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मोसाद : आतंकियों की किलिंग मशीन है यह एजेंसी, जानिए कैसे करती है काम और क्या हैं बड़े ऑपरेशन

Sat, 12 Jun 2021 01:21 AM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Sat, 12 Jun 2021 01:21 AM IST
सार

मोसाद का नाम बड़ी इज्जत के साथ लिया जाता है। क्योंकि यह एजेंसी अपने मुल्क के दुश्मनों के खिलाफ एक किलिंग मशीन की भांति काम करती है। आइए जानते हैं क्या है मोसाद, किस मुल्क से है नाता, कैसे करती है काम और जानिए इसके बड़े ऑपरेशन के बारे में  ... 

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What is Mossad?, How does Mossad work?, Major operations of Mossad?, Know everything
मोसाद : इस्राइल की खुफिया एजेंसी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

मोसाद, एक ऐसा नाम जिसे सुनते ही थर्रा जाते हैं बड़े-बड़े आतंकी सूरमा। दुनिया के नक्शे पर एक छोटे से देश की खुफिया एजेंसी जिसके नाम से आतंकी संगठन ही नहीं, उनके आका और हुक्मरान भी खौफ खाते हैं। वैसे तो दुनिया में अमेरिका, ब्रिटेन, भारत और रूस से लेकर चीन तक कई देशों में कईं खुफिया एजेंसियां हैं, जो बेहद शक्तिशाली और ताकतवर वाली मानी जाती हैं। 

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इनके गुप्तचरों की पहुंच पूरी दुनिया में होती है, लेकिन इनमें मोसाद का नाम बड़ी इज्जत के साथ लिया जाता है। क्योंकि यह एजेंसी अपने मुल्क के दुश्मनों के खिलाफ एक किलिंग मशीन की तरह काम करती है। आइए जानते हैं क्या है मोसाद, किस मुल्क से है नाता, कैसे करती है काम और जानिए इसके बड़े ऑपरेशन के बारे में  ... 
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मोसाद इस्राइल की खुफिया एजेंसी है। वैश्विक स्तर पर मोसाद को गुप्त ऑपरेशंस को अंजाम देने में दुनिया की टॉप खुफिया एजेंसी माना जाता है। मोसाद अपने दुश्मनों को उनके ही देश में घुसकर चुन-चुनकर मारने के लिए जानी जाती है। आमतौर पर ऐसे ऑपरेशन को अंजाम देना बेहद ही कठिन होता है, लेकिन मोसाद को ऐसे अभियानों में महारत हासिल है।
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मोसाद अपना निशाना कभी नहीं चूकती है। क्योंकि अपना मिशन पूरा करने से पहले मोसाद के एजेंट अपने टारगेट को लेकर पूरी रिसर्च करते हैं। साथ ही मिशन को अंजाम देने के बाद की परिस्थितियों से निपटने का भी पूरा इंतजाम पहले से करके रखते हैं। 

इजरायल की तीन खुफिया एजेंसियों में से एक 

जानकारी के अनुसार, इस्राइल के तीन बड़े खुफिया संगठन अमन, शिन बेट और मोसाद हैं। इनमें से एक मोसाद के भी दो काउंटर टेररिज्म यूनिट हैं। पहली यूनिट है मेटसाडा जो दुश्मन पर हमला करती है। जबकि दूसरी किडोन है। इसका काम गुप्त ही रखा गया है। लेकिन मोटे तौर पर यह आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करती है। मेटसाडा की भी अपनी अलग यूनिट्स हैं। 

1949 में हुई थी मोसाद की स्थापना 

  • यहूदियों के देश इस्राइल में 13 दिसंबर, 1949 के दौरान वहां के तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड बेन गूरियन की पहल पर सेना के खुफिया विभाग, आंतरिक सुरक्षा सेवा और विदेश विभाग के साथ तालमेल और आपसी सहयोग को बढ़ाने के लिए मोसाद की स्थापना की गई थी। 
  • इस्राइल सरकार ने मोसाद का गठन आतंकवाद से लड़ने के लिए किया था। बाद में 1951 में मोसाद को इस्राइल के प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन कर दिया गया। इसकी रिपोर्टिंग भी प्रधानमंत्री को ही होती है। 
  • रियूवेन शिलोआ को मोसाद का पहला डायरेक्टर बनाया गया था। शिलोआ 1952 में रिटायर हुए थे। इसके बाद सकी कमान इससर हरल के पास आ गई थी।  
  • हरल ने अपने 11 साल की कार्यावधि में इसे खूंखार और आतंकियों की किलिंग मशीन के रूप में तब्दील कर दिया। 
  • आज के दौर में मोसाद के पास टॉप क्लास सीक्रेट एजेंट, हाईटेक इंटेलीजेंस टीम, शार्प शूटर और कातिल हसीनाओं समेत कई तरह के जासूस और गुप्त योद्धाओं की फौज है। मोसाद के एजेंट्स इतनी सफाई से काम को अंजाम देते हैं कि कोई सबूत भी नहीं बचता। 


