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Education Loan: सुप्रीम कोर्ट की प्रशासन को दो टूक- जम्मू-कश्मीर के युवाओं को शिक्षित करके बढ़ावा देने की जरूरत

Fri, 25 Mar 2022 08:37 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: देवेश शर्मा Updated Fri, 25 Mar 2022 08:37 PM IST
सार

Supreme Court on Education Loan of Kashmiri Girl: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बांग्लादेश के एक कॉलेज से एमबीबीएस कर रही एक युवा कश्मीरी लड़की को राहत प्रदान की है। दरअसल, छात्रा की वित्तीय सहायता सिर्फ इसलिए रोक दी गई थी, क्योंकि उसने दूसरे कॉलेज में प्रवेश ले लिया था।

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We need to promote youths of Jammu Kashmir by educating them, says Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण मामले में जम्मू-कश्मीर प्रशासन को नसीहत दी है। शीर्ष अदालत ने कहा कि हमें जम्मू-कश्मीर के युवाओं को बढ़ावा देने की जरूरत है। उन्हें उच्च शिक्षा का हर संभव मौका उपलब्ध कराया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय की खंडपीठ के फैसले के खिलाफ जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से दायर चुनौती याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान, कोर्ट ने उपरोक्त टिप्पणी करते हुए प्रशासन की चुनौती याचिका को खारिज कर दिया। 

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पहले हाईकोर्ट की खंडपीठ ने दी थी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बांग्लादेश के एक कॉलेज से एमबीबीएस कर रही एक युवा कश्मीरी लड़की को राहत प्रदान की है। दरअसल, छात्रा की वित्तीय सहायता सिर्फ इसलिए रोक दी गई थी, क्योंकि उसने दूसरे कॉलेज में प्रवेश ले लिया था। युवती ने पहले मामले को हाईकोर्ट की एकल पीठ में उठाया था, जहां राहत नहीं मिलने के बाद वह उच्च न्यायालय की खंडपीठ में अपील की। खंडपीठ ने एकल पीठ के फैसले को पलटते हुए उसे एजुकेशन लोन समय पर जारी करने के निर्देश दिए थे। इसके खिलाफ जम्मू- कश्मीर प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसे शुक्रवार को शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया।  

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छात्रा का शैक्षणिक करियर प्रभावित हो सकता है

सुनवाई के दौरान जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने लड़की मुबशीर अशरफ भट को वित्तीय सहायता जारी करने के आदेश देते हुए कहा कि हमें जम्मू-कश्मीर के युवाओं को शिक्षित करके उन्हें बढ़ावा देने की जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि प्रशासन की अपील पर विचार किया तो इसका मतलब होगा कि छात्रा के लोन की किस्त जारी नहीं हो पाएगी। जोकि मूल रूप से एक कॉलेज में पढ़ने के लिए स्वीकृत किया गया था। इससे छात्रा का शैक्षणिक करियर काफी हद तक प्रभावित हो सकता है। 

 

कश्मीरी युवाओं को मुख्यधारा में लाने की जरूरत

पीठ ने कहा, इसलिए हम केवल इस आधार पर कि छात्रा का भविष्य खराब हो सकता है और कानून के सवाल पर कोई राय व्यक्त किए बिना हम याचिका पर विचार करने से इनकार करते हैं। अत: विशेष अनुमति याचिका खारिज की जाती है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, छात्रा बांग्लादेश के एक कॉलेज से एमबीबीएस कर रही है। हां, उसकी ओर से गलतियां हैं, लेकिन हम सभी ने अपने युवा दिनों में गलतियां की हैं। वहीं, जस्टिस सूर्यकांत ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन के अधिवक्ता से कहा कि कश्मीरी युवाओं को मुख्यधारा में लाने की जरूरत है। हमें जम्मू-कश्मीर के युवाओं को शिक्षित करके उन्हें बढ़ावा देने की जरूरत है। आप युवा लड़की को उसके शैक्षणिक करियर से वंचित करना चाहते हैं। यह उचित नहीं होगा। 

 

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जानिए क्या था पूरा मामला?

वहीं, जम्मू-कश्मीर प्रशासन के लिए स्थायी वकील प्रसाद ने कहा कि कानूनी तौर पर यह विश्वास का उल्लंघन है। जम्मू-कश्मीर महिला विकास निगम ने 2018 में छात्रा के लिए स्वीकृत 30 लाख रुपये के लोन की पहली किस्त जारी की थी, लेकिन बाद की राशि को जारी करने से इनकार कर दिया था। क्योंकि उसने बांग्लादेश के कम्युनिटी बेस्ड मेडिकल कॉलेज की जगह ख्वाजा यूनुस अली मेडिकल कॉलेज में दाखिला ले लिया था। इतना ही नहीं, निगम ने नियमों का उल्लघंन बताते हुए पूर्व में दी गई पहली किस्त की राशि के छह लाख रुपये भी वापस मांगे थे। जिसे छात्रा ने जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। छात्रा ने दलील दी थी कि कम्युनिटी बेस्ड मेडिकल कॉलेज में सीट उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे दूसरे कॉलेज में मजबूरी में दाखिला लेना पड़ा था। 

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