UPSC Chairman: 'यूपीएससी में सफलता की एक ही चाबी...', चेयरमेन अजय कुमार ने दिए एस्पिरेंट्स के सवालों के जवाब
UPSC: यूपीएससी के अध्यक्ष अजय कुमार ने पहली बार वर्चुअल टाउनहॉल में अभ्यर्थियों के सवालों के जवाब दिए। उन्होंने ओएमआर शीट, सवाल हटाने की प्रक्रिया, कोचिंग की जरूरत, धोखाधड़ी पर सख्ती समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर पूछे गए सवालों के जवाब दिए।
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UPSC Chairman Ajay Kumar: यूपीएससी के चेयरमैन अजय कुमार ने पहली बार देशभर के सिविल सर्विस अभ्यर्थियों से सीधे संवाद की पहल की है। यह विशेष वर्चुअल टाउनहॉल हिंदी भाषा में आयोजित किया गया, जिसका सीधा प्रसारण आज दोपहर 12 बजे यूट्यूब पर किया गया। इस दौरान अजय कुमार ने एस्पिरेंट्स के सवालों के जवाब दिए।
यूपीएससी देश के गर्वनेंस को बैकबोन प्रदान करता है
अध्यक्ष अजय कुमार ने कहा, "एस्पिरेंट्स चाहे ग्रामीण क्षेत्र से हो या किसी और क्षेत्र से, हमारे लिए सभी लोग मिलकर भारत की विविधता को प्रदर्शित करते हैं। हमारे पूर्वजों ने जब यूपीएससी के बारे में सोचा था और इसकी रचना एक संवैधानिक निकाय की तरह की थी, तब उन्होंने यह सोचा था कि उसका एक संवैधानिक अभिभावक होना चाहिए। इसी वजह से आज भी यूपीएससी देश के गर्वनेंस को बैकबोन प्रदान करता है।"
उन्होंने आगे कहा, "बहुत कम संस्थाएं हैं जो 100 साल के बाद कह सकती हैं कि आज भी लोग उसपर उतना ही भरोसा करते हैं, जितना उनकी स्थापना के समय करते थे। यूपीएससी कभी भी किसी दबाव में नहीं आता है। इसके लिए हमारा मूलमंत्र कॉन्फिडेंशियलिटी है। अध्यक्ष होने के नाते मुझे भी सबकुछ पता नहीं रहता है। जिनको मालूम होना चाहिए, केवल उन्ही को मालूम होता है।"
यूपीएससी में सफलता की सिर्फ एक कुंजी, वो है मेरिट
उन्होंने बताया, "यूपीएससी में सफलता की केवल एक ही चाबी है, और वो है मेरिट। यहां सिर्फ मेरिट चलती है। हम हमेशा यह कोशिश करते हैं कि हर केंडिडेट को पूरी तरह से फेयरनेस मिले। इसी वजह से पिछले दशकों में यूपीएससी जितना इनक्लुसिव और कोई भी माध्यम नहीं है।"
अजय कुमार ने इस बात पर खेद जताया कि टाउनहॉल केवल हिंदी में हुआ। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में इस तरह के संवाद लगातार आयोजित किए जाएंगे और संभव है कि हर वर्ष टाउनहॉल सेशन हो। आइए जानते हैं इस टाउनहाल में अध्यक्ष अजय कुमार ने अभ्यर्थियों के सवालों के क्या जवाब दिए।
जवाब: अजय कुमार ने कहा कि आज सिस्टम यह है कि जो परीक्षाएं पहले हाफ ऑफ द ईयर में होते हैं उनका कटऑफ डेट जनवरी है और जो दूसरे हाफ ऑफ द ईयर में होते हैं उनका कटऑफ डेट अगस्त है। कटऑफ डेट में बदलाव करने से कुछ लोगों को फायदा होगा तो कुछ को नुकसान। यह कटऑफ डेट दशकों से चली आ रही है और सबसे लिए एकसमान है। अगर इस तारीख को बदलकर 1 जनवरी कर दी गई तो वो एस्पिरेंट्स के आठ नौ महीनों का नुकसान होगा। ज्यादातर परीक्षाओं की डिग्रियां मई-जून में मिलती हैं। ऐसे उम्मीदवार अगले साल जनवरी में ही परीक्षा में शामिल हो पाएगा। इस तरह उम्मीदवारों के सात-आठ महीने बर्बाद होंगे।
सवाल: बिना कोचिंग यूपीएससी कैसे क्लियर कर सकते हैं?