मोसाद के प्रमुख कार्य  

  • अपनी स्थापना के बाद से, मोसाद सरकार की जरूरतों के आधार पर खुफिया जानकारी जुटाने में शामिल रही है। 
  • यह काम विभिन्न माध्यमों से किया जाता है, जैसे ह्यूमन इंटेलीजेंस और सिग्नल इंटेलीजेंस आदि तरीकों से, जिसे दूसरा कोई समझ न सके।  
  • आज भी मोसाद ऐसे ही काम करती है। मोसाद ने अन्य देशों की खुफिया सेवाओं के साथ खुफिया संबंध भी विकसित और बनाए रखा है।
  • मोसाद उन देशों के साथ गुप्त संबंध स्थापित करने में भी शामिल है जो खुले तौर पर साथ इस्राइल का साथ देने से बचते हैं। 
  • शुरुआती दौर में मोसाद ने यहूदियों को अशांत देशों से छुड़ाने और उन्हें इस्राइल लाने का काम किया। 
  • जैसे इथियोपिया के यहूदियों को इस्राइल लाने के लिए मिवत्जा मोशे यानी ऑपरेशन मूसा था।
  • सामान्य तौर पर मोसाद विदेशों में यहूदी और इस्राइली लोगों पर लक्षित आतंकी घटनाओं के खिलाफ युद्ध में महारत हासिल है।
  • वर्षों से, मोसाद ने उन देशों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जो गैर-पारंपरिक हथियार प्राप्त कर इस्राइल के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। 


मोसाद के बड़े ऑपरेशन 

  • 2020 ईरानी परमाणु वैज्ञानिक का खात्मा! : नवंबर 2020 में ईरान के सैन्य परमाणु कार्यक्रम शीर्ष वैज्ञानिक ब्रिगेडियर जनरल मोहसिन फखरीजादेह की हत्या कर दी गई है। हालांकि, मोसाद ने तब इसकी जिम्मेदारी खुले तौर पर नहीं ली, लेकिन जून 2021 में मोसाद के मुखिया ने इसे लेकर अहम खुलासे किए थे। 
  • 1976 का ऑपरेशन थंडरबोल्ट : अरब के आतंकियों द्वारा हाइजैक फ्रांसीसी विमान को मोसाद अपने 94 नागरिकों के साथ युगांडा से मुक्त कराकर लाई थी। यह ऑपरेशन काफी चर्चित रहा था।  
  • 1972 रैथ ऑफ गॉड (Wrath of God): 1972 में म्यूनिख ओलिंपिक के लिए एकत्र इस्राइली ओलिंपिक टीम के 11 खिलाड़ियों की बंधक बनाकर हत्या का बदला फलस्तीनी आतंकियों से लिया। यह ऑपरेशन करीब 20 सालों तक चला और मोसाद ने सभी आतंकियों से चुन-चुनकर बदला लिया।

  • 1960 में रूसी मिग-21 को इस्राइल लाना : उस दौर में सोवियत संघ रूस का मिग-29 सबसे उन्नत लड़ाकू विमान माना जाता था। इसे पाने में जब अमेरिका की सीआईए भी विफल रही तो फिर मोसाद की महिला एजेंट ने 1964 में इसे कर दिखाया। हालांकि, 1962 में इसी मिशन पर एक मोसाद एजेंट पकड़ा गया था, जिसे फांसी दे दी गई थी। 
  • 1960 अर्जेंटीना में सीक्रेट मिशन : मोसाद ने अर्जेंटीना में 1960 में एक सीक्रेट मिशन को अंजाम देते हुए नाजी युद्ध के अपराधी एडोल्फ एकमैन को गुपचुप तरीके से अपहरण करके इस्राइल ले आई। बाद में मुकदमा चलाकर उसे सजा दी गई। इस मिशन को पांच एजेंट्स ने पूरा किया था। 

  • मोसाद ने अमेरिका के लिए ईरान में घुस कर अलकायदा के नंबर दो आतंकी अल मसरी को मार गिराया। फिर ईरान में घुस कर आतंकी अबु मोहम्मद का भी खात्मा किया।  
  • फलस्तीनी नेता यासिर अराफात के राइट हैंड खलील अल वजीर उर्फ अबू जिहाद को ट्यूनिशिया में टूरिस्ट बनकर गए मोसाद के एजेंट ने परिवार के सामने ही 70 गोलियां मारी थीं। 
  • अपने ही देश के परमाणु कार्यक्रम की जानकारी लीक करने वाले बागी वैज्ञानिक वनुनु को पकड़ने के लिए मोसाद ने अपनी कातिल जांबाज हसीनाओं का इस्तेमाल किया और उसे प्रेम जाल में फंसाकर वापस इस्राइल ले आई। 

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