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Hindi News ›   Education ›   Union Education Minister Nishank released All India Higher Education Survey 2019-20

चिंताजनक हालात: राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों, व्यावसायिक कोर्स में बेटियों की मौजूदगी सबसे कम

Fri, 11 Jun 2021 06:25 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 11 Jun 2021 06:25 AM IST
सार

  • पिछले वर्ष से 11 लाख अधिक छात्र उच्च शिक्षा से जुड़े
  • उच्च शिक्षा में बेटियों की संख्या में 3.8 फीसदी की बढ़ोतरी

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Union Education Minister Nishank  released All India Higher Education Survey 2019-20
छात्राएं - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बेटियों को उच्च शिक्षा से जोड़े रखने में मोदी सरकार की मुहिम काम कर रही है। उच्च शिक्षा में लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या में 3.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बृहस्पतिवार को अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वे ( एआईएसएचई ) 2019-20 की रिपोर्ट को मंजूरी दी। देश में सकल नामांकन अनुपात ( जीईआर) 27.1 फीसदी दर्ज किया गया है।  
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इसमें लड़कों का जीईआर 26.9 फीसदी और लड़कियों का जीईआर 27.3 फीसदी है। वहीं, इससे पहले वर्ष 2018-19 में देश का सकल नामांकन अनुपात 26.3 फीसदी था। नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षा मंत्रालय ने आगामी वर्षों में इस जीईआर को 40 फीसदी तक पहुंचाने का लक्षय रखा है।
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शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच सालों में देश के जीईआर में कुल 2.6 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2015-16 में यह 24.5 फीसदी थी।

इस दौरान लड़कों का जीईआर 1.5 फीसदी और बेटियों का जीईआर 3.8 फीसदी बढ़ा है। 2019-20 में कुल 1043 विश्वविद्यालय है। इसमें से 49 केंद्रीय विश्वविद्यालय, 135 राष्ट्रीय महत्व के संस्थान, 451 सरकारी विश्वविद्यालय और 408 निजी विश्वविद्यालय शामिल है। कॉलेजों की संख्या 39931 से बढ़कर 42343 हो गई है। जबकि स्वतंत्र कॉलेजों (स्टैंड अलोन) की संख्या 10725 से बढ़कर 11779 तक हो गई। 

उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व व केंद्रीय शिक्षा मंत्री के मार्गदर्शन में यह दसवीं एआईएसएचई रिपोर्ट जारी की गई है। लगातार बढ़ते एनरोलमेंट, संस्थानों की संख्या, कम होती लैंगिक असामनता हमारी नई शिक्षा नीति 2020 के एक्सेस, समानता एवं गुणवत्ता के प्रावधानों के अनुरूप हैं। हमें विश्वास है कि प्रधानमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के कुशल मार्गदर्शन में हम बहुत जल्द विश्वगुरु बनने के लक्ष्य को प्राप्त कर लेंगे।

अनुसूचित जाति के जीईआर में 3.5 फीसदी की बढ़ोतरी: 
रिपोर्ट के मुताबिक, देश के सकल नामांकन अनुपात में ही बढ़ोतरी नहीं हुई है। बल्कि  अनुसूचित जाति के सकल नामांकन अनुपात यानी जीईआर में पांच सालों में यह बढ़ोतरी 3.5 फीसदी अधिक है।2015 में यह 19.9 फीसदी थी और इस बार यह 23.4 फीसदी तक पहुंच गई है। वहीं, अनुसूचित जनजाति में यह बढ़ोतरी 3.8 अंक की है तथा कुल 18 फीसदी दर्ज की गई है। इससे पहले यह 14 फीसदी तक थी।

उच्च शिक्षा में 11.4 फीसदी अधिक छात्रों ने लिया दाखिला: उच्च शिक्षा में 18 से 23 आयुवर्ग के कुल 3,85,36,359 युवाओं ने दाखिला लिया है। इसमें से  1,96,43,747 लड़के और 1,88,92,612 लड़कियां शामिल हैं।

पिछले सालों में यह बढ़ोतरी 11.4 फीसदी अधिक है। इसमें लड़कियों की संख्या 18.2  फीसदी और लड़कों की 5.6 फीसदी की बढ़ोतरी है। उच्च् शिक्षा में 50 फीसदी से अधिक लड़कों ने दाखिला लिया है। हालांकि यदि कुछ नामांकन के आधार पर गणना करें तो बेटियों की संख्या अधिक है। जबकि 2018-19 में उच्च शिक्षा में 3.74 करोड़ युवाओं ने दाखिला लिया था। 

छात्र-शिक्षक अनुपात में सुधार
अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट प्रोग्रामों में 3.38 करोड़ छात्रों ने एनरोल किया है। इसमें से 85 फीसदी (2.85 करोड़) ने छह विषयों यानी हयूमैनिटिज, विज्ञान, कॉमर्स, इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी, मेडिकल साइंस और आईटी व कंप्यूटर में एनरोलमेंट करवाया। इसके अलावा पीएचडी करने वाले छात्रों की संख्या में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।  

2014-15 में 1.17 लाख छात्रों के मुकाबले 2019-20 में 2.03 छात्रों ने पीएचडी की। शिक्षकों की संख्या भी 2019-20 में 15,03,156 दर्ज की गई। इसमें से  57.5 फीसदी पुरुष और 42.5 फीसदी महिलाएं हैं।


छात्र-शिक्षक अनुपात रिपोर्ट के अनुसार, 2019-20 के दौरान देश में नियमित शिक्षा में एक शिक्षक के जिम्मे 23 छात्र हैं। अगर दूरस्थ शिक्षा को भी जोड़ लिया जाए तो यह अनुपात 26 बैठता है। 

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