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Supreme Court: अब डोमिसाइल नियम से ही तय होगा राज्य कोटे का हक, तेलंगाना में मेडिकल दाखिले पर 'सुप्रीम' फैसला

Mon, 01 Sep 2025 11:22 AM IST
शिवम गर्ग एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवम गर्ग Updated Mon, 01 Sep 2025 11:22 AM IST
सार

Telangana Domicile Rules: सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में दाखिले के लिए डोमिसाइल नियम को बरकरार रखा। अब केवल वही छात्र राज्य कोटे से प्रवेश पाएंगे जिन्होंने कक्षा 12 तक के अंतिम चार साल तेलंगाना में पढ़ाई की हो।

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Supreme Court upholds Telangana domicile rules for admissions in medical colleges under state quota; Read here
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

Telangana Domicile Rule Medical Admission: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (1 सितंबर) को तेलंगाना सरकार के डोमिसाइल नियम को बरकरार रखते हुए बड़ा फैसला सुनाया। इस फैसले के तहत, राज्य कोटे से मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में वही छात्र दाखिला पा सकेंगे, जिन्होंने तेलंगाना में कक्षा 12 तक के अंतिम चार साल पढ़ाई की है। हालांकि, इस मामले की विस्तृत जजमेंट आने बाकी है।

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मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने राज्य सरकार की अपील को स्वीकार करते हुए तेलंगाना मेडिकल एंड डेंटल कॉलेज एडमिशन रूल्स, 2017 (जो 2024 में संशोधित हुए थे) को संवैधानिक मानते हुए मंजूरी दी।

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हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने पलटा

इससे पहले तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा था कि राज्य के स्थायी निवासी केवल इस वजह से मेडिकल प्रवेश से वंचित नहीं किए जा सकते कि वे कुछ समय के लिए राज्य से बाहर रहे हों। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का यह फैसला पलट दिया और राज्य सरकार के पक्ष में निर्णय सुनाया।

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फैसला क्यों अहम है?

यह फैसला तेलंगाना के हजारों छात्रों के लिए राहत की खबर है। अब मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में राज्य कोटे के तहत सीटें उन्हीं छात्रों को मिलेंगी, जिन्होंने राज्य में लगातार चार साल तक पढ़ाई की हो।


राज्य की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और वकील श्रीवन कुमार कर्णम ने पैरवी की थी। अदालत ने 5 अगस्त को इस मामले पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसका निर्णय अब आ चुका है।

जुलाई 2024 में किया था संशोधित

तेलंगाना सरकार के अधीन निगमों, एजेंसियों और संस्थानों में कार्यरत उन कर्मचारियों के बच्चों को प्रवेश में विशेष छूट दी गई है, जिनकी सेवा शर्तों के अनुसार पूरे भारत में ट्रांसफर हो सकता है। यदि ऐसे कर्मचारी उम्मीदवार की पढ़ाई के दौरान तेलंगाना से बाहर पदस्थापित रहे हों, तो उनके बच्चों को इस आधार पर लाभ मिलेगा। हालांकि, इसके लिए अभ्यर्थी को सक्षम प्राधिकारी से प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा, जिससे यह साबित हो कि पढ़ाई के वर्षों में अभिभावक ने तेलंगाना से बाहर सेवा दी है।

हाईकोर्ट में कई याचिकाओं के जरिए तेलंगाना मेडिकल और डेंटल कॉलेज प्रवेश नियम, 2017 (MBBS और BDS पाठ्यक्रमों में प्रवेश) की वैधता को चुनौती दी गई थी। खासकर, नियम 3(ए) पर सवाल उठाए गए थे, जिसे 19 जुलाई 2024 को संशोधित किया गया था।

15% सीटें पहले ही आवंटित

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की राय से असहमति जताते हुए कहा कि संशोधन से पहले का नियम, जिसमें स्थानीय उम्मीदवार की परिभाषा दी गई थी, पूरी तरह सही था। वही तर्क संशोधित नियम पर भी समान रूप से लागू होता है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जब नियम की परिभाषा साफ है, राष्ट्रपति आदेश के अनुरूप है और पहले भी समान नियमों को बाध्यकारी मिसाल के रूप में मान्यता दी जा चुकी है, तो इसे "रीड डाउन" करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। अदालत ने कहा कि संशोधित नियम पर भी अलग दृष्टिकोण अपनाने का कोई कारण नहीं है।

साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया कि 15% सीटें पहले ही अखिल भारतीय कोटे (All India Quota) के तहत आवंटित की जा चुकी हैं।

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