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यूजीसी ने 35 विश्वविद्यालयों के ओपन कोर्स की मान्यता की खत्म, लाखों छात्रों का भविष्य अधर में फंसा

Sun, 12 Aug 2018 01:21 PM IST
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Updated Sun, 12 Aug 2018 01:21 PM IST
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UGC cancelled recognition of distance learning courses offered by 35 state and central universities

यूजीसी ने 35 स्टेट और सेंट्रल यूनिवर्सिटी द्वारा कराए जा रहे डिस्टेंस लर्निंग कोर्सों की मान्यता रद्द कर दी है। इससे देश भर में लाखों छात्रों का भविष्य अधर में फंस गया है। यूजीसी के फैसले को वापस लेने के लिए संस्थानों को एक महीने का समय दिया गया है। इसी बीच उन्हें स्पष्टीकरण देना होगा।

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टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, यूजीसी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि 5 सालों से नियमित रूप से यूनिवर्सिटी जिन कोर्सों का संचालन नहीं कर रही हैं, उसकी मान्यता रद्द होगी। साथ ही प्रोफेशनल कोर्स जैसे एमबीए, एमसीए, बीएड, होटल मैनेजमेंट और टूरिज्म आदि के लिए संबंधित रेग्युलेटरी अथॉरिटी से पहले मंजूरी लेनी होगी, उसके बाद ही मान्यता दी जाएगी। कोर्स को रद्द किए जाने के भय से कई यूनिवर्सिटियों ने ऑफर किए जाने वाले प्रोग्रामों की संख्या घटा दी है क्योंकि वे अनुपालन की जरूरतों को पूरा नहीं करते हैं। 
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महाराष्ट्र पर सबसे ज्यादा असर 
महाराष्ट्र इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। मुंबई यूनिवर्सिटी के इंस्टिट्यूट ऑफ डिस्टेंट एंड ओपन लर्निंग (आईडीओएल), शिवाजी यूनिवर्सिटी, मराठावाड़ा यूनिवर्सिटी और महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी की मान्यता खत्म हुई है। इसके अलावा यशवंतराव चाह्वान महाराष्ट्र ओपन यूनिवर्सिटी को 38 यूजी और पीजी प्रोग्रामों में से सिर्फ 17 में दाखिले की अनुमति मिली है। 

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मुंबई यूनिवर्सिटी के इंस्टिट्यूट ऑफ डिस्टेंट एंड ओपन लर्निंग (आईडीओएल) के निदेशक डी. हरिचंदन ने बताया कि, 'हमारे सभी कोर्सों की अनुशंसा एक्सपर्ट कमिटी ने की थी। हम नहीं जानते हैं कि उसके बाद क्या हुआ। मुंबई यूनिवर्सिटी एक स्वायत्त संस्था है और हमारे कोर्सों को हमारी ऐकडेमिक काउंसिल मान्यता देती है, हमारे कोर्सों की मान्यता खत्म करने वाला यूजीसी कौन है?' 

यूजीसी की ओर से बताया गया है कि, इस यूनिवर्सिटी के पास नेशनल असेस्टमेंट एंड ऐक्रेडिटेशन काउंसिल (एनएएसी) की मान्यता नहीं होने की वजह से मान्यता रद्द की गई है। अप्रैल 2017 में यूनिवर्सिटी के ग्रेड की समयसीमा खत्म हो गई थी। 6 फरवरी को यूजीसी द्वारा जारी नोटिस के मुताबिक किसी संस्थान को यूजीसी से मान्यता लेने के लिए तीन महीने के अंदर पहले एनएएसी से मान्यता लेनी होगी। अगर तीन महीने के अंदर एनएएसी से मान्यता नहीं मिलती है तो यूजीसी से भी मान्यता नहीं मिलेगी। सीनेट के एक सदस्य ने बताया कि, 'हमने अथॉरिटीज को इस बात की जानकारी दी थी, लेकिन किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई। समयसीमा अप्रैल में समाप्त हो गई।' 

इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (IGNOU) के वीसी नागेश्वर राव ने बताया कि, प्रोफेशनल कोर्स में दो या तीन अन्य प्रोग्राम को जोड़ने को लेकर थोड़ा कन्फ्यूजन है। हमने अपना रिकॉर्ड यूजीसी को वेरिफिकेशन के लिए भेज दिया है।

यशवंतराव चह्वान महाराष्ट्र ओपन यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर ई. वायुनंदन ने बताया कि जिन कोर्सों के लिए आवेदन किया था, उनमें से ज्यादा को वैधता प्रदान कर दी गई है लेकिन बुनियादी कोर्सों की ही मान्यता रद्द कर दी गई है। उदाहरण के लिए कॉमर्स के सभी कोर्सों जैसे बीकॉम कोऑप्रेटिव मैनेजमेंट और एमकॉम को मान्यता मिल गई है जबकि प्लेन बीकॉम प्रोग्राम को नहीं। 

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