कौन थे सैम मानेकशॉ: जिनकी वजह से पाकिस्तान के 90 हजार सैनिकों ने किया था आत्मसमर्पण, पढ़िए यहां
27 जून को जनरल सैन मानेकशॉ की 11वीं पुण्यतिथि है।
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तीन दिसंबर 1971 की बात है। पाकिस्तानी सेना ने भारत पर हमला कर दिया था। भारतीय सेना ने भी पाकिस्तानी सेना को करारा जवाब दिया। भारत और पाकिस्तान के बीच में यह युद्ध कई दिनों तक चलता रहा। कई सैनिक घायल हुए, कई वीरगति को प्राप्त हो गए। लेकिन भारतीय सेना डटकर युद्ध लड़ती रही। आखिरकार 13 दिनों बाद पाकिस्तानी सेना के 90 हजार से भी ज्यादा सैनिकों ने हथियार डाल दिए। यह इतिहास में पहली बार था जब इतनी बड़ी संख्या में सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था। कहा जाता है कि सेना के इस पराक्रम का श्रेय जनरल सैम मानेकशॉ को जाता है। आईए आज उनकी 11वीं पुण्यतिथि पर जानते हैं उनसे जुड़े कुछ किस्से। पढ़िए..
पिता के खिलाफ जाकर सेना में हुए भर्ती
सैम का जन्म 3 अप्रैल 1914 को अमृतसर में हुआ था। सैम के पिता डॉक्टर होर्मसजी मानेकशॉ थे। नैनीताल से अपनी प्रारंभिक पढ़ाई करने के बाद हिंदू सभा कॉलेज से मेडिकल की पढ़ाई की। अपने पिता के खिलाफ जाकर जुलाई 1932 में मानेकशॉ ने भारतीय सैन्य अकादमी में दाखिला लिया और दाे साल बाद 4/12 फ्रंटियर फोर्स रेजीमेंट में भर्ती हुए। छोटी सी उम्र में ही उन्हें युद्ध में शामिल होना पड़ा था।
द्वितीय विश्व युद्ध में खाई थी 7 गोलियां
अपने सैन्य करियर में सैम ने कई कठिनाईयों का सामना किया। छोटी सी उम्र में ही उन्हें युद्ध में शामिल होना पड़ा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सैम के शरीर में 7 गोलियां लगीं थी। सबने उनके बचने की उम्मीद ही छोड़ दी थी। लेकिन डॉक्टरों ने समय रहते सारी गोलियां निकाल दीं और उनकी जान बच गई।
जब सैम का जवाब सुनकर इंदिरा गांधी भी रह गई थी दंग
इतिहास के पन्नों में दर्ज इंदिरा गांधी और सैम मानेकशॉ का यह किस्सा का काफी मजेदार है। दरअसल, वर्ष 1971 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पाकिस्तान पर हमला करना चाहती थीं। लेकिन जनरल सैम ने पाकिस्तान से युद्ध करने से साफ इनकार कर दिया था। उन्होंने इंदिरा गांधी से कहा कि इस वक्त हमारी सेना युद्ध के लिए तैयार नहीं है। सेना को प्रशिक्षित करने के लिए कुछ समय चाहिए। यह सुनकर इंदिरा दंग रह गईं। उन्होंने सेना के प्रशिक्षण के लिए कुछ समय दिया और 1971 में सैम के नेतृत्व में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना के साथ युद्ध किया।
फील्ड मार्शल की उपाधि पाने वाले पहले भारतीय जनरल
सैन मानेकशॉ को अपने सैन्य करियर के दौरान कई सम्मान प्राप्त हुए। 59 की उम्र में उन्हें फील्ड मार्शल की उपाधि से नवाजा गया। यह सम्मान पाने वाले वह पहले भारतीय जनरल थे। 1972 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। एक साल बाद 1973 में वह सेना प्रमुख के पद से रिटायर हो गए। सेवा-निवृत्ति लेने के बाद वह वेलिंगटन चले गए। वेलिंगटन में ही वर्ष 2008 में उनका निधन हो गया।
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