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SC: दिव्यांगों के लिए परीक्षा सुलभ बनाने को सुप्रीम कोर्ट का यूपीएससी को निर्देश, दो महीने में मांगी रिपोर्ट

Wed, 03 Dec 2025 08:59 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Wed, 03 Dec 2025 08:59 PM IST
सार

UPSC: सुप्रीम कोर्ट ने यूपीएससी को निर्देश दिया है कि वह हर परीक्षा अधिसूचना में स्क्राइब बदलने की अनुमति कम से कम परीक्षा से सात दिन पहले तक दे। कोर्ट ने स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर लागू करने की विस्तृत योजना दो महीने में हलफनामे के रूप में मांगी है, ताकि दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए परीक्षाएं सुलभ बन सकें।
 

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Supreme Court Orders UPSC to Allow Scribe Change and Implement Screen-Reader Plan
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI (फाइल फोटो)

विस्तार

UPSC: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को निर्देश दिया कि वह अपनी आने वाली सभी परीक्षा अधिसूचनाओं में एक स्पष्ट प्रावधान शामिल करे, जिसमें योग्य उम्मीदवारों को परीक्षा की तारीख से कम से कम सात दिन पहले तक अपने स्क्राइब (लिखने वाले सहायक) को बदलने की अनुमति दी जाए।

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दो महीने के भीतर दायर करना होगा हलफनामा

कोर्ट ने यूपीएससी से दो महीने के भीतर एक विस्तृत अनुपालन हलफनामा दाखिल करने को भी कहा है। इस हलफनामे में दृष्टिबाधित उम्मीदवारों के लिए स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर को लागू करने, उसकी समयसीमा, परीक्षण और उपयोग से जुड़ी पूरी योजना का विवरण देने को कहा गया है।

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पीठ की टिप्पणी

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि दिव्यांगजन को दिए गए अधिकार दया नहीं, बल्कि संविधान द्वारा सुनिश्चित समानता, गरिमा और भेदभाव-रहित माहौल का हिस्सा हैं। अदालत ने कहा कि असली समावेशिता केवल नीतियां बनाने से नहीं, बल्कि उन्हें ईमानदारी और प्रभावी तरीके से लागू करने से आती है।

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मिशन एक्सेसिबिलिटी संगठन ने दायर की थी याचिका

यह फैसला Mission Accessibility नामक संगठन की याचिका पर आया है, जिसने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में स्क्राइब पंजीकरण की समयसीमा में बदलाव की मांग की थी और स्क्रीन-रीडर वाले लैपटॉप तथा डिजिटल प्रश्नपत्रों की अनुमति भी चाही थी।

तीन कार्यदिवस के भीतर देना होगा निर्णय

अपने आदेश में कोर्ट ने यूपीएससी से कहा कि हर परीक्षा अधिसूचना में स्क्राइब बदलने की अनुमति का प्रावधान अनिवार्य रूप से जोड़ा जाए और ऐसे अनुरोध मिलने पर तीन कार्यदिवस के भीतर कारण सहित निर्णय दिया जाए।

स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर पर भी दायर करना होगा हलफनामा

कोर्ट ने यूपीएससी से यह भी कहा कि वह स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर की टेस्टिंग, मानकीकरण, वैलिडेशन और इसे सभी परीक्षा केंद्रों में लागू करने की प्रक्रिया भी हलफनामे में स्पष्ट करे। साथ ही यह भी बताए कि यह सुविधा अगली परीक्षा साइकिल से लागू की जा सकती है या नहीं।

यूपीएससी को निर्देश दिया गया कि वह दिव्यांगजन विभाग और नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर द एम्पावरमेंट ऑफ पर्सन्स विथ विजुअल डिसएबिलिटीज के साथ मिलकर स्क्रीन-रीडर और अन्य सहायक तकनीकों के इस्तेमाल से जुड़ी एक समान गाइडलाइन तैयार करे।

केंद्र को दिया यूपीएससी को सहयोग देने का आदेश

केंद्र सरकार से कहा गया है कि वह यूपीएससी को प्रशासनिक और तकनीकी सहायता दे और जरूरत पड़ने पर राज्यों व अन्य परीक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करे। कोर्ट ने कहा कि इन सभी उपायों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परीक्षाएं दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए पूरी तरह सुलभ हों और साथ ही परीक्षा की गोपनीयता व निष्पक्षता भी बनी रहे।

पीठ ने कहा कि ये निर्देश संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के उद्देश्य को व्यवहार में उतारने के लिए दिए जा रहे हैं। यूपीएससी जैसे महत्वपूर्ण संस्थान को चाहिए कि वह अपनी परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, संवेदनशील और हर वर्ग के लिए सुलभ बनाए।

अगली सुनवाई 16 फरवरी

कोर्ट ने कहा कि समान अवसर का असली मायने यह है कि बाधाओं को हटाया जाए, ताकि हर व्यक्ति अपनी पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ सके। कानून को औपचारिक समानता से आगे जाकर वास्तविक और सार्थक समावेशन सुनिश्चित करना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी को तय की गई है, जहां यूपीएससी को अपना अनुपालन हलफनामा दाखिल करना होगा।

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