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दुनियाभर में हो रही है ऑस्कर विजेता फिल्म 'पैरासाइट' की चर्चा, क्या है इसकी कहानी?

Thu, 13 Feb 2020 01:46 PM IST
बीबीसी हिंदी Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Thu, 13 Feb 2020 01:46 PM IST
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What is the story of Oscar winning film Parasite from south korean director Bong Joon Ho
पैरासाइट (फाइल फोटो) - फोटो : WWW.PARASITE-MOVIE.COM / BBC

दक्षिण कोरियाई फिल्म पैरासाइट ने 2020 के ऑस्कर में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार जीत कर इतिहास रच दिया है। ऑस्कर के 92 साल पुरने इतिहास में ये पहली बार है जब विदेशी भाषा की एक फिल्म (एशियाई फिल्म) को बेस्ट फीचर फिल्म का पुरस्कार मिला है।

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निर्माता क्वाक सिन आए और निर्देशक बोंग जून-हो की इस फिल्म को कुल छह पुरस्कारों के लिए नॉमिनेट किया गया था। इसे सर्वश्रेष्ठ फिल्म के साथ-साथ, सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म और ओरिजिनल स्क्रीनप्ले का ऑस्कर भी मिला है।
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इस फिल्म का प्रीमियर 2019 के कान फिल्म फेस्टिवल में भी हुआ था। ओरिजिनल स्क्रीनप्ले के लिए ये फिल्म बाफ्टा में भी पुरस्कार जीत चुकी है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जेई इन ने जून-हो और फिल्म से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी और कहा कि "मुश्किल परिस्थितियों से जूझ रहे लोगों के संघर्ष की कहानी दिखने के लिए आपका शुक्रिया।"
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बताया जा रहा है कि पैरासाइट एक ब्लैक कॉमेडी फिल्म है, जिसमें बोंग जून-हो ने सामाजिक असमानता, पूंजीवाद और मूलभूत सुविधाओं के लिए लोगों के बीच के संघर्ष को दिखाने की कोशिश की है।

आगे पढ़ें.. पैरासाइट फिल्म की कहानी

What is the story of Oscar winning film Parasite from south korean director Bong Joon Ho
पैरासाइट फिल्म का एक दृश्य - फोटो : BBC

पैरासाइट की कहानी दो परिवारों के बीच के रिश्तों की कहानी है जहां एक संपन्न परिवार दूसरे परिवार की सेवाओं पर निर्भर है। तो दूसरा परिवार अपना पेट भरने के लिए पहले परिवार की संपत्ति पर निर्भर है।

किम परिवार एक मकान के बेसमेंट में रहता है और इस परिवार को लगता है कि वो पार्क परिवार के लिए काम कर आराम की जिंदगी बसर कर सकते हैं। किम परिवार के मुखिया हैं की-ताएक और उनका परिवार छोटे मोटे काम कर गुजर बसर करता है। परिवार के बेटे की-वू का मित्र एक दिन उसे बताता है कि वो एक धनी परिवार (पार्क परिवार) की बेटी को ट्यूशन देता था लेकिन उसे आगे की पढ़ाई के लिए विदेश जाना है।

वो कहता है कि वो चाहता है की-वू उसे ट्यूशन देना शुरु करे। मुश्किल से जीवन गुजारने वाला की-वू कॉलेज तक पास नहीं कर सका, लेकिन वो इसके लिए तैयार हो जाता है और फर्जी डिग्री तक बनवा लेता है।

पार्क परिवार से मुलाकात के बाद की-वू को पता चल जाता है कि उसे अच्छी जिंदगी के लिए इस परिवार से जुड़े रहना होगा। जब पार्क परिवार को अपने बेटे के लिए एक आर्ट टीचर की जरूरत होती है, तो वो इसके लिए अपनी बहन का नाम सुझाता है। अपनी बहन के लिए भी वो फर्जी डिग्री बनवाता है।

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आराम की जिंदगी बसर करने के लिए ये दोनों मिल कर किसी न किसी तरह पार्क परिवार के सभी नौकरों की छुट्टी करवाते हैं और अपने परिवार के सदस्यों को वहां काम दिलवाते हैं। 

पार्क परिवार के लिए सालों से काम कर रही मून क्वांग नौकरी से निकाले जाने के बाद एक दिन अचानक अपना सामान लेने लौटती है। उसने अपने पति कोमकान को बेसमेंट में सालों से छिपा कर रखा था। ये बात किम परिवार के सदस्यों को पता चलती है।

लेकिन इस दौरान मून क्वांग को पता चलता है कि पार्क परिवार में अलग-अलग नाम से काम करने आए सभी लोग किम परिवार के सदस्य हैं। वो उन्हें ब्लैकमेल करती है और कहती है कि वो उन्हें वहीं बेसमेंट में रहने दें।

आगे की कहानी खुद को जिंदा रखने की कोशिश में अपने झूठ को बनाए रखने और परिवार के सदस्यों की जान बचाने की है, जिसमें पूरा किम परिवार बिखर जाता है।

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