जवाब: कई अभ्यर्थियों ने पूछा कि क्या कोचिंग के बिना भी यूपीएससी पास किया जा सकता है। चेयरमैन ने जवाब दिया कि इस परीक्षा का सिलेबस ऐसा है जिसके लिए कोचिंग अनिवार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं बिना कोचिंग यूपीएससी क्लियर किया था और हर साल अनेक अभ्यर्थी स्वाध्याय के दम पर सफल होते हैं।
सवाल: पूजा खेडकर जैसे चीटिंग और फर्जीवाड़े मामलों से कैसे निपटेगा यूपीएससी ?
जवाब: पूजा खेड़कर जैसे मामलों का जिक्र होने पर चेयरमैन ने कहा कि आयोग किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी को बर्दाश्त नहीं करता। “हम ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हैं। ऐसे उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाता है और सख्त कार्रवाई होती है। आगे टेक्नोलॉजी के उपयोग से इस पर और नियंत्रण किया जाएगा।”
सवाल: ओएमआर शीट क्यों नहीं दिखाई जाती?
जवाब: एक उम्मीदवार ने पूछा कि आयोग उम्मीदवारों को ओएमआर या आंसर शीट क्यों नहीं दिखाता। इस पर अजय कुमार ने स्पष्ट किया कि आयोग हमेशा उत्तर कुंजी (Answer Key) उपलब्ध कराता है और परीक्षार्थी अपने दिए गए उत्तरों से अवगत रहते हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी को आवश्यकता हो तो वे आधिकारिक प्रक्रिया के माध्यम से अपनी ओएमआर शीट की कॉपी भी मांग सकते हैं।
सवाल: पेपर से प्रश्न क्यों हटाए जाते हैं?
जवाब: एक अन्य सवाल पर चेयरमैन ने बताया कि प्रश्न तैयार करने का काम अनुभवी विषय-विशेषज्ञ करते हैं। प्रश्नों के उत्तरों को भी अलग पैनल द्वारा जांचा जाता है। कभी-कभी किसी प्रश्न के दो अलग-अलग व्याख्या निकल आती है, ऐसे में अलग-अलग विशेषज्ञ पैनल से समीक्षा करवाई जाती है। यदि सवाल में अस्पष्टता पाई जाती है तो उसे पेपर से हटा दिया जाता है।
सवाल: पिछड़े इलाकों के छात्रों के लिए यूपीएससी कितना समावेशी?
जवाब: अजय कुमार ने कहा कि यूपीएससी देश की सबसे पारदर्शी और समावेशी परीक्षा है। मूल्यांकन के समय उम्मीदवार का बैकग्राउंड पूरी तरह गुप्त रखा जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि यूपीएससी परीक्षा में शामिल होने वाले 80% से अधिक अभ्यर्थी टियर-2 और टियर-3 शहरों से आते हैं।
सोशल मीडिया के जरिए भेजे अभ्यर्थियों ने सवाल
चेयरमैन ने अपने लिंक्डइन पोस्ट में लिखा था कि वह पहली बार यूपीएससी टाउनहॉल करने को लेकर उत्साहित हैं। अभ्यर्थी 1 अक्टूबर को दोपहर 12 से 1 बजे के बीच उनसे जुड़ सकते हैं। इस दौरान उम्मीदवार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स - एक्स, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #AskChairmanUPSC हैशटैग के साथ अपने सवाल साझा कर सकते थे।
28 से 30 सितंबर तक सुबह 10 बजे तक आयोग ने अभ्यर्थियों से प्रश्न आमंत्रित किए थे। परीक्षार्थी वीडियो या टेक्स्ट के माध्यम से अपने सवाल भेज सकते थे।
यूपीएससी के 100 साल
यूपीएससी की स्थापना 1 अक्तूबर 1926 को ली कमीशन की सिफारिशों पर गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1919 के तहत हुई थी। उस समय इसे पब्लिक सर्विस कमीशन कहा जाता था। 1937 में नाम बदलकर फेडरल पब्लिक सर्विस कमीशन किया गया। स्वतंत्रता के बाद जब 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू हुआ, तब इसका वर्तमान नाम यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) रखा गया। अगले वर्ष यूपीएससी अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करेगा।
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