नहीं हैं। पर पानी की सही निकासी, मकानों की दुरुस्त बनावट, वन क्षेत्र की मौजूदगी और प्रकृति से सामंजस्य बनाकर चलने पर इससे होने वाला नुकसान कम हो सकता है।
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बादल फटने की समस्याएं ज्यादातर कहां देखी जाती हैं?
बादल फटने की घटनाएं पहाड़ी क्षेत्रों में ही होती है। हालांकि वर्ष 2005 में मुंबई में भी बादल फटने की घटनाएं हुई थी। देखिए कहां कहां हुई थी बादल फटने की बड़ी घटनाएं।

भारत में
  • नवंबर, 1970- हिमाचल के बरोत में रिकॉर्ड 38 मिमी।
  • जुलाई, 2005- मुंबई 8-10 घंटे में करीब 950 मिमी तक बारिश।
  • अगस्त, 2009- जम्मू-कश्मीर के लेह में 200 से अधिक की मौत, भारी तबाही।
उत्तराखंड में
  • 1979- तवाघाट, पिथौरागढ़- 22 की मौत।
  • 1983- बागेश्वर,    37 की मौत।
  • 1995- रैतोली, पिथौरागढ़- 16 की मौत।
  • 1999- मदमहेश्वर घाटी- 109 की मौत।
  • 12 जुलाई, 2007- चमोली के सुरीखर्क में 8 लोगों की मौत, भारी तबाही।
  • 7 अगस्त, 2009- पिथौरागढ़ के ला, चचना और बेड़ूमहर में     मलबे के ढेर में 43 लोग जमींदोज हो गए।
  • 18 अगस्त, 2011- बागेश्वर के शुमगढ़ में भूस्खलन, स्कूल की छत गिरने से 18 बच्चों की मौत।
  • 23 अगस्त, 2011- सहस्त्रधारा के निकट कारलीगाढ़ गांव पांच मरे, खेती की जमीन नष्ट।
  • 24 जुलाई, 2013- चमोली जिले में नंदप्रयाग के पास कई गांवों में भारी तबाही, दो लोगों की मौत।
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