तमिलनाडु: सरकार ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट पर जनता से मांगी राय
- सरकार ने नीट मुद्दे पर जनता की राय मांगी है जो कि 5 पन्नों से अधिक नहीं होनी चाहिए।
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तमिलनाडु के छात्रों पर मेडिकल में प्रवेश के लिए होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति के गठन के बाद अब सरकार ने इस मुद्दे पर जनता की राय मांगी है। सूबे की सरकार ने बकायदा विज्ञापन निकालकर नीट परीक्षा को लेकर लोगों से फीडबैक मांगा है। ये पब्लिक ओपिनियन 5 पृष्ठों से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसे अभ्यर्थी ईमेल या डाक के जरिए सीधे चिकित्सा शिक्षा परिसर के निदेशक को भेज सकते हैं। नीट मुद्दे पर अपनी राय देने वाले लोग neetimpact2021@gmail.com के जरिए भी अपनी ओपिनियन मेल कर सकते हैं।
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सरकार ने लोगों से 23 जून से पहले अपना फीडबैक देने के लिए कहा है। राज्य सरकार ने पिछले गुरुवार को कहा था कि मद्रास उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति एके राजन के नेतृत्व में एनईईटी समिति मेडिकल प्रवेश में सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के उम्मीदवारों पर एनईईटी परीक्षा के प्रभाव का अध्ययन करेगी और एक महीने में रिपोर्ट जमा करेगी। इस समिति में आठ अन्य सदस्य हैं जो डॉ जीआर रवींद्रनाथ (डॉक्टर्स एसोसिएशन फॉर सोशल इक्वेलिटी), जवाहर नेसन (शिक्षाविद) एवं छह शीर्ष सरकारी अधिकारी, जिनमें चिकित्सा व परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव शामिल हैं।
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एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि समिति द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर ही सरकार अपनी अगली कार्रवाई की योजना बनाएगी। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस महीने की शुरुआत में पीएम मोदी को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि तमिलनाडु को परीक्षा से छूट दी जाए और 12वीं के परिणामों का उपयोग करके एमबीबीएस की सीटें भरने की अनुमति दी जाए। अन्नाद्रमुक ने भी इसी तरह के सुझाव दिए थे। बता दें कि जब पहली बार साल 2012 में नीट परीक्षा की घोषणा की गई थी, तब आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु सहित कई राज्यों ने इसका कड़ा विरोध किया था। इन राज्यों का कहना था कि छात्रों के पाठ्यक्रम में अंतर होने के कारण उनको नुकसान हो सकता है।
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