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साक्षरता: कक्षा 10वीं, 12वीं में फेल छात्र न हों परेशान, उसी स्कूल की नियमित कक्षा में मिलेगा दाखिला

Wed, 17 Apr 2024 10:23 AM IST
सीमा शर्मा सीमा शर्मा
Updated Wed, 17 Apr 2024 10:23 AM IST
सार

Hundred percent literacy: अब फेल होने पर छात्र को प्राइवेट उम्मीदवार की तरह घर में रहकर पढ़ाई करने की जरूरत नहीं है। उसे उसी स्कूल की नियमित कक्षा में दोबारा दाखिला मिलेगा। पूरी खबर नीचे पढ़ें।

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Students who failed in class 10th, 12th should not worry, they will get admission in the regular class of the
Class 10th, 12th - फोटो : अमर उजाला, ग्राफिक

विस्तार

Class 10th, 12th: शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत राज्यों के साथ मिलकर वर्ष 2030 तक 100 फीसदी स्कूली साक्षरता का लक्ष्य पूरा करने की योजना तैयार की है और इसके लिए आंध्र प्रदेश के शिक्षा मॉडल को बेहतर माना है। शिक्षा राज्यों का विषय होता है, इसीलिए मंत्रालय ने सभी राज्यों से आंध्र की तरह योजना बनाकर अपने प्रदेश की शिक्षा में सुधार लाने को कहा है। दरअसल, देशभर के स्कूल शिक्षा बोर्ड में फेल शब्द को स्कूली शिक्षा की पढ़ाई बीच में छोड़ने का सबसे बड़ा कारण माना गया है। वर्ष 2024 में 10वीं में करीब 34 लाख छात्र फेल हुए हैं। जबकि वर्ष 2022-23 में 1.89 करोड़ से अधिक छात्र कक्षा 10वीं की परीक्षा में शामिल हुए थे। इसमें से 1.60 करोड़ से अधिक पास और करीब 29 लाख से अधिक फेल थे। देशभर में 10वीं कक्षा में ड्रॉपआउट प्रतिशत 2021-22 में 20.6% था, जबकि 2018-19 में 28.4% था और अब यह 21% है।

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ड्रॉपआउट रोकने के लिए आंध्रप्रदेश की पहल शानदार
आंध्र प्रदेश ने ड्रॉपआउट रोकने के लिए विभाग, स्कूलों के साथ-साथ पंचायतों को भी जोड़ा है। इसके लिए बच्चे की मां को आर्थिक सहायता दी जाती है, ताकि वह उसे काम की बजाय उसे शिक्षा से जोड़े रखने पर जोर दें। मिड-डे मील के अलावा अन्य सहयोग भी मिलता है। ग्राम पंचायत भी इसमें सहयोग देती है। इसके अलावा फेल होने पर छात्र को उसी स्कूल में नियमित कक्षा में दाखिला दिया जाता है। इन पहलों से आंध्रप्रदेश ने छात्रों के ड्राप काफी हद तक कम कर दिया है।

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बिहार और ओडिशा का ड्रॉपआउट सबसे अधिक
ओडिशा और बिहार में ड्रॉपआउट वाले छात्रों की संख्या सबसे अधिक है। ओडिशा में ड्रॉपआउट दर 39.4 से बढ़कर 49.9 प्रतिशत हो चुकी है, जबकि बिहार में ये दर 41.6 से बढ़कर 42.1 प्रतिशत तक है। इसी तरह महाराष्ट्र और गोवा में भी स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की संख्या में बढ़त दर्ज की गई है।

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10वीं और 12वीं में इतने लाख छात्र हुए थे असफल
राज्यों और सीबीएसई के स्कूलों में वर्ष 2022-23 में दसवीं में 27.50 लाख से अधिक और 12वीं कक्षा में 18.50 लाख से अधिक छात्र फेल हुए थे। स्कूलों में मनमाने नियमों के कारण ऐसे ज्यादातर छात्रों को दोबारा नियमित कक्षा में दाखिला ही नहीं मिला। स्कूलों को अपना रिजल्ट बेहतरीन की होड़ लगी हुई है। ऐसे में कमजोर छात्रों को जब स्कूल दाखिला नहीं देते हैं तो उन्हें प्राइवेट छात्र के रूप में अलग से परीक्षा देनी होती है।

इन सबके कारण छात्र घर में बैठकर खुद या प्राइवेट कोचिंग लेकर तैयारी करता है। इसके बाद करीब पांच लाख छात्र ही ओपन स्कूल बोर्ड में शामिल होकर अपनी पढ़ाई पूरी करते हैं। नियमित कक्षा में सहपाठियों के साथ पढ़ने का मौका न मिलने के कारण उनका आत्मविश्वास कमजोर होता है और वे पिछड़ते चले जाते हैं। इसी कारण फेल के बाद पास होने वाले छात्रों का आंकड़ा भी बेहद कम है।

ड्रॉपआउट में राज्यों की स्थिति

  • ओडिशा 49.9 प्रतिशत
  • बिहार 42.1 प्रतिशत
  • मेघालय 33.5 प्रतिशत
  • कर्नाटक 28.5 प्रतिशत
  • आंध्र प्रदेश 28.3 प्रतिशत
  • असम 28.3 प्रतिशत
  • गुजरात 28.2 प्रतिशत
  • तेलंगाना 27.4 प्रतिशत

इन राज्यों में ड्रॉपआउट सबसे कम
  • मध्य प्रदेश 9.8 प्रतिशत
  • उत्तर प्रदेश 9.2 प्रतिशत
  • तमिलनाडु 9 प्रतिशत
  • त्रिपुरा 3.8 प्रतिशतa
  • हिमाचल प्रदेश 2.5 प्रतिशत
  • हरियाणा 7.4 प्रतिशत
  • दिल्ली 1.3 प्रतिशत
  • मणिपुर 0 प्रतिशत
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