कौन हैं विश्वा राजाकुमार: मात्र 8.4 सेकंड में यह कारनामा कर बन गए वर्ल्ड चैंपियन; भारत का नाम किया रोशन
Memory League World Championship: 20 वर्षीय भारतीय छात्र विश्वा राजाकुमार ने मेमोरी लीग वर्ल्ड चैंपियनशिप 2025 में 13.5 सेकंड में 80 रैंडम नंबर और 8.4 सेकंड में 30 चित्रों को याद कर भारत को गौरवान्वित किया।
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Who is Vishvaa Rajakumar: भारतीय छात्र विश्वा राजाकुमार ने मेमोरी लीग वर्ल्ड चैंपियनशिप 2025 में इतिहास रच दिया है। 20 साल के विश्वा राजाकुमार ने फरवरी की शुरुआत में मेमोरी लीग वर्ल्ड चैम्पियनशिप जीती, जो एक ऑनलाइन प्रतियोगिता थी। जिसमें दुनिया भर के प्रतिभागी हिस्सा लेते हैं। इसमें विश्वा राजाकुमार ने 80 रैंडम नंबर को सिर्फ 13.5 सेकेंड और 8.40 सेकंड में 30 चित्रों को याद करके गोल्ड जीत लिया।
मेमोरी लीग वर्ल्ड चैंपियनशिप में दर्ज की जीत
उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, राजाकुमारपुडुचेरी स्थित मनाकुला विनयगर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के छात्र हैं। इस प्रतियोगिता में विश्वा राजाकुमार ने 5,000 अंकों के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। उन्होंने 80 रैंडम नंबर को केवल 13.50 सेकंड में और 30 चित्रों को महज 8.40 सेकंड में याद किया।
राजाकुमार ने बताई अपनी मेमोरी ट्रिक्स
राजाकुमार ने न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत करते हुए अपनी मेमोरी ट्रिक्स और रणनीतियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा, "हाइड्रेशन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिमाग की कार्यक्षमता को बढ़ाता है। जब आप चीजों को याद करते हैं, तो आप आमतौर पर अपनी आवाज को अंदर से महसूस करते हैं, इसलिए गला साफ रखना जरूरी है।"
उन्होंने यह भी बताया, "यदि आप किताब पढ़ रहे हैं तो आप उसे जोर से नहीं पढ़ते, लेकिन आप उसे अपने भीतर महसूस करते हैं। अगर आप ज्यादा पानी पीते हैं, तो आपकी याददाश्त तेज और स्पष्ट रहती है।"
राजाकुमार ने अपनी जीत के बारे में कहा, "जब मैंने यह उपलब्धि प्राप्त की, तो मैं रो रहा था। मुझे 80 रैंडम नंबर दी जाती हैं, जिन्हें मुझे जितना जल्दी हो सके याद करना होता है। फिर मुझे उन्हें सही तरीके से लिखने का समय मिलता है और मैंने सभी 80 अंक सही किए।" उनका कहना है कि भविष्य में वे मेमोरी ट्रेनर बनने का प्रयास करेंगे और भारत में मेमोरी से संबंधित एक संस्था स्थापित करेंगे ताकि अन्य लोग भी इन तकनीकों को सीख सकें।
राजाकुमार ने कहा, "मेरा लक्ष्य बड़ा बनना है।" उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और मेमोरी की ताकत से यह साबित कर दिया कि सही तकनीक और निरंतर प्रयास से कोई भी कठिनाई पार की जा सकती है।
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