Supreme Court: राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग से सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब,इंटर्नशिप के दौरान वजीफा न देने का मामला
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने इंटर्नशिप के दौरान वजीफा नहीं दिए जाने की कुछ विदेशी मेडिकल स्नातकों की शिकायत पर ध्यान देने के बाद मंगलवार को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) और मध्य प्रदेश स्थित एक सरकारी मेडिकल कॉलेज से जवाब मांगा।
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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने इंटर्नशिप के दौरान वजीफा नहीं दिए जाने की कुछ विदेशी मेडिकल स्नातकों की शिकायत पर ध्यान देने के बाद मंगलवार को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) और मध्य प्रदेश स्थित एक सरकारी मेडिकल कॉलेज से जवाब मांगा। न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने विदेशी मेडिकल कॉलेजों से डिग्री प्राप्त करने वाले पांच डॉक्टरों की ओर से पेश वकील तन्वी दुबे की दलीलों पर ध्यान दिया कि उनके साथ भारतीय संस्थानों से एमबीबीएस करने वालों के समान व्यवहार किया जाना चाहिए।
यह है पूरा मामला
पीठ ने तिरुवनंतपुरम के साजिथ एसएल समेत पांच की याचिका पर एनएमसी और विदिशा के अटल बिहारी वाजपेयी सरकारी मेडिकल कॉलेज के अलावा मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल को भी नोटिस जारी किया और सुनवाई के लिए 11 मार्च की तारीख तय की। दुबे ने संक्षिप्त सुनवाई के दौरान तर्क दिया कि इन छात्रों को मासिक वजीफे के उनके उचित दावे से वंचित किया जा रहा है, जबकि एनएमसी द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि उन्हें भारतीय मेडिकल स्नातकों के बराबर माना जाएगा।
याचिका में कहा गया है कि एक उचित रिट जारी करें। प्रतिवादी नंबर 1 (मेडिकल कॉलेज) को याचिकाकर्ताओं और सूची में शामिल छात्रों को उनकी इंटर्नशिप की पूरी अवधि के लिए नियमित मासिक वजीफा प्रदान करने का निर्देश दें। इसने अन्य मेडिकल कॉलेजों द्वारा अपनाए गए मानकों के अनुसार ऐसे छात्रों को उनकी इंटर्नशिप की पूरी अवधि के लिए भुगतान किए जाने वाले वजीफे का निर्धारण करने के लिए एनएमसी और अन्य को निर्देश देने की भी मांग की।
ये छात्र फिलहाल विदिशा के अटल बिहारी वाजपेई शासकीय मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप कर रहे हैं। याचिका में मध्य प्रदेश सरकार के चिकित्सा शिक्षा विभाग के 17 नवंबर, 2022 के नोटिस का भी हवाला दिया गया, जिसमें 01 अप्रैल, 2022 से प्रशिक्षुओं को 12,760 रुपये का वजीफा देने का प्रावधान किया गया था।
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